नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 128वें एपिसोड को संबोधित करते हुए लोगों को 2 दिसंबर को नया घाट में होने वाले चौथे काशी तमिल संगम में शामिल होने का आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि यह संगम तमिल भाषा और संस्कृति से जुड़े लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। प्रधानमंत्री ने जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति को तंजावुर की चोलकालीन कला पर आधारित नटराज की काशी प्रतिमा भेंट किए जाने का भी उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री ने नवंबर माह को बेहद प्रेरणादायक बताते हुए संविधान दिवस, ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूर्ण होने, राम मंदिर में धर्म ध्वजा, कुरुक्षेत्र में पांचजन्य स्मारक, हैदराबाद में दुनिया की सबसे बड़ी लीप इंजन एमआरओ सुविधा के उद्घाटन, आईएनएस माहे के नौसेना में शामिल होने और स्काई रूट के ‘इन्फिनिटी कैंपस’ द्वारा अंतरिक्ष आर्थिक तंत्र को मिली नई गति जैसी उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि भारत ने 35.7 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन के साथ नया रिकॉर्ड बनाया है, जो एक दशक पहले की तुलना में 10 करोड़ टन अधिक है।
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने पुणे के युवाओं की इसरो द्वारा आयोजित ड्रोन प्रतियोगिता में मिली उपलब्धि का उल्लेख किया, जहाँ उन्होंने मंगल ग्रह जैसी परिस्थितियों में ड्रोन उड़ाने में सफलता पाई। प्रधानमंत्री ने देश में शहद उत्पादन से जुड़ी प्रगति को भी रेखांकित किया।
प्रधानमंत्री ने विश्वभर में गीता के बढ़ते सम्मान का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि कुरुक्षेत्र में महाभारत अनुभव केंद्र में 3डी और डिजिटल तकनीक के माध्यम से कथाओं का सजीव अनुभव किया जा सकता है। ब्रह्म सरोवर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में अनेक देशों की भागीदारी हुई, जबकि सऊदी अरब में पहली बार सार्वजनिक मंच पर गीता की प्रस्तुति दी गई। यूरोप के कई देशों में भी विशेष गीता महोत्सव आयोजित किए गए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की संस्कृति शांति और करुणा का संदेश देती है। उन्होंने दक्षिणी इज़रायल के मोशाव नेवातिम में ‘जाम साहब’ की स्मृति में पत्रिका के अनावरण का उल्लेख किया। उन्होंने याद दिलाया कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नवानगर के महाराजा दिग्विजय सिंह ने पोलिश यहूदी बच्चों को आश्रय देकर मानवीय उदाहरण प्रस्तुत किया था।
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि देश के युवा एवं प्रोफेशनल प्राकृतिक खेती की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं और दक्षिण भारत में हो रहे प्रयास उत्सा
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