प्रतियोगी छात्र बजा रहे हैं ‘जांच’ के नाम का ‘ झुनझुना ’ – राघवेंद्र प्रताप सिंह

लखनऊ : उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा प्रति वर्ष आयोजित की जाने वाली पीसीएस एवं पीपीएस सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के ‘पीड़ित’ अभ्यर्थी एवं पूर्ववर्ती राज्य सरकार की कुत्सित सोच के ‘शिकार’ वर्तमान सरकार के कार्यकाल में भी छले जा रहे हैं।
उन्हें अब भी न्याय नहीं मिला है। मिला है तो सिर्फ जांच के नाम का झुनझुना। प्रतियोगी छात्रों को सूबे की योगी सरकार से बहुत उम्मीदें थीं लेकिन फिलहाल उनके हाथ सिर्फ निराशा लगी है।

पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा की जाने वाली पीसीएस की भर्ती सहित कई अन्य भर्तियों में जमकर धांधली हुई थी। यहां तक की आयोग के मुखिया के पद पर तैनाती तक के नियमों को अनदेखा किया गया था। आयोग से जुड़े तमाम प्रकरणों को न्यायालय में चुनौती तक दी गयी थी। जहां से बकायदा फटकार तक मिली थी, साथ ही आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष अनिल यादव की नियुक्ति को अवैध घोषित करते हुए उन्हें बाहर का रास्ता भी दिखाया।

प्रतियोगिओं के साथ किसी तरह का अन्याय बर्दास्त नहीं किया जाएगा। जो भी दोषी होगा उसे कठोर सजा मिलेगी। गलत करने वालों की जगह जेल है। जरूरत पड़ी तो उनकी संपत्ति भी जब्त की जाएगी। हमारी सरकार प्रदेश के लाखों प्रतियोगियो के साथ है ।प्रदेश के युवा प्रतियोगियों को न्याय मिलेगा। – योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री

पीसीएस 2016 में डिप्टी कलेक्टर और डिप्टी एसपी को मिलाकर 633 पद हैं जबकि पीसीएस 2017 में डिप्टी कलेक्टर और डिप्टी एसपी समेत विभिन्न श्रेणी के 677 पद शामिल हैं। स्पष्ट है कि प्रशासनिक सेवा की राज्य की इन दोनों भर्ती परीक्षाओं के 1310 पदों का अंतिम चयन कानूनी विवाद में है। प्रतियोगी छात्रों की याचिका पर उच्च न्यायालय ने पीसीएस-2016-प्री में पूछे गए चार प्रश्नों को हटा और एक प्रश्न के उत्तर के दो विकल्पों को सही मानते हुए नौ दिसंबर 2016 को पीसीएस-2016-प्री का परिणाम संशोधित करने का आदेश दिया था।
इस आदेश के खिलाफ आयोग की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में की गई विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर परिणाम संशोधन संबंधी उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी थी।

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आयोग की मनमानी के खिलाफ प्रतियोगी छात्रों ने योगी सरकार से न्याय की गुहार लगायी। जिसके बाद 20 जुलाई 2017 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की सीबीआई जाँच कराने की घोषणा की। उसके बाद 31 जुलाई 2017 को इस सम्बन्ध में केंद्र सरकार को सिफारिश की गई।

अवनीश पांडेय

सरकार अविलम्ब सीबीआई क्राइम ब्रांच 1 में नए कप्तान की नियुक्ति करे । अभी तो सीबीआई के पास अनिल यादव सहित आयोग के अन्य भष्ट्र अफसरों को गिरफ्तार करने का प्रमाण है इसलिए इन सभी की गिरफ्तारी हो अन्यथा आगामी चुनाव में प्रदेश के युवा बदले की भावना से वोट करने को तैयार हैं । युवाओं को ज्ञात है कि गिरफ्तारी न होने का कारण सीबीआई पर सरकार का दवाब है और इसी कारण श्री राजीव रंजन का समय स्थानांतरण हुआ है । – अवनीश पांडेय

करीब साढ़े तीन महीन बाद 21 नवम्बर 2017 को केन्द्र सरकार के कार्मिक व पेंशन मंत्रालय द्वारा उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग उत्तर प्रदेश की सीबीआई जांच की अधिसूचना जारी की। जाँच का जिम्मा राजीव रंजन एस.पी., सीबीआई भ्रष्टाचार निरोधक प्रकोष्ठ शाखा प्रथम को सौंपा गया। राजीव रंजन ने 25 जनवरी 2018 को लखनऊ में इस सम्बन्ध में पीई संख्या 176/18 दर्ज की गई तथा जांच प्रारम्भ हुई।

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31 जनवरी 2018 को राजीव रंजन का उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में आयोगकर्मियों के भारी विरोध के बीच प्रवेश हुआ तथा कागजों की तलाशी शुरू हुई। इसी बीच लोक सेवा आयोग के वर्तमान अध्यक्ष अनिरुद्ध सिंह यादव द्वारा याचिका संख्या 62997/2017 के माध्यम से लोक सेवा आयोग की जांच रोकने की अपील उच्च न्यायालय में की गई जिसमें छात्र भी अनिरुद्ध यादव के विरुद्ध पक्षकार बने, क्योंकि जाँच के कारण ही प्रतियोगी छात्रों की याचिका औचित्यहीन हुई थी। यह याचिका बहस के पश्चात 28 फरवरी 2018 को खारिज हो गई।

अनिरूद्ध यादव इसके विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी (सी) 9724/2018 के माध्यम में जांच रोकने की अपील की किन्तु उच्च न्यायालय ने जांच रोकने से इंकार कर दिया। इसी बीच 5 मई 2018 को सीबीआई टीम ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के विरुद्ध पहली प्राथमिकी दर्ज की। प्राथमिकी संख्या-आरसीएसी1 2018 ए 0008 में आईपीसी की धारा 120 बी, 420 पीसी एक्ट 1988 धारा 13 (2) आर/डब्ल्यू 13 (1) (डी) के तरह अज्ञात के विरुद्ध मामला दर्ज कर भारी फोर्स के साथ आयोग पर छापेमारी की तथा अहम दस्तावेज सील किये। सीबीआई ने छापेमारी के दौरान अपर निजी सचिव भर्ती-2010 में भारी गड़बड़ी पाई।

जिसके बाद उत्तर प्रदेश शासन को 19 जून 2018 को पत्र लिखकर जाँच की अनुमति मांगी। 4 अक्टूबर 2018 को उत्तर प्रदेश शासन द्वारा अपर निजी सचिव भर्ती परीक्षा के सम्पूर्ण परिणाम के जाँच का अनुमोदन गृहमन्त्रालय भेज दिया गया है। अचानक गृह मंत्रालय ने 17 नवम्बर 2018 को जाँच के आईओ राजीव रंजन को सीबीआई से हटाकर उनके गृह प्रदेश सिक्किम भेजने का निर्देश दिया गया। साफ है कि राजीव रंजन खुलासे के करीब पहुंच गये थे इसीलिए ‘अज्ञात शक्तियां’ उनका तबादला कराने में सफल हो गयीं।

अनिरूद्ध यादव की एसएलपी पर गृहमंत्रालय का जवाब नहीं लगाना जिसका जवाब अततः सीबीआई को ही लगाना पड़ा। दिलचस्प तथ्य यह है कि राज्य सरकार के अनुमोदन के बाद भी गृह मंत्रालय द्वारा अपर निजी सचिव भर्ती 2010 की जाँच हेतु नोटिफिकेशन जारी करने के बजाय अधिकारी को ही सिक्किम भेजने का आदेश दे दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी के सकारात्मक रवैये और सीबीआई जांच के आदेष से उत्साहित छात्र अब जांच की गति और दषा से खासे निराश हैं।

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