हेल्थ – Shaurya Times | शौर्य टाइम्स http://www.shauryatimes.com Latest Hindi News Portal Sat, 25 Oct 2025 05:42:44 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.8.3 छठ मईया का सबसे प्रिय फल है गन्ना, इस महाप्रसाद के फायदे जानकर आप नहीं करेंगे यकीन http://www.shauryatimes.com/news/211647 Sat, 25 Oct 2025 05:42:44 +0000 https://www.shauryatimes.com/?p=211647

छठ महापर्व की शुरुआत आज यानी  25 अक्तूबर, शनिवार से हो गई है. यह भारत के सबसे पवित्र त्योहारों में से एक है. दिवाली के तुरंत बाद लोग छठ की तैयारियों में जुट जाते हैं. यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से खास है बल्कि वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है. छठ में सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है और छठी मैया की पूजा की जाती है. इस दौरान पूजा में जो सबसे अहम भूमिका निभाता है, वह है गन्ना (Sugarcane). कहा जाता है कि गन्ना छठ मैया का प्रिय फल है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि गन्ना खाने सेहत के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है. चलिए आपको इसके फायदें बारे में बताते हैं.

गन्ना क्यों है खास?

गन्ना ऊर्जा, शुद्धता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. आयुर्वेद में भी इसे औषधीय गुणों से भरपूर बताया गया है. वैज्ञानिक के नजरिए से देखें तो गन्ना शरीर को ऊर्जा देने, लिवर को साफ रखने और पाचन को दुरुस्त करने का काम करता है.

शरीर को देता है तुरंत एनर्जी

गन्ने में नेचुरल शुगर होती है, जो शरीर को तुरंत ग्लूकोज प्रदान करती है. इसे खाने या इसका रस पीने से शरीर को इंस्टेंट एनर्जी मिलती है. गर्मी के मौसम में यह शरीर को हाइड्रेट रखता है, क्योंकि इसमें पानी की मात्रा काफी अधिक होती है. इसलिए गन्ना थकान और कमजोरी को दूर करने में बेहद फायदेमंद माना जाता है.

लिवर के लिए वरदान

गन्ना लिवर को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स लिवर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाते हैं और शरीर से टॉक्सिन्स निकालने में मदद करते हैं. यह पीलिया (Jaundice) जैसी बीमारियों से बचाव करता है. आयुर्वेद में गन्ने को नेचुरल लिवर क्लेंज़र कहा गया है.

पाचन को रखे मजबूत

गन्ने में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जिससे पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है. यह कब्ज, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है. गन्ने को चबाने के दौरान निकलने वाली लार पेट के एसिड को बैलेंस में रखने में मदद करती है, जिससे पाचन प्रक्रिया बेहतर होती है.

यूरिन संबंधी समस्याओं में राहत

गन्ना मूत्र संबंधी परेशानियों में भी फायदेमंद है. यदि किसी को जलन या बार-बार पेशाब आने की समस्या है, तो गन्ने का सेवन राहत दिला सकता है. यह शरीर में लिक्विड बैलेंस बनाए रखता है और इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है, जिससे सर्दी-जुकाम जैसी समस्याएं भी कम होती हैं.

 

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खरगोनः ग्राम बमनाला में आज लगेगा संभाग स्तरीय निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर http://www.shauryatimes.com/news/207198 Sat, 20 Sep 2025 05:47:24 +0000 https://www.shauryatimes.com/?p=207198 इंदौर,  मध्य प्रदेश के इंदौर संभाग में खरगोन जिले के भीकनगांव विकासखण्ड के ग्राम बमनाला में आज शनिवार को संभाग स्तरीय निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया जाएगा। इस शिविर में इंदौर के अनुभवी चिकित्सक उपस्थित रहकर आमजनों की स्वास्थ्य जांच एवं उपचार करेंगे।

खरगोन कलेक्टर भव्या मित्तल ने बताया कि स्वास्थ्य शिविर में आधुनिक मशीनों के माध्यम से उच्च रक्तचाप, कैंसर, डायबिटीज, दंत रोग, नेत्र रोग आदि की जांचें जाएंगी। शिविर में जाँच के बाद चिन्हित मरीजों के नि:शुल्क इलाज की व्यवस्था की जायेगी। शिविर में शासकीय अस्पतालों के चिकित्सक विशेषज्ञ सहित निजी अस्पतालों के चिकित्सक भी अपनी सेवाएं देंगे। इसके अलावा होम्योपैथी और आयुष महाविद्यालयों के चिकित्सक भी मौजूद रहेंगे।

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हाईकोर्ट ने कहा, सरकारी स्कूल-अस्पताल में इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी, लेकिन निजी में भीड़ पड़ रही http://www.shauryatimes.com/news/207103 Sat, 20 Sep 2025 04:42:10 +0000 https://www.shauryatimes.com/?p=207103 जयपुर,  हाईकोर्ट की खंडपीठ ने प्रदेश में स्कूलों के जर्जर भवनों पर लिए गए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान मामले में मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकारी स्कूल व अस्पताल में इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी है। लेकिन निजी स्कूलों में भीड़ पड़ रही है जबकि सरकारी स्कूलों में बच्चों की कमी है। ऐसे में आमजन पढ़ाई-दवाई और कमाई के लिए बाहर जाता है क्योंकि सरकारी स्कूल व अस्पताल में आधारभूत सुविधाएं ही नहीं हैं। झालावाड़ स्कूल हादसे के बाद सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारने का काम कर रही है, लेकिन हादसे से पहले इन्फ्रास्ट्रक्चर पर काम क्यों नहीं किया गया। जस्टिस महेन्द्र गोयल व जस्टिस अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने यह टिप्पणी स्वप्रेरित प्रसंज्ञान मामले की।

सुनवाई के दौरान आदेश के पालन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों की ओर से जर्जर स्कूलों में राज्य सरकार की ओर से की गई व्यवस्था पर रिपोर्ट पेश की। अदालत ने रिपोर्ट को रिकार्ड पर लेते हुए इसकी कॉपी राज्य सरकार व न्याय मित्र को मुहैया कराने के लिए कहा। राज्य सरकार की सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में 5 हजार 667 स्कूल जर्जर हालत में मिलें। इनमें 86 हजार 934 भवन जर्जर मिले थे। गौरतलब है कि झालावाड़ के पिपलोदी में हुए स्कूल हादसे के बाद हाईकोर्ट ने जर्जर स्कूल भवनों और बच्चों की सुरक्षा के लिए स्व: प्रसंज्ञान लिया था। मामले में पूर्व में अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि स्कूल के किसी भी जर्जर भवन में कक्षाएं नहीं लगाई जाएं और राज्य सरकार बच्चों की पढ़ाई के लिए अन्य जगह पर वैकल्पिक व्यवस्था करें।

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अमरूद में छिपा है कई बीमारियों का इलाज http://www.shauryatimes.com/news/206848 Fri, 19 Sep 2025 04:41:56 +0000 https://www.shauryatimes.com/?p=206848

पतंजलि आयुर्वेद के संस्थापक आचार्य बालकृष्ण आयुर्वेद से आसाध्य रोगों को भी पीड़ितों को छुटकारा दिलाने के नुस्खे बताते रहते हैं. इसके साथ ही उन्होंने खाद्य पदार्थों के जरिए भी बीमारियों से निजात दिलाने के उपाय बताए हैं. यहां हम आपको अमरूद से होने वाले फायदे और उसने ठीक होने वाली बीमारियों के बारे में बताने जा रहे हैं. जिसका जिक्र खुद पतंजलि आयुर्वेद के संस्थापक आचार्य बालकृष्ण ने किया है.

आचार्य बालकृष्ण के मुताबिक, अमरूद के सेवन से कई प्रकार की बीमारियों से निजात मिल सकती हैं. आचार्य बालकृष्ण का कहना है कि आयुर्वेद में अमरूद को एक अमृत फल और दिव्य फल कहा गया है. जिसका सेवन शुगर के रोगी भी कर सकते हैं. किडनी रोगियों के लिए भी अमरूद का सेवन बेहद फायदेमंद होता है.

इन बीमारियों में कारगर है अमरूद का सेवन

आचार्य बालकृष्ण के मुताबिक, अमरूद का सेवन करना कई बीमारियों में लाभदायक है. इसीलिए इसे आयुर्वेद में त्रिदोष नाशक माना गया है. अमरुद पेट के लिए बहुत ही लाभकारी फल माना गया है ये बहुत ही गुणकारी फल है. पेट के रोगियों को अगर अमरुद का नियमित सेवन कराया जाए तो पाचन संबंधी परेशानियों के साथ गैस्ट्रिक ट्रबल है कब्ज में आराम मिलता है. अमरूद के सेवन से मन को प्रसन्न रहता है. आचार्य बालकृष्ण का कहना है कि अमरुद त्रिदेव को शक्ति भी देता है जिन लोगों का हार्ट यानी हृदय कमजोर हो या घबराहट या बहुत ही बेचैनी हो ऐसे लोगों को अमरुद का मुरब्बा बनाकर खिलाना चाहिए. अमरूद का मुरब्बा हृदय रोगियों के लिए बहुत ही लाभकारी हैं.

अमरूद के सेवन से मिलती है दिमाग को ताकत

इसके साथ ही अमरूद के सेवन से दिमाग को ताकत मिलती है. अमरूद का सेवन बहुत ही लाभकारी माना गया है और आयुर्वेद के अंदर इसको दाह नाशक कहा गया है. जिनके लोगों के हाथ पैरों में जलन रहती हो उन्हें नियमित रूप से अमरूद का सेवन करना चाहिए. इसके अलावा कमजोरी महसूस होने पर अमरूद का सेवन करना भी ऊर्जा देता है.

आचार्य बालकृष्ण का कहना है कि भोजन को हमेशा कम से कम 32 बार चबाकर खाना चाहिए. क्योंकि भगवान ने हमें 32 दांत दिए हैं, इसलिए दांतों का काम आंतों से नहीं लेना चाहिए. आचार्य बालकृष्ण का कहना है कि भोजन को हमेशा कम से कम 32 बार चबाकर खाना चाहिए. क्योंकि भगवान ने हमें 32 दांत दिए हैं, इसलिए दांतों का काम आंतों से नहीं लेना चाहिए.

खांसी की समस्या को दूर करता है भुना हुआ अमरूद

अमरूद का सेवन खांसी में भी फायदेमंद होता है. भुना हुआ अमरूद खाने से खांसी की समस्या से निजात मिलती है. आचार्य बालकृष्ण के मुताबिक, खांसी होने पर अधपके अमरूद को बीच से काट लें और नमक या सेंधा नमक डालकर उसे भून लें उसके बाद उसका सेवन करें. इसके सेवन से पुरानी से पुरानी खांसी की समस्या ठीक हो जाती है. इसके साथ ही भूने हुए अमरूद के सेवन से भूख न लगने की समस्या और लीवर डैमेज में भी लाभ होता है.

 

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पहले बच्चे के बाद कब करना चाहिए दूसरा बेबी, WHO ने दिया जवाब http://www.shauryatimes.com/news/205527 Thu, 11 Sep 2025 05:26:31 +0000 https://www.shauryatimes.com/?p=205527

दो बच्चों के बीच सही अंतर होना काफी जरूरी होता है, क्योंकि इससे ना सिर्फ मां की सेहत को टाइम मिलता है बल्कि बच्चों को पूरा टाइम, प्यार और परवरिश मिलती है. इसके साथ-साथ माता-पिता को भी दूसरी प्रेग्नेंसी के लिए शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से तैयार होने का समय मिल सके. वहीं कुछ लोग जल्दी दूसरा बच्चा चाहते हैं तो कुछ लोग कुछ सालों का इंतजार चाहते हैं. वहीं इस बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जवाब दिया है. आइए आपको बताते हैं.

क्या है WHO की राय

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, पहले बच्चे के जन्म के बाद महिला को कम से केम 2 से 3 साल का इंतजार रखना चाहिए.

यह फर्क मां के शरीर को दोबारा स्वस्थ होने और पोषण स्तर को पूरा करने का पर्याप्त समय देता है.

इसके साथ ही अगले गर्भ में बच्चे के स्वस्थ विकास के लिए भी यह समय महत्वपूर्ण माना जाता है.

मां के लिए क्यों जरूरी है

प्रेग्नेंसी और डिलीवरी के दौरान महिला के शरीर से काफी पोषक तत्व और ऊर्जा खर्च हो जाती है.

वहीं अगर कोई महिला जल्दबाजी में दोबारा प्रेग्नेंट हो जाती है, तो उसके शरीर को रिकवरी का समय नहीं मिलता है.

इससे एनीमिया, कमजोरी, हाई ब्लड प्रेशर और गर्भपात का खतरा बढ़ सकता है.

वहीं लंबे टाइम से मां का शरीर फिर से मजबूत होता है और अगली प्रेग्नेंसी सुरक्षित रहती है.

बच्चे पर असर

WHO की गाइडलाइन के अनुसार, अगर गर्भधारण जल्दी हो जाए तो पहले बच्चे और दूसरे बच्चे दोनों की सेहत प्रभावित हो सकती है.

जल्दी दूसरा बच्चा होने से अक्सर बच्चे का वजन कम रह जाता है.

समय से पहले जन्म का खतरा बढ़ जाता है.

बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास पर भी असर पड़ सकता है.

मानसिक तैयारी

दूसरा बच्चा प्लान करने से पहले माता-पिता को ना केवल शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी तैयार होना चाहिए.

पहले बच्चे की देखभाल, उसकी जरूरतें और नए जीवन की ज़िम्मेदारियां माता-पिता को कई बार थका देती हैं.

ऐसे में जब तक मां-बाप खुद मानसिक रूप से तैयार न हों, तब तक दूसरा बच्चा प्लान करना उचित नहीं है.

इन बातों का रखें ध्यान

डॉक्टर की सलाह जरूर लें और अपनी स्वास्थ्य स्थिति की जांच कराएं.

संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से शरीर को मजबूत बनाएं.

तनाव कम करें और नींद पूरी लें.

पहले बच्चे की देखभाल के लिए पर्याप्त सपोर्ट सिस्टम तैयार रखें.

 

 

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मानसून में गोभी खाने वाले हो जाएं सावधान http://www.shauryatimes.com/news/198404 Thu, 17 Jul 2025 05:09:34 +0000 https://www.shauryatimes.com/?p=198404

मानसून के मौसम में पत्तागोभी और फूलगोभी जैसी सब्जियों का सेवन करते हैं तो आपको सावधान करने की जरूरत है.  बरसात का मौसम हरियाली और ताजगी तो लाता है, लेकिन इसके साथ कई तरह की बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. खासतौर पर हरी सब्जियों को लेकर लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत होती है. इस मौसम में वातावरण में नमी बढ़ जाने के कारण सब्जियों पर कीड़े, बैक्टीरिया और फफूंद तेजी से पनपने लगते हैं.

ये टिप्स अपनाएं

फूलगोभी या फिर पत्तागोभी बारिश के मौसम में मिलने वाले भी खरीद कर खाना पसंद करते हैं तो पकाते समय थोड़ी सावधानी बरतें. बारिश के कीड़े इनके अंदर घुसे रहते हैं. इस मौसम में कीड़े लगना आम है. आप फूलगोभी और पत्तागोभी को ध्यान से काटें. इसे काटकर गर्म पानी में थोड़ी देर डुबाकर रखें. इसमें नमक भी थोड़ा सा डाल दें. कीड़े बाहर निकल आएंगे.

आप गोभी को सिरके वाले पानी में भी डुबाकर थोड़ी देर छोड़कर देखिए. इसमें भी थोड़ा सा नमक मिला सकते हैं. ये सब्जी वाले बरसाती कीड़े तुरंत खुद ब खुद बाहर निकल आएंगे. फिर आप साफ पानी में एक बार और सब्जियों को साफ कर लें.

एक कटोरे में गर्म पानी लें. उसमें एक चम्मच हल्दी और एक चम्मच नमक डाल दें. गोभी और पत्तागोभी को 15 मिनट के लिए छोड़ दें. दोनों सब्जियों को अलग-अलग कटोरे में डालें.

सिरके को डालने से सब्जी पर लगे कीटाणु, बैक्टीरिया और फफूंद निकल जाते हैं. आप नींबू का रस, बेकिंग सोडा वाले पानी में भी फूलगोभी को काटकर डाल दें. लाभ होगा.– मार्केट में सब्जियों को साफ करने वाला लिक्विड या सैनिटाइजर भी आता है. इनका भी इस्तेमाल बारिश में सब्जियों को पकाने से पहले जरूर करें वरना आपका पेट खराब हो सकता है. पेट में इंफेक्शन हो सकता है.

आप अपने फ्रिज से बर्फ के टुकड़े निकालें. इसे एक बाउल में डालें और थोड़ा सा पानी डाल दें. इसमें फूलगोभी के छोटे-छोटे कटे हुए टुकड़ों को डालकर छोड़ दें. 10 मिनट के अंदर कीड़े ठंड से अकड़कर खुद ही पानी में ऊपर आ जाएंगे.

 

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क्या ब्रेस्ट में गांठ होना हमेशा होता है स्तन कैंसर http://www.shauryatimes.com/news/197530 Fri, 11 Jul 2025 05:03:58 +0000 https://www.shauryatimes.com/?p=197530 ब्रेस्ट कैंसर एक ऐसी घातक बीमारी है जो कि इन दिनों महिलाओं में आम हो चुकी है. इसमें ब्रेस्ट के अंदर की सेल्स असामान्य तरीके से बढ़ने लगती हैं और गांठ बना देती हैं. वहीं हर साल लाखों की संख्या में महिलाओं की मौत ब्रेस्ट कैंसर के कारण ही होती है. लेकिन इसके बावजूद महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूकता कम देखी जाती है.

ब्रेस्ट में गांठ

ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआत का पहला लक्षण ब्रेस्ट में बनने वाली गांठ है. इसलिए ज्यादातर महिलाओं को लगता है कि ब्रेस्ट में बनने वाली छोटी से छोटी गांठ भी ब्रेस्ट कैंसर का कारण है, लेकिन ब्रेस्ट में बनने वाली हर गांठ कैंसर नहीं होती है. कई बार सिस्ट और अन्य मेडिकल कारणों से भी महिलाओं के स्तनों में गांठ बनती है.ब्रेस्ट की गांठ अक्सर स्तन ऊतक में या उसके आस-पास या अंडरआर्म क्षेत्र में एक ठोस या मोटे धब्बे की तरह महसूस होती है. ब्रेस्ट कैंसर की गांठ आस-पास के स्तन ऊतक की तुलना में अधिक ठोस होगी

 

ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण

स्तन में गांठ या मोटापनब्रेस्ट कैंसर का यह सबसे आम लक्षण है. स्तन या बगल में सख्त गांठ महसूस होती है और इस गांठ में दर्द नहीं होता.

स्तन के आकार में बदलावब्रेस्ट कैंसर की समस्या होने पर महिलाएं स्तन के आकार में परिवर्तन महसूस कर सकती हैं. अगर स्तन के आकार में असामान्य बदलाव दिखे, तो यह संकेत हो सकता है.

निप्पल से रिसावनिप्पल से खून, पीप या किसी भी तरह का असामान्य तरल पदार्थ निकलना एक चेतावनी हो सकती है, खासकर अगर यह अपने आप हो.

त्वचा में बदलाव: स्तन की त्वचा पर लालिमा, डिंपलिंग (संतरे के छिलके जैसी बनावट), या झुर्रियां पड़ना असामान्य हो सकता है.

निप्पल का अंदर की ओर खिंच जाना: अगर निप्पल अचानक अंदर की ओर मुड़ जाए, तो यह भी एक लक्षण हो सकता है. निप्पल के रंगों में भी बदलाव आ सकता है.

दर्द: हालांकि ब्रेस्ट कैंसर के मरीज आमतौर पर दर्द महसूस नहीं करते हैं, लेकिन कुछ मामलों में स्तन या बगल में लगातार दर्द हो सकता है.

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क्या आप भी गलत तरीक से धोते हैं हाथ, तो जानिए हाथ धोने का सही तरीका http://www.shauryatimes.com/news/197003 Tue, 08 Jul 2025 05:20:44 +0000 https://www.shauryatimes.com/?p=197003
देश भर में एक बार फिर से कोविड के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. वहीं मानसून का सीजन आने से अन्य संक्रमण से संबंधित बीमारियां भी सामने आने लगती है. इन बीमारियों से बचने के लिए जरूरी है कि आप पर्सनल हाइजीन का ध्यान जरूर रखें. वहीं इन सभी चीजों के लिए हमारे हाथ एक अहम भूमिका निभाते है. लेकिन बहुत कम लोगों को हाथ धोने का सही तरीका पता है.

हैंड वॉश करने का सही तरीका

हैंड वॉश के टाइम  ‘सुमंक’ को अपनाना चाहिए. ‘सुमंक’ अंग्रेजी के लेटर ‘एसयूएमएएनके’ से मिलकर बना है. यूनीसेफ के अनुसार, इन 6 प्रक्रिया में कम से कम 40 सेकंड तक साबुन से हाथ धोना चाहिए, फिर साफ पानी से धोकर सुखाना चाहिए.

‘एस’ का मतलब है ‘सीधा’- यानी धोते हुए साबुन से पहले सीधी हथेलियों को बारी-बारी से घिसें.

‘यू’ का मतलब है ‘उल्टा’- जिसके अनुसार हाथों को उल्टा करके भी बारी-बारी से रगड़े.

‘एम’ मतलब ‘मुट्ठी’- यानी मुट्ठी बंद करने के बाद भी हाथों को साबुन से अच्छी तरह रगड़े.

‘ए’ का मतलब है अंगूठे- यानी मुट्ठी बंद कर हाथों को रगड़ने के बाद अंगूठों को भी ठीक से रगड़ें.

‘एन’ का मतलब है ‘नाखून’- यानी अपने नाखूनों को भी अच्छी तरह साफ करें.

‘के’ कलाई को दर्शाता है- यानी सबसे अंत में अपनी कलाइयों को भी ठीक से रगड़ें.

प्रभावी तरीका

स्वच्छ भारत मिशन के अनुसार, सही तरीके से हाथ धोने से बीमारियों से बचा जा सकता है. साबुन और पानी से बार-बार हाथ धोने की आदत डालकर, न केवल स्वस्थ भविष्य की ओर कदम बढ़ा सकते हैं बल्कि कई बीमारियों को पनपने से भी रोक सकते हैं. नियमित रूप से ‘सुमंक’ विधि अपनाकर कई बीमारियों से बचा जा सकता है.

 

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सेहत के साथ त्वचा के लिए भी फायदेमंद है ये फल http://www.shauryatimes.com/news/197000 Tue, 08 Jul 2025 05:19:06 +0000 https://www.shauryatimes.com/?p=197000

कुछ फल ऐसे होते हैं जो कि हमारी सेहत के साथ-साथ हमारी त्वचा के लिए भी काफी फायदेमंद होते हैं. यह फल विटामिन,  मिनरल और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाने के साथ-साथ त्वचा को चमकदार और हेल्दी बनाए रखने में मदद करता है. वहीं हर साल 8 जुलाई को विश्व त्वचा स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है. जिसका उद्देश्य है कि लोगों को त्वचा के स्वास्थ्य के महत्व के बारे में बताए और उसकी देखभाल के बारे में जागरूकता बढ़ाना है.  आइए आपको इस फल के बारे में बताते है.

कौन-सा फल

दरअसल, हम बात कर रहे हैं पपीता की जिसको खाने के साथ-साथ त्वचा पर लगाने से भी कई फायदे मिलते हैं. पपीता साल 8 जुलाई को विश्व त्वचा स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है. जिसका उद्देश्य है कि लोगों को त्वचा के स्वास्थ्य के महत्व के बारे में बताए और उसकी देखभाल के बारे में जागरूकता बढ़ाना है.

सेहत के लिए फायदेमंद

पपीता में एंजाइम पपेन मौजूद होता है. जो कि पाचन तंत्र को मतबूत बनाने में मदद करता है. यह फल इम्युनिटी को बढ़ाता है और वजन घटाने में मदद करता है इसके साथ ही यह हार्ट हेल्थ के लिए गुणकारी होता है.  इसके अलावा, पपीते में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर में फ्री रेडिकल्स से लड़ते हैं और उम्र बढ़ने के लक्षणों को कम करते हैं.

त्वचा के लिए फायदे

वहीं त्वचा की बात करें तो पपीता में विटामिन सी और  एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को निखारने, दाग-धब्बों को कम करने और झुर्रियों को रोकने में मदद करते हैं. वहीं पपेन एंजाइम त्वचा की डेड स्किन को हटाकर इसे सॉफ्ट करता है और इसे चमकदार बनाता है.

पपीता का मास्क

आप फेस के लिए पपीता का मास्क बनाकर लगा सकते हैं. इसके लिए आप पके हुए पपीते का गूदा निकालकर उसे अच्छी तरह मैश कर लें. इसमें आप शहद और नींबू का रस मिलाएं. इसको चेहरे पर 15-20 मिनट तक लगा रहने दें.

पपीते और दही

पपीते के गूदे में दही मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें. इसके बाद आप इसे चेहरे और गर्दन पर लगाएं और फिर 20 मिनट बाद धो लें. इससे त्वचा को मॉइस्चराइज करने में मदद मिलती है.

पपीते और एलोवेरा जेल

पपीते के गूदे में एलोवेरा जेल मिलाकर एक पैक तैयार करें. इसे आप चेहरे पर 15 मिनट लगाएं और फिर बाद में धो लें. यह स्किन को हाइड्रेट करने में मदद करता है.

 

 

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विशेषज्ञों की चेतावनी: मानसून के समय बढ़ रहा पेट से जुड़ी बीमारियों का खतरा http://www.shauryatimes.com/news/194334 Mon, 23 Jun 2025 11:19:43 +0000 https://www.shauryatimes.com/?p=194334 कानपुर (ब्यूरो): उत्तर प्रदेश में मानसून ने दस्तक दे दी है। मानसून का मौसम अपने साथ ताजगी और राहत तो लाता है, लेकिन इस दौरान पेट से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। डॉ. साद अनवर, सीनियर कंसल्टेंट, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी  एंड जनरल सर्जरी, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, कानपुर के अनुसार इस मौसम में गैस्ट्रोइन्टेस्टाइनल इन्फेक्शन्स जैसे उल्टी, दस्त, पेट दर्द, बदहजमी, टाइफाइड, हेपेटाइटिस ए और फूड पॉइजनिंग खास तौर पर आम हो जाती हैं। मानसून में बढ़ी नमी और गंदगी के कारण बैक्टीरिया, वायरस व फंगल इन्फेक्शन का रिस्क बढ़ जाता है।

उन्होंने बताया कि इस मौसम में स्वच्छ और उबला या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं। खुले में मिलने वाले फल, सलाद या अन्य खाद्य पदार्थों से परहेज़ करें। सब्जियों और फलों को अच्छे से धोकर ही सेवन करें और पत्तेदार सब्जियों के इस्तेमाल से बचें। दूध व उससे बने उत्पादों को उबालकर एवं सही तरह से स्टोर करें। भोजन को हमेशा ढककर रखें और बचा हुआ खाना फ्रिज में रख लें। विशेष ध्यान दें कि बाहर और भीड़-भाड़ वाली जगहों पर खाना खाने से बचें। हाथों की स्वच्छता बनाए रखें।खाने से पहले और शौच के बाद अच्छी तरह हाथ धोएं। बच्चों तथा बुजुर्गों को हल्का और घर का बना हुआ भोजन ही दें। अगर इस मौसम में पेट खराब, उल्टी-दस्त, बुखार या कमजोरी जैसी परेशानी हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और स्वयं कुछ भी दवा न लें। पर्याप्त पानी, ओआरएस, नारियल पानी आदि का सेवन शरीर में पानी और मिनरल्स की पूर्ति के लिए जरूरी है। तला-भुना, जंक फूड व मसालेदार भोजन से परहेज़ करें।

मानसून के दौरान पेट संबंधी बीमारियों से बचाव के लिए साफ-सफाई व खानपान की सावधानी बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों की राय और जागरूकता को अपनाकर ही मानसून को स्वस्थ और सुरक्षित बनाया जा सकता है।

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