नहीं रुक रहा है पालीथिन का इस्तेमाल, छावनी परिषद को लक्ष्य पूरा करने में नहीं मिल रही सफलता

 वर्ष 2022 तक दिल्ली छावनी परिषद को सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त बनाने के लक्ष्य की दिशा में फिलहाल कोई खास सफलता नहीं मिली है। चाहे सब्जी मंडी हो या खाद्य सामग्री व घरेलू सामान से जुड़ी अन्य दुकानें, रेहड़ी यानी हर जगह सिंगल यूज प्लास्टिक का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है।

सदर बाजार सब्जी मंडी में विक्रेताओं ने बताया कि लाकडाउन से पहले पालीथिन के प्रयोग पर दिल्ली छावनी परिषद ने काफी सख्ती दिखाई थी। कई विक्रेताओं के पांच-पांच हजार रुपये का चालान भी हुए थे और लोगों में भी धीरे-धीरे घरों से कपड़े व जूट का थैला लाने की आदत विकसित हो रही थी, पर अब पालीथिन के इस्तेमाल पर कोई मनाही नहीं है। विक्रेताओं का कहना है कि पालीथिन का कोई विकल्प नहीं है।

हालांकि 51 माइक्रोन की पालीथिन का प्रयोग कर सकते है, लेकिन उनका दाम अधिक होने के कारण सभी उसके प्रयोग से बचते है। जमीनी स्थिति छावनी परिषद के तमाम दावों का मखौल उड़ाती हुई नजर आती है। ज्ञात हो कि सब्जी मंडी में पालीथिन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने के लिए छावनी परिषद ने घर-घर से पुराने कपड़े एकत्रित करने का अभियान शुरू किया था।

मुख्य सड़कों पर पुराने कपड़े एकत्रित करने के लिए प्वाइंट भी विकसित किए थे। उन कपड़ों से थैले बनाकर सब्जी मंडी में खरीदारों को पांच व दस रुपये में उपलब्ध कराने की बात कहीं गई थी। कुछ एकाध दिन तो कपड़े के बैग मंडी में नजर आए, लेकिन अब ऐसा कुछ नहीं है।

हालांकि सिंगल यूज प्लास्टिक युक्त डिस्पोजल बर्तन जैसे गिलास, स्ट्रो (पाइप), प्लेट का प्रयोग काफी सीमित हो गया है, जो सराहनीय कदम है, पर कोरोना महामारी के कारण एक वर्ष से पालीथिन के प्रयोग पर रोकथाम के लिए छावनी परिषद की ओर से न कोई चालान या कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है और न ही दुकानदारों को जागरूक किया गया है। हालांकि अब जब मामले कम हो गए है, तब भी छावनी परिषद इस दिशा में कोई योजना नहीं बना रहा है।

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