लोकसभा चुनाव 2019 में: वोट के लिए उमर अब्दुल्ला का विवादित टिप्पणी में कहा कुछ ऐसा…

जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के बाद उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि विशेष राज्य का दर्जा हटाया जाना ठीक नहीं है. नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अगर जम्मू कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा हटा लिया जाता है तो भारत के साथ रिश्ता खत्म हो जाएगा. उन्होंने कहा कि अगर विशेष राज्य का दर्जा हटाया जाता है तो फिर विलय पर भी बात करनी होगी. यहां गौर करने वाली बात यह है कि जम्मू कश्मीर में कांग्रेस और उमर अब्दुल्ला की पार्टी नेशनल कांफ्रेंस गठबंधन करके लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha elections 2019) लड़ रही है.

उमर ने विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि वे जेकेएलएफ़ और जमात-ए-इस्लामी पर लगे प्रतिबंध को हटवाने की कोशिश करेंगे. वे यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा कि वे जम्मू कश्मीर में अपना प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति का पद दोबारा शुरू करा देंगे.

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा कि हम जम्मू कश्मीर का प्रधानमंत्री दोबारा से ले आएंगे. महबूबा मुफ़्ती पर निशाना साधते हुए कहा कि हम वह बात करते हैं जिससे लोग धोखे में न रहें. उन्होंने एक बार फिर से कहा कि अगर 370 या 35ए को हटाने की बात होती है तो फिर जम्मू कश्मीर के हिंदुस्तान के साथ विलय पर भी बात करनी होगी.

उत्तरी कश्मीर के बांदीपुरा ज़िले में सोमवार को एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि इस लोकसभा चुनाव 2019 को मामूली नहीं समझा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि आज हमारे ऊपर तरह-तरह के हमले हो रहे हैं, साजिशें रची जा रही हैं और बड़ी-बड़ी ताक़तें जम्मू कश्मीर की पहचान को मिटाने के लिए निकली हैं. 

उमर ने कहा कि अमित शाह ने एक टीवी चैनल के साथ बात करते हुए कहा कि 2020 तक हम जम्मू कश्मीर में से 35ए को हटाने का काम करेंगे. इससे पहले देश के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी धमकी देते हुए कहा कि 35ए और 370 को हटाने का काम होगा.
        
उमर ने कहा कि जम्मू कश्मीर बाकी रियासतों की तरह नहीं है. बाकी रियासतें बिना शर्त रखे हिंदुस्तान में मिल गए, लेकिन हम मुफ्त में नहीं आए, हमने शर्तें रखी. उमर ने कहा कि हमने अपनी पहचान बनाए रखने के लिए संविधान में कुछ चीज़ें दर्ज करवाई. हमने कहा कि हमारी पहचान अपनी होगी, संविधान अपना होगा, झंडा अपना होगा. हमने उस वक़्त अपना ‘सद्र-ए-रियासत’ और ‘प्रधानमंत्री’ भी अपना रखा था, जिसे उन्होंने काटा, इनशा अल्लाह उसको भी वापस ले आएंगे. 

उन्होंने यह भी कहा कि हमारी रियासत को बाकी रियासतों के साथ तुलना नहीं की जानी चाहिए. हमने अगर कुछ मांग के लिया, लेकिन उसके बदले में दोस्ती का हाथ भी तो बढ़ाया. 

वहीं बाद में पत्रकारों के साथ बात करते हुए उमर ने महबूबा मुफ़्ती पर निशाना साधते हुए कहा कि हम उन लोगों में से नहीं हैं जो लोगों को धोखे में रखें. उन्होंने कहा कि महबूबा मुफ़्ती ने बारामुला में अपने संबोधन के दौरान कहा कि अगर पीडीपी की हकूमत आएगी तो वे जेकेएलएफ़ और जमात-ए-इस्लामी पर लगाए गए बैन को हटवा देंगे. उमर ने कहा कि बैन रियासती हकूमत की ओर से नहीं, बल्कि केंद्र सरकार ने लगाया है. 

उन्होंने कहा कि हमें केंद्र को तैयार करना होगा इस बैन को उठवाने के लिए इसलिए तो हम आज भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं. यह भी कहा कि जो भाजपा के दोस्त यहां बने हुए हैं, जिन्होंने कुछ महीने पहले मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने की कोशिश की, हमें उन लोगों और भाजपा से होशियार रहना होगा. उमर ने कहा कि उम्मीद है कि केंद्र की हकूमत हम बदला देंगे और उसके बाद जो यह बैन लगा हुआ है उसे हटवाने की कोशिश की जाएगी.
        
उन्होने कहा कि जहां तक 35ए को हटाने की बात आती है तो हम ऐसा होने नहीं देंगे. इस रियासत के लोगों के साथ वादा किया गया है, उस वादे में कोई वक़्त की पाबंदी नहीं है. किसी ने यह नहीं कहा कि ये 10 साल के लिए है या 20 या फिर 70 साल के लिए. हमें यह कहा गया है कि जब तक जम्मू कश्मीर इस मुल्क का हिस्सा बने रहे तब तक उन्हे यह विशेष दर्जा हासिल होगा. जिस दिन इस विशेष दर्जे को हटा दिया जाता है तो हमारा इस मुल्क के साथ रिश्ता क्या रह जाता है. उमर ने कहा कि इसी बुनियाद पर ही तो रिश्ता है और अगर यह हटाया जाता है तो फिर विलय पर भी बात करनी होगी.

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