Prayagraj : पत्रकारों को पीटने वाले पुलिसकर्मियों पर अभी तक कार्रवाई नहीं!

-सौरभ सिंह सोमवंशी

प्रयागराज : जिले के सराय इनायत थाने में 17 जुलाई को दो पत्रकारों और एक पत्रकार की गर्भवती पत्नी को बंद कर पीटा गया। पीटने के आरोप वहां के थानाध्यक्ष संजय द्विवेदी, दरोगा आकाश कुमार राय व कौशलेंद्र द्विवेदी पर लगा है। ये तीनों अब भी इसी थाने में तैनात हैं और जांच प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। इनके खिलाफ एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई है। पूरे घटनाक्रम को लेकर पत्रकारों में भारी रोष है। पत्रकारों के गुस्से को देखते हुए और दोषियों को दंडित किए जाने की मांग पर पुलिस कप्तान ने इस प्रकरण की जांच सीओ यानि क्षेत्राधिकारी को सौंप दी, लेकिन क्षेत्राधिकारी (फूलपुर) पर मामले की जांच के बहाने लीपापोती के आरोप लगने लगे हैं। उन्होंने उन पत्रकारों का 161 का बयान अब तक नहीं लिया जो मौके पर मौजूद थे।

इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के नवनिर्वाचित अध्यक्ष अमरेंद्र नाथ सिंह का कहना है कि किसी भी घटना में प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए और निष्पक्ष विवेचना होनी चाहिए। ऐसा नहीं हो रहा है तो यह प्रशासनिक चूक है और इसका दंड जिम्मेदार पुलिसकर्मियों को अवश्य मिलेगा। श्री सिंह ने कहा कि पत्रकार समाज में उत्पीड़ित लोगों की आवाज उठाता है और हम अधिवक्ता उनको न्याय दिलाने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस के खिलाफ एफआईआर होनी चाहिए। उसने गर्भवती महिला के ऊपर हाथ उठाया है, यह निंदनीय कृत्य है। उन्होंने कहा कि जब किसी भी व्यक्ति के ऊपर जांच चल रही हो तो उस समय तक उसको अपने पद पर बरकरार रहने का कोई अधिकार नहीं है अन्यथा निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है। लिहाजा सराय इनायत थाने के थाना अध्यक्ष संजय द्ववेदी और दरोगा आकाश कुमार राय के साथ कौशलेंद द्विवेद्वी व अन्य पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जाना चाहिए।

ज्ञात हो कि पिछले दिनों सराय इनायत थाने में दो पत्रकारों इरफान और अजय विश्वकर्मा व अजय की पत्नी को थाने में जमकर पीटा गया था। इसके बाद मामला प्रयागराज के सिविल लाइंस के सरदार पटेल मार्ग स्थित मीडिया हब का संचालन करने वाले शार्प रिपोर्टर पत्रिका के संस्थापक वीरेंद्र सिंह पत्रकार के पास पहुंचा तो उन्होंने प्रयागराज के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिषेक दीक्षित से मुलाकात कर मामले में कार्यवाही की मांग की. तत्पश्चात सीओ फूलपुर को जांच दी गई, परंतु मामले में सीओ फूलपुर के द्वारा लीपापोती की जा रही है, ऐसा पत्रकारों ने आरोप लगाया है। सोरांव विधानसभा क्षेत्र से विधायक डॉक्टर जमुना प्रसाद सरोज ने मामले की मजिस्ट्रेटी जांच हेतु प्रयागराज के कमिश्नर आर रमेश कुमार को पत्र लिखा है। पत्रकार अजय विश्वकर्मा और उनकी 8 माह की गर्भवती पत्नी सरिता विश्वकर्मा एवं पत्रकार मोहम्मद इरफान की सराय इनायत थाने में पुलिसकर्मियों द्वारा विगत दिनों बर्बरतापूर्वक पिटाई किए जाने के प्रकरण में वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्र सिंह ने लगभग 60 पत्रकारों के साथ प्रयागराज के पुलिस महानिरीक्षक कवींद्र प्रताप सिंह व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिषेक दीक्षित से मुलाकात की। पत्रकारों ने आरोप लगाया कि क्षेत्राधिकारी फूलपुर द्वारा लीपापोती कर पुलिसकर्मियों को बचाने का कार्य किया जा रहा है।

विदित हो कि थाना अध्यक्ष सराय इनायत संजय द्विवेदी की शह पर दरोगा आकाश राय और कौशलेंद्र दुबे एवं अन्य पुलिसकर्मियों द्वारा दोनों पत्रकारों व 8 माह की गर्भवती महिला के साथ बर्बरता पूर्वक लॉकअप में बंद करके लगातार आधे घंटे से ऊपर तक लाठी-डंडे व बेल्ट से पानी डाल-डालकर पीटा गया था। प्रकरण प्रयागराज मंडल के सभी उच्च अधिकारियों के साथ-साथ लखनऊ शासन तक पहुंच चुका है। पत्रकारों का प्रतिनिधिमंडल विगत दिनों में डिस्ट्रिक्ट कोआपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड के चेयरमैन व भाजपा नेता प्रेम कुमार सिंह उर्फ लल्ले सिंह तथा अपना दल एस के प्रदेश अध्यक्ष व सोरांव विधानसभा क्षेत्र से विधायक डॉक्टर जमुना प्रसाद सरोज व फूलपुर सांसद केशरी देवी पटेल से मिल चुका है। डॉक्टर जमुना प्रसाद सरोज ने दूरसंचार के माध्यम से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक व सराय इनायत थाना अध्यक्ष से इस संदर्भ में बात भी की। कई पत्रकारों के द्वारा इसकी सूचना उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को भी दूरभाष पर दिया गया। बावजूद इसके प्रयागराज की पुलिस अपने विभागीय कर्मचारियों को बचाने में लगी हुई है।

पत्रकारों ने सर्वसम्मति से मांग की कि इसकी जांच किसी मजिस्ट्रेट के द्वारा कराया जाना अति आवश्यक है। 2 दिन पहले एडीजी पुलिस प्रेम प्रकाश से भी पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की थी जिसमें एडीजी पुलिस ने अलग से एक जांच गंगा पार पुलिस अधीक्षक एनपी सिंह को सौंपी है। सोरांव विधायक जमुना प्रसाद सरोज ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाने की भी बात कही है। साथ ही साथ उन्होंने मंडलायुक्त प्रयागराज को मजिस्ट्रेट जांच हेतु पत्र भी लिखा है।

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