स्वास्थ्य विभाग का कारनामा 1 मई को हुई थी मृत्यु 30 अक्टूबर को लगा वैक्सीन, जारी हुआ सर्टिफिकेट

रायगढ़। वैक्सीनेशन अभियान में रायगढ़ ज़िला प्रदेश में अच्छा मुकाम हासिल करे इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। लेकिन दूसरी ओर स्थिति यह है कि अब फर्जी आंकड़े भी सामने आने लगे हैं, जिसमें स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने कागजों में मृत बुजुर्ग को कोरोना वैक्सीन का दूसरा डोज़ लगा दिया। जबकि सच्चाई यह है कि पहला टीका लगने के बाद ही बुजुर्ग की मई के महीने में मौत हो चुकी है। जब मृतक के परिजन के पास कोरोना वैक्सीन लगने का मैसेज पहुंचा तो वो हैरान रह गए।

मिली जानकारी के अनुसार.ग्राम तुरंगा पुसौर ज़िला रायगढ़ के नेहरूलाल नायक उम्र 74 वर्ष कोरोना पॉज़िटिव थे और 29 अप्रैल की रात ज़िला चिकित्सालय रायगढ़ के कोविड वार्ड में भर्ती हुए। इलाज के दौरान 1 मई को उनका निधन हो गया था। उनके पुत्र नरेंद्र नायक ने बकायदा उसी अवधि में उनका मृत्यु प्रमाण पत्र भी बनवा लिया गया था। इस संबंध में नेहरूलाल के पुत्र नरेंद्र नायक ने हिन्दुस्थान समाचार को बताया कि मेरे पिताजी को निधन के पूर्व 17 मार्च को कोविशील्ड का पहला डोज़ लगा था और निर्धारित अवधि आने से पूर्व ही उनका निधन हो गया था। 30 अक्टूबर को उनके मोबाइल पर टेक्स्ट मैसेज आया जिसमें उनकी पिता नेहरूलाल नायक को कोविशील्ड वैक्सीन का दूसरा डोज़ लगने की जानकारी थी और प्रमाण पत्र भी डाउनलोड करने का ऑप्शन था। पहले तो परिजन मैसेज पढ़कर हैरान रह गए और फिर उन्होंने वैक्सीनेशन का सर्टिफिकेट डाउनलोड कर लिया। नरेंद्र नायक का कहना है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होना चाहिए, संभवत: और भी लोगों के साथ ऐसा हुआ होगा।

नेहरूलाल नायक के नाम से दूसरा डोज़ लगाए जाने का मामला सामने आने से वैक्सीनेशन अभियान की वास्तविकता पर भी सवाल उठने लगे हैं कि क्या ज़िले में कोरोना वैक्सीन के टीकाकरण में फर्जीवाड़ा किया जा रहा है ? यदि ऐसी ही लापरवाही सामने आती रही तो लोगों का टीकाकरण विभाग पर से विश्वास उठ जाएगा।

इस संबंध में ज़िले के सीएमएचओ एसएन केशरी से बात की तो उन्होंने कहा कि इस मामले की जानकारी उन्हें आप से मिली है वे मामले को गंभीरतापूर्वक लेते हुए इसकी निष्पक्ष जांच करेंगे और जो भी गड़बड़ी सामने आती है उस पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

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