टेस्ट क्रिकेट में 100 का प्रतिशत हासिल करने के लिए केवल चार रनों की दरकार थी – Shaurya Times | शौर्य टाइम्स http://www.shauryatimes.com Latest Hindi News Portal Sun, 07 Oct 2018 06:09:18 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.8.3 टेस्ट क्रिकेट में 100 का प्रतिशत हासिल करने के लिए केवल चार रनों की दरकार थी http://www.shauryatimes.com/news/13164 Sun, 07 Oct 2018 06:09:18 +0000 http://www.shauryatimes.com/?p=13164 डॉन ब्रैडमैन केवल चार रनों से टेस्ट क्रिकेट में 100 का प्रतिशत हासिल नहीं कर पाए थे, उनके साथी नील हार्वे पिछले 70 वर्षों से इस अपराध बोध में जीते रहे हैं कि यह महान बल्लेबाज अगर यह विशिष्ट उपलब्धि हासिल करने से चूक गया, तो वह भी इसके लिए उतने ही जिम्मेदार थे, जितने कि इंग्लैंड के लेग स्पिनर एरिक होलीज.टेस्ट क्रिकेट में 100 का प्रतिशत हासिल करने के लिए केवल चार रनों की दरकार थी

ब्रैडमैन जब अपनी आखिरी पारी खेलने के लिए उतरे, तो उन्हें टेस्ट क्रिकेट में 100 का प्रतिशत हासिल करने के लिए केवल चार रनों की दरकार थी. होलीज ने ब्रैडमैन को उनकी अंतिम पारी में शून्य पर बोल्ड कर दिया था और उनका एवरेज 99.94 पर अटक गया.

हार्वे को भी तब ऐसा कोई आभास नहीं था, लेकिन अब लगता है कि उन्होंने ब्रैडमैन को आंकड़ों के लिहाज से महत्वपूर्ण आंकड़ा छूने से वंचित किया, यह ब्रैडमैन के आखिरी मैच से एक मैच पहले की घटना है.

लीड्स में खेले गए मैच में तब किशोर हार्वे ने पहली पारी में 112 रन बनाए. वह दूसरी पारी में तब क्रीज पर उतरे, जब ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए केवल चार रनों की दरकार थी और उन्होंने पहली ही गेंद पर चौका जड़कर टीम को जीत दिला दी. ब्रैडमैन उस समय दूसरे छोर पर 173 रन बनाकर खेल रहे थे और अगर यह विजयी चौका उनके बल्ले से निकला होता, तो इस समय उनका औसत 100 होता.

हार्वे 8 अक्टूबर को अपना 90वां जन्मदिन मनाएंगे, लेकिन उन्हें अब भी वे चार रन कचोटते हैं. सिडनी मार्निंग हेराल्ड के अनुसार हार्वे ने कहा, ‘लीड्स में बनाए गए उन चार रनों से मैं आज भी अपराधबोध से ग्रस्त हो जाता हूं. यह पूरी तरह से मेरी गलती थी, जो ब्रैडमैन टेस्ट क्रिकेट में 100 का औसत हासिल नहीं कर पाए. अगर वे चार रन मेरे बजाय उन्होंने बनाए होते, तो वह यह उपलब्धि हासिल कर लेते.’

नील हार्वे

उन्होंने 27 जुलाई 1948 के उस दिन को याद करते हुए कहा, ‘मैं क्रीज पर उतरा. लंकाशायर के तेज गेंदबाज केन क्रैन्सटन ने मेरे लेग स्टंप पर गेंद की और मैंने उसे मिडविकेट पर चार रन के लिए खेल दिया. दर्शक मैदान पर उमड़ पड़े और मुझे अब भी याद है कि ब्रैडमैन जोर से चिल्लाए, ‘चलो बेटे. यहां से निकल जाओ.’

हार्वे के इस चौके का क्या असर पड़ेगा इसका ऑस्ट्रेलिया की अजेय टीम के 1948 के दौरे के आखिरी टेस्ट तक किसी को आभास नहीं था. हार्वे ने कहा, ‘मैं दोष लेने के लिए तैयार हूं, लेकिन मैं नहीं जानता था कि वह अपने अंतिम टेस्ट मैच में शून्य पर आउट हो जाएंगे. किसी को भी पता नहीं था कि लीड्स में ब्रैडमैन को चार रन चाहिए. वह जब ओवल में अपना आखिरी टेस्ट मैच खेलने के लिए उतरे तब भी किसी को इस बारे में पता नहीं था.’

उन्होंने कहा, ‘तब आंकड़ों का जिक्र नहीं होता था. टेलीविजन नहीं था और किसी पत्रकार को भी इसका अहसास नहीं था. जब वह आउट हो गए इसके बारे में तब पता चला. इंग्लैंड पहली पारी में 52 रन पर आउट हो गया और उन्हें इसके लिए दूसरा मौका नहीं मिला.’

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