अल्मोड़ा और पौड़ी जिले के इतने गांव होंगे आबाद

पलायन की मार से सबसे अधिक प्रभावित अल्मोड़ा और पौड़ी जिले के 60 गांवों को आबाद करने की दिशा में सरकार पहल करने जा रही है। ये ऐसे गांव हैं, जिनकी जनसंख्या दो से 10 के बीच ही रह गई है। इन सभी गांवों के विकास के लिए ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग कार्ययोजना तैयार कर रहा है।राज्य में अल्मोड़ा और पौड़ी जिले ऐसे हैं, जहां जनसंख्या घटी है। इसकी वजह है गांवों से निरंतर हो रहा पलायन। इसे देखते हुए ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग ने पलायन की मार से त्रस्त गांवों को संवारने के लिए कार्ययोजना तैयार करने का निश्चय किया है। इस कड़ी में पहले चरण में अल्मोड़ा और पौड़ी के 30-30 गांवों को लिया गया है। आयोग के उपाध्यक्ष डॉ.एसएस नेगी बताते हैं कि महज दो से 10 के बीच जनसंख्या वाले इन गांवों का सर्वे कर वहा रह रहे लोगों की राय के आधार पर कृषि समेत आर्थिक गतिविधियों के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी।पलायन की मार से सबसे अधिक प्रभावित अल्मोड़ा और पौड़ी जिले के 60 गांवों को आबाद करने की दिशा में सरकार पहल करने जा रही है। ये ऐसे गांव हैं, जिनकी जनसंख्या दो से 10 के बीच ही रह गई है। इन सभी गांवों के विकास के लिए ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग कार्ययोजना तैयार कर रहा है।राज्य में अल्मोड़ा और पौड़ी जिले ऐसे हैं, जहां जनसंख्या घटी है। इसकी वजह है गांवों से निरंतर हो रहा पलायन। इसे देखते हुए ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग ने पलायन की मार से त्रस्त गांवों को संवारने के लिए कार्ययोजना तैयार करने का निश्चय किया है। इस कड़ी में पहले चरण में अल्मोड़ा और पौड़ी के 30-30 गांवों को लिया गया है। आयोग के उपाध्यक्ष डॉ.एसएस नेगी बताते हैं कि महज दो से 10 के बीच जनसंख्या वाले इन गांवों का सर्वे कर वहा रह रहे लोगों की राय के आधार पर कृषि समेत आर्थिक गतिविधियों के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी।   सर्वे में इन गांवों में खाली पड़ी भूमि, घरों के उपयोग, मूलभूत सुविधाएं, सामाजिक-आर्थिक विकास से संबंधित कार्य समेत अन्य पहलुओं को शामिल किया जाएगा। डॉ.नेगी के अनुसार इस सर्वे के दौरान गांवों से पलायन कर चुके लोगों से भी रायशुमारी का प्रयास किया जाएगा। इसके पीछे मंशा यह है कि लोगों को रिवर्स पलायन के लिए भी प्रेरित किया जाए। यही नहीं, इन गांवों में सामूहिक खेती पर भी जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कार्ययोजना तैयार कर इसे सरकार को सौंपा जाएगा।

सर्वे में इन गांवों में खाली पड़ी भूमि, घरों के उपयोग, मूलभूत सुविधाएं, सामाजिक-आर्थिक विकास से संबंधित कार्य समेत अन्य पहलुओं को शामिल किया जाएगा। डॉ.नेगी के अनुसार इस सर्वे के दौरान गांवों से पलायन कर चुके लोगों से भी रायशुमारी का प्रयास किया जाएगा। इसके पीछे मंशा यह है कि लोगों को रिवर्स पलायन के लिए भी प्रेरित किया जाए। यही नहीं, इन गांवों में सामूहिक खेती पर भी जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कार्ययोजना तैयार कर इसे सरकार को सौंपा जाएगा।

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