खेल – Shaurya Times | शौर्य टाइम्स https://www.shauryatimes.com Latest Hindi News Portal Mon, 03 Aug 2026 06:19:19 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.2 श्रीलंका टेस्ट सीरीज से बाहर हुए बुमराह, आकिब नबी को मिला मौका https://www.shauryatimes.com/news/243299 Mon, 03 Aug 2026 06:19:19 +0000 https://www.shauryatimes.com/?p=243299 नई दिल्ली : भारत के स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह चोट के कारण श्रीलंका के खिलाफ आगामी दो मैचों की टेस्ट सीरीज से बाहर हो गए हैं। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की पुरुष चयन समिति ने उनकी जगह जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी को पहली बार भारतीय सीनियर टेस्ट टीम में शामिल किया है।

 

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने सोमवार को एक प्रेस विज्ञप्ति के जरिए उक्त जानकारी दी।

 

बीसीसीआई के अनुसार, बुमराह इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के दौरान लगी बाएं घुटने की चोट से अभी पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं। इसी वजह से उन्हें श्रीलंका दौरे के लिए उपलब्ध नहीं माना गया और चयन समिति ने उनके स्थान पर आकिब नबी को मौका दिया।

 

आकिब नबी के लिए यह भारतीय सीनियर टीम में पहला चयन है। जम्मू-कश्मीर के इस युवा तेज गेंदबाज ने पिछले दो रणजी ट्रॉफी सत्रों में शानदार प्रदर्शन करते हुए 104 विकेट अपने नाम किए हैं। इनमें 2025-26 रणजी ट्रॉफी सीजन में 60 विकेट शामिल हैं। उनके बेहतरीन प्रदर्शन की बदौलत जम्मू-कश्मीर ने अपने इतिहास में पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब जीता।

 

हाल ही में आकिब नबी भारत-ए टीम के साथ श्रीलंका दौरे पर भी गए थे, जहां उन्होंने दो प्रथम श्रेणी मुकाबलों में छह विकेट लेकर चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।

 

श्रीलंका के खिलाफ भारत की संशोधित टेस्ट टीम:

 

शुभमन गिल (कप्तान), केएल राहुल (उपकप्तान), यशस्वी जायसवाल, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), साई सुदर्शन , ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर), रवींद्र जडेजा, कुलदीप यादव, मानव सुथार, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा, गुरनूर बरार, देवदत्त पडिक्कल, सारांश जैन और आकिब नबी।

 

साई सुदर्शन का चयन फिटनेस मंजूरी मिलने के अधीन रहेगा।

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राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय दल के प्रदर्शन पर मांडविया ने जताया गर्व, बोले- भारत ने बढ़ती खेल ताकत का किया प्रदर्शन https://www.shauryatimes.com/news/243295 Mon, 03 Aug 2026 05:43:53 +0000 https://www.shauryatimes.com/?p=243295 नई दिल्ली : राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारतीय दल के शानदार प्रदर्शन पर केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने खिलाड़ियों, कोचों और सहयोगी स्टाफ को बधाई देते हुए कहा कि भारत ने सीमित खेलों वाले इस संस्करण में भी अपनी बढ़ती खेल ताकत का शानदार परिचय दिया है। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्ष 2030 में अहमदाबाद में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों का शताब्दी संस्करण भारत इतिहास के सबसे यादगार आयोजनों में से एक बनाएगा।

 

मनसुख मांडविया ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “भारत ने राष्ट्रमंडल खेल 2026 का समापन शानदार चौथे स्थान के साथ किया। ग्लासगो 2026 का यह संस्करण सीमित खेलों वाला था और इसमें कई ऐसे खेल शामिल नहीं थे जिनमें भारत पारंपरिक रूप से मजबूत रहा है। इसके बावजूद भारतीय दल ने बर्मिंघम 2022 में समान खेलों में जीते गए 30 पदकों की तुलना में इस बार 39 पदक जीतकर उल्लेखनीय सुधार किया है।”

 

उन्होंने कहा, “माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय खेलों की गहराई और मजबूती लगातार बढ़ रही है। तिरंगे के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देने वाले हर खिलाड़ी, कोच और सहयोगी स्टाफ पर हमें गर्व है।”

 

मांडविया ने आगे कहा, “अब जब भारत 2030 में राष्ट्रमंडल खेलों के शताब्दी संस्करण की मेजबानी की तैयारी कर रहा है, हमारा संकल्प है कि हम खेलों के इतिहास के सबसे शानदार आयोजनों में से एक का आयोजन करें।”

 

ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने कुल 39 पदक जीतकर पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। भारतीय खिलाड़ियों ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक अपने नाम किए। सीमित खेलों के बावजूद भारत ने मुक्केबाजी, एथलेटिक्स, जूडो, पैरा खेलों और भारोत्तोलन जैसे खेलों में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए अपनी मजबूत दावेदारी पेश की।

 

पदक तालिका में ऑस्ट्रेलिया 70 स्वर्ण सहित कुल 171 पदकों के साथ शीर्ष पर रहा। इंग्लैंड 110 पदकों के साथ दूसरे और कनाडा 62 पदकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। मेजबान स्कॉटलैंड ने भी 39 पदक जीते, लेकिन भारत से कम रजत पदक होने के कारण उसे पांचवें स्थान से संतोष करना पड़ा।

 

11 दिनों तक चले इन खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के दमदार प्रदर्शन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारत राष्ट्रमंडल देशों की प्रमुख खेल शक्तियों में शामिल है और अब उसकी नजरें अहमदाबाद 2030 में सफल मेजबानी के साथ-साथ और भी बेहतर प्रदर्शन पर टिकी हैं।

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राष्ट्रमंडल खेल 2026 का भव्य समापन, 2030 की मेजबानी भारत को सौंपी गई https://www.shauryatimes.com/news/243278 Mon, 03 Aug 2026 04:56:34 +0000 https://www.shauryatimes.com/?p=243278 ग्लासगो : स्कॉटलैंड के ग्लासगो में 11 दिनों तक चले राष्ट्रमंडल खेल 2026 का भारतीय समयानुसार सोमवार को तड़के रंगारंग समारोह के साथ समापन हो गया। इसी के साथ भारत ने आधिकारिक रूप से 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी की जिम्मेदारी संभाल ली।

 

समापन समारोह के दौरान राष्ट्रमंडल ध्वज भारत को सौंपा गया और इसके साथ ही अहमदाबाद 2030 की उलटी गिनती भी शुरू हो गई।

 

ग्लासगो के हाइड्रो एरिना में आयोजित समारोह में स्कॉटलैंड से भारत को मेजबानी सौंपने की औपचारिक प्रक्रिया पूरी की गई। इस दौरान भारत के दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा और भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) की अध्यक्ष पीटी ऊषा की मौजूदगी में राष्ट्रमंडल ध्वज भारत को सौंपा गया।

 

ध्वज हस्तांतरण के बाद भारत ने अहमदाबाद 2030 की झलक पूरी दुनिया के सामने पेश की। प्रसिद्ध गायक एवं संगीतकार शंकर महादेवन और पूर्व मिस वर्ल्ड मानुषी छिल्लर के नेतृत्व में भारतीय संस्कृति पर आधारित आकर्षक प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम की शुरुआत ‘वंदे मातरम्’ से हुई, जिसके बाद रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और संगीत के माध्यम से भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत को ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ (संपूर्ण विश्व एक परिवार) की थीम के साथ प्रदर्शित किया गया।

 

इसके बाद एक विशेष ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति के जरिए भारत की खेल यात्रा और अहमदाबाद में आयोजित होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों के शताब्दी संस्करण की तैयारियों की झलक दिखाई गई। इस प्रस्तुति में आधुनिक खेल अवसंरचना, भारत की बढ़ती खेल शक्ति और भविष्य की योजनाओं को प्रमुखता से दिखाया गया।

 

इससे पहले खिलाड़ियों की परेड के दौरान ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय मुक्केबाज जैसमीन लांबोरिया ने भारतीय तिरंगा लेकर दल का नेतृत्व किया। इस परेड में राष्ट्रमंडल के सभी 74 देशों और क्षेत्रों के खिलाड़ी शामिल हुए।

 

समापन समारोह में ऑस्ट्रेलिया की प्रसिद्ध गायिका डेल्टा गुड्रेम ने ‘बॉर्न टू ट्राय’ गीत प्रस्तुत किया, जबकि खेलों के सफल आयोजन में योगदान देने वाले हजारों स्वयंसेवकों को भी विशेष सम्मान दिया गया। स्कॉटलैंड के कलाकार सैंडी थॉम, एलीफेंट सेशंस और प्राइमल स्क्रीम की प्रस्तुतियों ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। साथ ही 11 दिनों के खेलों के यादगार पलों का वीडियो प्रदर्शन भी किया गया।

 

समारोह को संबोधित करते हुए ग्लासगो 2026 आयोजन समिति के अध्यक्ष जॉर्ज ब्लैक ने भारत को शुभकामनाएं देते हुए कहा, “ग्लासगो से अहमदाबाद, दो महान नदी किनारे बसे शहरों के बीच यह जिम्मेदारी सौंपते हुए हम आपको 2030 के शताब्दी राष्ट्रमंडल खेलों के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं देते हैं।”

 

इसके बाद प्रिंस एडवर्ड, ड्यूक ऑफ एडिनबर्ग ने आधिकारिक रूप से राष्ट्रमंडल खेल 2026 के समापन की घोषणा की और सभी खिलाड़ियों को चार वर्ष बाद अहमदाबाद में फिर मिलने का निमंत्रण दिया।

 

ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल भारत के लिए भी बेहद सफल रहे। भारतीय दल ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य सहित कुल 39 पदक जीतकर पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। मुक्केबाजी, एथलेटिक्स, भारोत्तोलन, जूडो, निशानेबाजी और पैरा स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का गौरव बढ़ाया।

 

अब राष्ट्रमंडल ध्वज भारत के हाथों में है और दुनिया की नजरें अहमदाबाद 2030 पर टिक गई हैं, जहां राष्ट्रमंडल खेलों का शताब्दी संस्करण आयोजित होगा। भारत के लिए यह केवल मेजबानी का अवसर नहीं, बल्कि वैश्विक खेल महाशक्ति के रूप में अपनी पहचान और क्षमता प्रदर्शित करने का भी महत्वपूर्ण मंच होगा।

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राष्ट्रमंडल खेल 2026: भारत के 13 में से आठ स्वर्ण महिलाओं के नाम, ‘नारी शक्ति’ बनी भारतीय अभियान की ताकत https://www.shauryatimes.com/news/243275 Mon, 03 Aug 2026 04:53:50 +0000 https://www.shauryatimes.com/?p=243275 नई दिल्ली : ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत के शानदार प्रदर्शन के पीछे सबसे बड़ी ताकत देश की महिला खिलाड़ियों का दमदार प्रदर्शन रहा। भारतीय दल के 13 स्वर्ण पदकों में से आठ स्वर्ण महिला खिलाड़ियों ने जीतकर यह साबित कर दिया कि भारतीय खेलों में अब ‘नारी शक्ति’ केवल भागीदारी नहीं, बल्कि सफलता की सबसे बड़ी पहचान बन चुकी है।

 

भारोत्तोलन, मुक्केबाजी, जूडो और पैरा एथलेटिक्स जैसे विभिन्न खेलों में भारतीय महिला खिलाड़ियों ने स्वर्ण पदक जीतकर पूरे अभियान की अगुवाई की। यह भारतीय खेलों में महिलाओं की बढ़ती ताकत, आत्मविश्वास और निरंतर सफलता का प्रमाण है।

 

भारोत्तोलन में ओलंपिक चैंपियन मीराबाई चानू ने एक बार फिर स्वर्ण पदक जीतकर अपनी महानता साबित की। पैरा एथलेटिक्स में शर्मिला धनखड़ ने महिलाओं की गोला फेंक स्पर्धा में स्वर्ण पदक अपने नाम किया, जबकि अस्मिता डे ने इतिहास रचते हुए राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो का स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया।

 

मुक्केबाजी में भारतीय महिला खिलाड़ियों ने सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन किया। साक्षी चौधरी, प्रीति पवार, जैसमीन लांबोरिया, प्रिया घंघास और अरुंधति चौधरी ने अपने-अपने वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय महिला मुक्केबाजी की बढ़ती ताकत का परिचय दिया। पिछले एक दशक में भारतीय महिला मुक्केबाजी ने जिस तरह प्रगति की है, उसका शानदार उदाहरण ग्लासगो में देखने को मिला।

 

इन आठ स्वर्ण पदकों ने न केवल भारत के अभियान को नई ऊंचाई दी, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि भारतीय महिला खिलाड़ी अब केवल उभरती प्रतिभाएं नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार स्वर्ण जीतने वाली चैंपियन बन चुकी हैं।

 

भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी ऊषा ने महिला खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर गर्व जताते हुए एक अधिकारिक बयान में कहा, “भारत के 13 स्वर्ण पदकों में से आठ महिलाओं के नाम होना बेहद गर्व की बात है। इन उपलब्धियों के पीछे खिलाड़ियों, उनके परिवारों, कोचों और सहयोगी स्टाफ की वर्षों की मेहनत और समर्पण है। हर पदक संघर्ष और त्याग की कहानी कहता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये चैंपियन देश की लाखों बेटियों को यह विश्वास दिला रही हैं कि वे भी भारत की जर्सी पहनकर विश्व मंच पर सफलता हासिल कर सकती हैं। यही ‘नारी शक्ति’ की सच्ची भावना है।”

 

भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, ग्लासगो में मिली सफलता भारत में महिलाओं के सशक्तिकरण की व्यापक तस्वीर भी पेश करती है। शिक्षा, उद्यमिता, शासन और खेल सहित हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक असर अब खेल मैदानों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। लड़कियों को खेलों से जोड़ने वाली योजनाएं, बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं, खिलाड़ियों के लिए मजबूत सहायता तंत्र और महिला खिलाड़ियों को बढ़ता सम्मान इस बदलाव की मजबूत नींव बने हैं।

 

विज्ञप्ति में यह भी कहा गया कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रति देश की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लगातार महिला खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते रहे हैं और उन्हें विश्व स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित करते रहे हैं। ग्लासगो में भारतीय महिला खिलाड़ियों का प्रदर्शन इसी व्यापक सोच और अवसरों के विस्तार का परिणाम है।

 

आईओए के अनुसार, इन राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय महिला खिलाड़ियों ने केवल पदक ही नहीं जीते, बल्कि टीम भावना का भी शानदार उदाहरण पेश किया। अनुभवी खिलाड़ियों ने युवा खिलाड़ियों का मार्गदर्शन किया, एक-दूसरे की सफलता का जश्न मनाया और पूरी प्रतियोगिता के दौरान टीम इंडिया की एकजुटता को नई पहचान दी।

 

विज्ञप्ति में कहा गया कि एक समय था जब अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय महिलाओं की सफलता को अपवाद माना जाता था, लेकिन अब उत्कृष्ट प्रदर्शन उनकी पहचान बन चुका है। आज भारत के पास ऐसी महिला खिलाड़ियों की पीढ़ी है जो दुनिया की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को चुनौती देने और लगातार पोडियम पर जगह बनाने की क्षमता रखती है।

 

ग्लासगो में मीराबाई चानू, शर्मिला धनखड़, अस्मिता डे, साक्षी चौधरी, प्रीति पवार, जैसमीन लांबोरिया, प्रिया घंघास और अरुंधति चौधरी ने जो प्रेरणा दी है, वह केवल पदकों तक सीमित नहीं रहेगी। उनकी उपलब्धियां देशभर की लाखों बेटियों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का हौसला देती रहेंगी।

 

ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026 ने यह स्पष्ट कर दिया कि इस बार भारत के अभियान को केवल ‘नारी शक्ति’ ने मजबूती ही नहीं दी, बल्कि उसी ने पूरे अभियान की पहचान भी तय की।

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ग्लासगो में फीके पड़े पाकिस्तानी जैवलिन थ्रोअर अरशद नदीम, मेंटर्स ने लापरवाही और खराब तैयारी को ठहराया दोषी https://www.shauryatimes.com/news/243264 Sun, 02 Aug 2026 16:14:48 +0000 https://www.shauryatimes.com/?p=243264 इस्लामाबाद : पाकिस्तान के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता भाला फेंक खिलाड़ी अरशद नदीम के कॉमनवेल्थ खेल 2026 में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद उनके दो प्रमुख पूर्व मार्गदर्शकों ने प्रशिक्षण की कमी और लापरवाही को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। दोनों ने नदीम से दोबारा शीर्ष स्तर पर लौटने के लिए कड़ी मेहनत और नियमित प्रशिक्षण अपनाने की अपील की है।

 

पेरिस ओलंपिक 2024 में 92.97 मीटर का ऐतिहासिक थ्रो कर स्वर्ण पदक जीतने वाले अरशद ग्लासगो में अपनी लय नहीं पकड़ सके। उन्होंने 12 खिलाड़ियों की प्रतियोगिता में 77.41 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ नौवां स्थान हासिल किया। इससे पहले क्वालिफिकेशन में भी उनका प्रदर्शन साधारण रहा और वे 78.63 मीटर के थ्रो के साथ मुश्किल से फाइनल में पहुंचे थे।

 

इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरागे ने 89.75 मीटर के शानदार थ्रो के साथ जीता, जबकि भारत के नीरज चोपड़ा ने रजत और यश वीर सिंह ने कांस्य पदक अपने नाम किया।

 

अरशद के शुरुआती करियर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पाकिस्तान एथलेटिक्स महासंघ के पूर्व अध्यक्ष अकरम साही ने कहा कि ओलंपिक स्वर्ण जीतने के बाद कुछ लोगों ने नदीम को उनसे दूर कर दिया। उनके अनुसार पिछले कुछ महीनों से पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं होने के संकेत स्पष्ट दिखाई दे रहे थे और ग्लासगो का परिणाम उसी का नतीजा है।

 

वहीं, एक अन्य पूर्व मार्गदर्शक ने कहा कि नदीम प्रशिक्षण को लेकर पहले जैसी गंभीरता नहीं दिखा सके। उनका कहना था कि दक्षिण अफ्रीकी कोच टर्सियस लीबेनबर्ग के मार्गदर्शन और दक्षिण अफ्रीका में विशेष प्रशिक्षण शिविरों ने उन्हें ओलंपिक चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई थी, लेकिन हाल के समय में वैसी तैयारी नहीं हो सकी।

 

उन्होंने यह भी दावा किया कि ओलंपिक के बाद मिली आर्थिक सफलता के बाद नदीम व्यवसायिक गतिविधियों में अधिक व्यस्त हो गए, जिससे उनके अभ्यास और प्रदर्शन पर असर पड़ा। साथ ही उन्होंने मौजूदा कोचिंग व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।

 

अकरम साही ने इस प्रतियोगिता में श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरागे और भारत के यश वीर सिंह के उभरने की सराहना करते हुए कहा कि दक्षिण एशिया में भाला फेंक स्पर्धा का स्तर लगातार बेहतर हो रहा है।

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होटल के नैपकिन पर भारत के मानचित्र से गायब था पूर्वोत्तर, लवलीना बरगोहाईं ने जताई आपत्ति https://www.shauryatimes.com/news/243235 Sun, 02 Aug 2026 12:47:55 +0000 https://www.shauryatimes.com/?p=243235 गुवाहाटी : राष्ट्रमंडल खेल 2026 में रजत पदक जीतने वाली असम की स्टार मुक्केबाज लवलीना बरगोहाईं ने ग्लासगो के एक होटल में भारत के मानचित्र को गलत तरीके से प्रदर्शित किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई।

 

जानकारी के अनुसार, राष्ट्रमंडल खेलों में भाग ले रहे भारतीय दल के सम्मान में मिस्टर सिंह्स इंडिया – द होम ऑफ करी नामक रेस्तरां में विजय उत्सव के अवसर पर रात्रिभोज का आयोजन किया गया था। इस दौरान होटल में इस्तेमाल किए जा रहे नैपकिन पर छपे भारत के मानचित्र में पूर्वोत्तर क्षेत्र को नहीं दर्शाया गया था।

 

लवलीना ने तत्काल इस गंभीर त्रुटि की ओर होटल प्रबंधन का ध्यान आकर्षित किया और स्पष्ट किया कि भारत के मानचित्र का इस प्रकार गलत चित्रण स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने होटल प्रबंधन से भविष्य में ऐसी गलती दोबारा नहीं करने का भी आग्रह किया।

 

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज हो गई है और कई लोगों ने लवलीना की सतर्कता तथा देश की भौगोलिक अखंडता के प्रति उनकी सजगता की सराहना की।

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ग्लासगो से लौटे भारतीय वेटलिफ्टर्स का भव्य स्वागत, मीराबाई चानू बोलीं- देश के लिए पदक जीतना गर्व की बात https://www.shauryatimes.com/news/243223 Sun, 02 Aug 2026 11:51:24 +0000 https://www.shauryatimes.com/?p=243223 नई दिल्ली : ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल-2026 में शानदार प्रदर्शन कर देश का गौरव बढ़ाने वाले भारतीय भारोत्तोलक (वेटलिफ्टर्स) खिलाड़ी रविवार को स्वदेश लौट आए। स्वर्ण पदक विजेता मीराबाई चानू समेत अन्य खिलाड़ियों का दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भव्य स्वागत किया गया।

 

भारतीय खिलाड़ियों के स्वागत के लिए एयरपोर्ट पर बड़ी संख्या में प्रशंसक पहले से मौजूद थे। जैसे ही खिलाड़ी बाहर आए, फूल-मालाओं, ढोल-नगाड़ों के साथ उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया।

 

लगातार तीसरी बार राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली मीराबाई चानू ने मीडिया से बातचीत में कहा, मैं बहुत ज्यादा खुश हूं कि मैंने भारत के लिए पदक जीता है और मुझे बहुत गर्व महसूस हो रहा है। मैं मणिपुर से हूं, इसलिए मुझे बहुत खुशी है कि मैंने अपने देश के लिए कुछ करके दिखाया है।

 

मीराबाई चानू ने महिलाओं के 48 किलोग्राम भार वर्ग में कुल 190 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। इसके साथ ही उन्होंने लगातार तीसरे राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण जीतने की उपलब्धि भी हासिल की।

 

महिलाओं के 53 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक जीतने वाली ज्ञानेश्वरी यादव ने कहा कि देश के लिए पदक जीतना उनके लिए बेहद गर्व और खुशी की बात है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि उन्हें आगे और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करेगी।

 

महिलाओं के 69 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतने वाली हरजिंदर कौर ने भी अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि देश के लिए पदक जीतकर उन्हें बहुत गर्व महसूस हो रहा है।

 

पुरुषों के 110 किलोग्राम से अधिक भार वर्ग में रजत पदक जीतने वाले लवप्रीत सिंह ने कहा कि वह अपने प्रदर्शन से खुश हैं, लेकिन अगली प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने के लक्ष्य के साथ और कड़ी मेहनत करेंगे।

 

पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक विजेता ऋषिकांत सिंह ने भी अपनी खुशी व्यक्त की और कहा कि बहुत अच्छा लग रहा है कि देश के लिए पदक लेकर आए हैं।

 

राष्ट्रमंडल खेल-2026 में भारोत्तोलन में भारत ने एक स्वर्ण सहित आठ पदक जीते हैं। मीराबाई चानू ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीता है। ज्ञानेश्वरी यादव और हरजिंदर कौर ने क्रमशः महिलाओं के 53 किलोग्राम और 69 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक हासिल किए, जबकि ऋषिकांता सिंह, राजा मुथुपंडी, वल्लूरी अजय बाबू और लवप्रीत सिंह ने भी क्रमशः पुरुषों के 60 किलोग्राम, 65 किलोग्राम, 79 किलोग्राम और 110 किलोग्राम से अधिक भार वर्ग में रजत पदक जीते। बिंदियारानी देवी ने महिलाओं के 58 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक जीता।

 

भारत के खाते में अब तक 39 पदक आ चुके हैं, जिनमें 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक शामिल हैं।

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डीपीएल सीजन-3: पहली जीत के लक्ष्य के साथ सोमवार को मैदान में उतरेगी पुरानी दिल्ली-6 https://www.shauryatimes.com/news/243201 Sun, 02 Aug 2026 09:40:09 +0000 https://www.shauryatimes.com/?p=243201 नई दिल्ली : दिल्ली प्रीमियर लीग (डीपीएल) सीजन-3 में अपने पहले मैच में हार झेलने के बाद पुरानी दिल्ली-6 सोमवार को अरुण जेटली स्टेडियम में वेस्ट दिल्ली लायंस का सामना करते हुए वापसी करने की कोशिश करेगी। मैच से पहले टीम के कप्तान अनुज रावत ने कहा कि टीम जीत की राह पर लौटने के लिए तैयार है।

 

टूर्नामेंट के पहले हाई-स्कोरिंग मैच में सेंट्रल दिल्ली किंग्स से चार विकेट से हारने के बावजूद पुरानी दिल्ली 6 को कई सकारात्मक बातें सीखने को मिलीं, जिनमें सबसे खास कप्तान अनुज रावत की शानदार नाबाद शतकीय पारी थी। पहले मैच में जब टीम का स्कोर 30/3 था, तब कप्तान अनुज ने दबाव में पारी संभाली और देव लाकरा के साथ मिलकर 132 रनों की साझेदारी की, जिससे पुरानी दिल्ली 6 ने 202/4 का मजबूत स्कोर खड़ा किया। हालांकि नतीजा उनके पक्ष में नहीं रहा और सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने छह विकेट पर 204 रन बनाते हुए मैच जीत लिया।

 

अब पुरानी दिल्ली 6 अपने अगले मैच में वेस्ट दिल्ली लायंस के खिलाफ सीजन की अपनी पहली जीत दर्ज करने की कोशिश करेगी और टीम पहले मैच से मिली सकारात्मक चीजों को आगे बढ़ाना चाहेगी।

 

सोमवार के मैच से पहले टीम के कप्तान अनुज रावत ने कहा कि टीम ने जल्दी ही अपना ध्यान अगली चुनौती पर लगा लिया है और जीत की राह पर लौटने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, “व्यक्तिगत रूप से मैं अपनी बल्लेबाजी से खुश हूं और शतक लगाना हमेशा खास होता है। बेशक, अगर टीम मैच जीत जाती तो और भी अच्छा लगता, क्योंकि आखिर में टीम की सफलता ही सबसे ज्यादा मायने रखती है। अच्छी बात यह है कि मैं अच्छी लय में हूं और इस फॉर्म को अगले मैच में भी बरकरार रखना चाहता हूं।”

 

कप्तान ने आगे कहा, “ड्रेसिंग रूम का माहौल सकारात्मक है और सभी का मानना है कि हमने पहले मैच में बहुत अच्छा क्रिकेट खेला। उस मैच से कई सकारात्मक बातें सीखने को मिलीं और हमने उन क्षेत्रों पर काम किया है जिनमें सुधार की गुंजाइश थी। हमारा ध्यान वेस्ट दिल्ली लायंस के खिलाफ होने वाले मैच पर पूरी तरह केंद्रित है और एक मजबूत ऑलराउंड प्रदर्शन करने के लिए तैयार हैं। हमारा लक्ष्य सीधा निडर होकर क्रिकेट खेलना और इस सीजन में अपनी पहली जीत हासिल करना है।”

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ताइपे ओपन चैंपियन तन्वी शर्मा को पीवी सिंधु ने दी बधाई, बोलीं- ‘मुझे तुम पर गर्व है’ https://www.shauryatimes.com/news/243189 Sun, 02 Aug 2026 09:11:38 +0000 https://www.shauryatimes.com/?p=243189 नई दिल्ली : भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी और ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु ने ताइपे ओपन सुपर-300 बैडमिंटन टूर्नामेंट का महिला एकल खिताब जीतने वाली 17 वर्षीय तन्वी शर्मा को बधाई दी। सिंधु ने कहा कि यह तो बस शुरुआत है और मेहनत करती रहो। मुझे तुम पर गर्व है।

 

तन्वी शर्मा ने रविवार को ताइपे ओपन सुपर-300 बैडमिंटन टूर्नामेंट के महिला एकल फाइनल में वियतनाम की थुई लिन्ह गुयेन को 21-16, 21-16 से हराकर अपने करियर का पहला बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर खिताब जीता। यह उनके करियर की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

 

युवा खिलाड़ी को बधाई देते हुए पीवी सिंधु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “मुझे इस लड़की पर बेहद गर्व है। मैं कई वर्षों से कहती आ रही हूं कि तन्वी में एक बेहद खास खिलाड़ी बनने के सभी गुण हैं। प्रतिभा, शानदार शॉट्स खेलने की क्षमता और दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों का सामना करने का साहस, उसमें सब कुछ है।”

 

सिंधु ने आगे कहा कि उसे केवल थोड़ी और स्थिरता और अनुभव की जरूरत थी और यह देखकर बहुत खुशी होती है कि अब वह सब उसके खेल में दिखाई दे रहा है। तन्वी, यह तो सिर्फ शुरुआत है। मेहनत करती रहो, खुद पर विश्वास बनाए रखो और हमेशा बेहतर बनने की भूख बनाए रखो। तुम जैसे खिलाड़ियों के साथ भारतीय बैडमिंटन का भविष्य बेहद उज्ज्वल है। मुझे तुम पर बहुत गर्व है।

 

भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) ने युवा तन्वी को बधाई और कहा कि भारतीय बैडमिंटन का भविष्य उज्ज्वल है। प्राधिकरण ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर लिखा, 17 साल की उम्र। निडर। जिसे कोई रोक न सके। इतिहास अब तन्वी शर्मा के नाम है। ताइपे ओपन 2026 में शानदार जीत के साथ, तन्वी इस टूर्नामेंट के इतिहास की सबसे कम उम्र की चैंपियन बन गई हैं और बीडब्ल्यूएफ सुपर 300+ टाइटल जीतने वाली चौथी भारतीय महिला एकल खिलाड़ी हैं।

 

भारतीय खेल प्राधिकरण ने आगे कहा कि एक रिकॉर्ड-तोड़ जीत, एक चैंपियन वाली सोच और बहुत खास शुरुआत। भारतीय बैडमिंटन का भविष्य पहले से कहीं ज़्यादा उज्ज्वल है।————-

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दबाव नहीं, जीत की ताकत बना आत्मविश्वास; भारतीय खिलाड़ियों ने साझा किया सफलता का मंत्र https://www.shauryatimes.com/news/243044 Wed, 29 Jul 2026 14:04:43 +0000 https://www.shauryatimes.com/?p=243044 नई दिल्ली : राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारतीय खिलाड़ी सिर्फ अपनी शारीरिक क्षमता ही नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती का भी शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) की ओर से जारी विशेष रिपोर्ट में खिलाड़ियों ने बताया कि बड़े मुकाबलों का दबाव उन्हें कमजोर नहीं, बल्कि और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करता है।

 

ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता मीराबाई चानू ने भारतीय ओलम्पिक संघ (आईओए) के हवाले से कहा कि उन्होंने कभी दबाव से डरना नहीं सीखा। जब भी वह भारत के लिए खेलती हैं तो दबाव उनके प्रदर्शन को बेहतर बनाने का माध्यम बन जाता है। मानसिक मजबूती और दबाव का गहरा संबंध है, इसलिए वह दबाव को सकारात्मक रूप में स्वीकार करती हैं।

 

ऊंची कूद में रजत पदक जीतने वाले सर्वेश कुशारे ने बताया कि कड़ी प्रतिस्पर्धा और ठंडे मौसम के बावजूद उन्होंने दबाव का आनंद लिया। साथी खिलाड़ी तेजस्विन शंकर के उत्साहवर्धन और अपने अनुभव की बदौलत वह इस महीने लगातार तीन बड़ी प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन कर सके।

 

ओलंपिक पदक विजेता मुक्केबाज लवलीना बोरगोहैन ने कहा कि शीर्ष स्तर पर सफलता के लिए दबाव को स्वीकार करना जरूरी है। वहीं ओलंपिक और विश्व चैंपियन नीरज चोपड़ा ने कहा कि भारत का प्रतिनिधित्व करते समय अपेक्षाओं का दबाव हमेशा रहता है, लेकिन वह इसे बोझ नहीं बल्कि आगे बढ़ने की प्रेरणा मानते हैं।

 

भारोत्तोलन में रजत पदक जीतने वाली ज्ञानेश्वरी यादव ने बताया कि प्रतियोगिता से पहले वह भगवद्गीता का पाठ करती हैं, जिससे उन्हें मानसिक शांति और आत्मविश्वास मिलता है।

 

भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष डॉ. पीटी उषा ने कहा कि दबाव हर खिलाड़ी के जीवन का हिस्सा है। उन्होंने खिलाड़ियों को अपनी तैयारी पर भरोसा रखने और अपेक्षाओं से विचलित हुए बिना प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी। सच्चे चैंपियन वही होते हैं जो दबाव से भागते नहीं, बल्कि उसी के बीच सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हैं।

 

आईओए के अनुसार ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में जैसे-जैसे प्रतियोगिताएं आगे बढ़ेंगी, दबाव भी बढ़ेगा। ऐसे में मानसिक मजबूती ही खिलाड़ियों को पदक तक पहुंचाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगी।

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