अविश्वास प्रस्ताव के पीछे राहुल गांधी का ये है गेम प्लान

मॉनसून सत्र के तीसरे दिन यानी आज अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग होनी है, ऐसे में सदन सत्र हंगामेदार रह सकता है. वहीं, विपक्ष अपने ही द्वारा शुरू किए गए खेल में फंस सकता है. दरअसल, विपक्ष के पास संख्या बल नहीं है, ऐसे में सवाल उठता है कि अविश्वास प्रस्ताव से विपक्ष का कौन-सा हित सधने वाला है? आखिरी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का गेम प्लान क्या है?मॉनसून सत्र के तीसरे दिन यानी आज अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग होनी है, ऐसे में सदन सत्र हंगामेदार रह सकता है. वहीं, विपक्ष अपने ही द्वारा शुरू किए गए खेल में फंस सकता है. दरअसल, विपक्ष के पास संख्या बल नहीं है, ऐसे में सवाल उठता है कि अविश्वास प्रस्ताव से विपक्ष का कौन-सा हित सधने वाला है? आखिरी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का गेम प्लान क्या है?  गौर हो कि राहुल गांधी ने अपने एक बयान में कहा था कि मुझे बस 15 मिनट का मौका दे दें, भूकंप आ जाएगा. तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए 15 मिनट का वो वक्त आ गया है, जिसकी पिछले कई महीनों से वो मांग कर रहे थे. आज देश देखेगा कि राहुल अपने 15 मिनट के भाषण में कैसा भूकंप ला पाते हैं क्योंकि अब तक राहुल संसद से ज्यादा संसद के बाहर गरजते नजर आए हैं.  हालांकि, राहुल क्या बोलेंगे इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं. वो संसद के बाहर विभिन्न मसलों पर सरकार पर बरसते रहे हैं. संसद में आज भी उनका भाषण कमोबेश उसी के इर्द-गिर्द घूमता नजर आ सकता है. अविश्वास प्रस्ताव के पीछे राहुल की रणनीति भी यही है कि संसद में मोदी सरकार को घेरा जा सके. राहुल की रणनीति होगी कि मोदी सरकार की नाकामियां गिनाकर देश के सामने निकम्मी सरकार की छवि बनाई जा सके.  राहुल उन आरोपों को फिर से दोहरा सकते हैं कि...  > नोटबंदी से छोटे कारोबार बंद हो गए.  > जीएसटी से कारोबारियों को नुकसान हुआ.  > पेट्रोल-डीजल के दाम पर काबू नहीं है.  > तेल, दाल, सब्जी के दाम बढ़ते गए हैं.  > भीड़ के हाथों हत्याएं बेतहाशा बढ़ी हैं.  > बैंक घोटालों की बाढ़ आ गई है.  > नीरव मोदी, ललित मोदी और विजय माल्या का मामला उठा सकते हैं.  > साथ ही स्विस बैंकों में भारतीयों के जमा धन में इजाफे का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर ये आरोप लगा सकते हैं कि मोदी सरकार विदेश से काला धन लाने में नाकाम रही है.  कुल मिलाकर कांग्रेस देश के सबसे बड़े मंच पर सरकार को घेरकर 2019 की पिच तैयार करना चाहती है. लेकिन, सरकार को घेरने के मंसूबे में राहुल कितने कामयाब होंगे इसका पता तो आज शाम तक ही चल पाएगा, क्योंकि उनका मुकाबले सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से होगा जो उन पर तीखा पलटवार करने में कभी चूकते नहीं हैं. ऐसे में एक तो प्रचंड बहुमत और ऊपर से पीएम मोदी जैसा प्रखर वक्ता, ऐसे में राहुल के लिए जोखिम बड़ा है. कहीं इस अविश्वास प्रस्ताव से नफा कम और नुकसान ज्यादा ना हो जाए.

गौर हो कि राहुल गांधी ने अपने एक बयान में कहा था कि मुझे बस 15 मिनट का मौका दे दें, भूकंप आ जाएगा. तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए 15 मिनट का वो वक्त आ गया है, जिसकी पिछले कई महीनों से वो मांग कर रहे थे. आज देश देखेगा कि राहुल अपने 15 मिनट के भाषण में कैसा भूकंप ला पाते हैं क्योंकि अब तक राहुल संसद से ज्यादा संसद के बाहर गरजते नजर आए हैं.

हालांकि, राहुल क्या बोलेंगे इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं. वो संसद के बाहर विभिन्न मसलों पर सरकार पर बरसते रहे हैं. संसद में आज भी उनका भाषण कमोबेश उसी के इर्द-गिर्द घूमता नजर आ सकता है. अविश्वास प्रस्ताव के पीछे राहुल की रणनीति भी यही है कि संसद में मोदी सरकार को घेरा जा सके. राहुल की रणनीति होगी कि मोदी सरकार की नाकामियां गिनाकर देश के सामने निकम्मी सरकार की छवि बनाई जा सके.

राहुल उन आरोपों को फिर से दोहरा सकते हैं कि…

> नोटबंदी से छोटे कारोबार बंद हो गए.

> जीएसटी से कारोबारियों को नुकसान हुआ.

> पेट्रोल-डीजल के दाम पर काबू नहीं है.

> तेल, दाल, सब्जी के दाम बढ़ते गए हैं.

> भीड़ के हाथों हत्याएं बेतहाशा बढ़ी हैं.

> बैंक घोटालों की बाढ़ आ गई है.

> नीरव मोदी, ललित मोदी और विजय माल्या का मामला उठा सकते हैं.

> साथ ही स्विस बैंकों में भारतीयों के जमा धन में इजाफे का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर ये आरोप लगा सकते हैं कि मोदी सरकार विदेश से काला धन लाने में नाकाम रही है.

कुल मिलाकर कांग्रेस देश के सबसे बड़े मंच पर सरकार को घेरकर 2019 की पिच तैयार करना चाहती है. लेकिन, सरकार को घेरने के मंसूबे में राहुल कितने कामयाब होंगे इसका पता तो आज शाम तक ही चल पाएगा, क्योंकि उनका मुकाबले सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से होगा जो उन पर तीखा पलटवार करने में कभी चूकते नहीं हैं. ऐसे में एक तो प्रचंड बहुमत और ऊपर से पीएम मोदी जैसा प्रखर वक्ता, ऐसे में राहुल के लिए जोखिम बड़ा है. कहीं इस अविश्वास प्रस्ताव से नफा कम और नुकसान ज्यादा ना हो जाए.

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