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	<title>राजनीति &#8211; Shaurya Times | शौर्य टाइम्स</title>
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		<title>यूपी मिशन 2027 : लखनऊ में महाबैठक, एक तरफ NDA की बिसात तो दूसरी तरफ चिराग पासवान की ‘एंट्री’</title>
		<link>https://www.shauryatimes.com/news/240637</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Poonam]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 05 Jul 2026 12:13:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। राजधानी लखनऊ में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के दो दिवसीय संगठनात्मक दौरे के दूसरे दिन आज एनडीए की एकजुटता और चुनावी रणनीति की मजबूत नींव रखी गई। &#160; वहीं, बिहार के बाद अब उत्तर प्रदेश में अपनी जमीन तलाश &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। राजधानी लखनऊ में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के दो दिवसीय संगठनात्मक दौरे के दूसरे दिन आज एनडीए की एकजुटता और चुनावी रणनीति की मजबूत नींव रखी गई।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>वहीं, बिहार के बाद अब उत्तर प्रदेश में अपनी जमीन तलाश रहे लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के मुखिया चिराग पासवान ने भी लखनऊ में बड़ा शक्ति प्रदर्शन कर यूपी चुनाव के लिए अपनी दावेदारी ठोक दी है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>पूर्व अध्यक्षों से फीडबैक और सहयोगियों से मुलाकात</p>
<p>भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के लखनऊ प्रवास का आज दूसरा दिन था। सुबह की शुरुआत संगठनात्मक जमीनी फीडबैक के साथ हुई, जिसके बाद एनडीए के घटक दलों के साथ हाई-प्रोफाइल बैठक संपन्न हुई।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>पूर्व प्रदेश अध्यक्षों के साथ ‘चाय पर चर्चा’</p>
<p>सुबह-सुबह राष्ट्रीय अध्यक्ष ने यूपी भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्षों के साथ एक अहम बैठक की। इसमें डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी और स्वतंत्र देव सिंह जैसी वरिष्ठ हस्तियों ने हिस्सा लिया। इस बैठक से साफ है कि भाजपा अपने पुराने और अनुभवी नेतृत्व को दरकिनार नहीं कर रही है। पुराने कप्तानों के अनुभवों और फीडबैक का इस्तेमाल आगामी चुनाव के टिकट बंटवारे और रणनीति में किया जाएगा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इसके ठीक बाद लखनऊ के एक प्रतिष्ठित होटल में एनडीए के सहयोगी दलों के बड़े नेताओं के साथ एक अहम बैठक संपन्न हुई। बैठक में मुख्य रूप से रालोद के त्रिलोक त्यागी, निषाद पार्टी के डॉ. संजय निषाद, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के ओम प्रकाश राजभर और अपना दल (एस) के आशीष पटेल आदि शामिल थे।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>बैठक का संदेश: ‘जिताऊ’ ही लड़ेगा</p>
<p>राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सभी सहयोगी दलों के नेताओं की बातों को बेहद गंभीरता और बारीकी से सुना। बैठक से सबसे बड़ा फैसला और संकेत यह निकलकर आया है कि सीटों के बंटवारे में किसी भी तरह की जिद या ‘कोटा सिस्टम’ की जगह, केवल और केवल ‘जिताऊ उम्मीदवार’ को ही पैमाना बनाया जाएगा। सभी दलों से साफ कह दिया गया है कि लक्ष्य सिर्फ यूपी में प्रचंड बहुमत के साथ एनडीए की सरकार बनाना है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>पासवान जयंती पर चिराग का शक्ति प्रदर्शन</p>
<p>एक तरफ जहां भाजपा अपने एनडीए कुनबे को मजबूत करने में जुटी थी, वहीं लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में एनडीए के एक और अहम सहयोगी चिराग पासवान ने अपना दम दिखाया।</p>
<p>माहौल बनाने की कोशिश: दिवंगत नेता रामविलास पासवान की जयंती के मौके पर लखनऊ में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।</p>
<p>यूपी में बिछाई सियासी बिसात: राजनीतिक विश्लेषकों और मीडिया सूत्रों के मुताबिक, चिराग पासवान की नजर उत्तर प्रदेश के बड़े पासवान (दलित) वोट बैंक पर है। लोकसभा चुनाव में 100% स्ट्राइक रेट (बिहार में 5 में से 5 सीटें) देने के बाद चिराग का हौसला बुलंद है।</p>
<p>सीटों पर दावा ठोकने की तैयारी: लोजपा (रामविलास) के यूपी प्रभारी और सांसद अरुण भारती पहले ही साफ कर चुके हैं कि पार्टी यूपी चुनाव में हाथ आजमाने को पूरी तरह तैयार है। चिराग पासवान अब यूपी में भी एनडीए गठबंधन के तहत सम्मानजनक सीटें चाहते हैं; आज का कार्यक्रम इसी दबाव की राजनीति और माहौल बनाने की शुरुआत माना जा रहा है।</p>
<p>इस सियासी हलचल के क्या हैं मायने?</p>
<p>राजनीतिक गलियारों और सूत्रों के हवाले से इस पूरे घटनाक्रम के कई बड़े मायने निकाले जा रहे हैं:</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>3. विपक्ष के नैरेटिव की काट: भाजपा और सहयोगी दलों की बैठकों में इस बात पर भी जोर रहा कि विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे ‘संविधान और आरक्षण’ के नैरेटिव को जमीन पर कैसे काटा जाए। चिराग पासवान की एंट्री को इसी दलित कार्ड की काट के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>1. कट सकते हैं कई टिकट: ‘जिताऊ उम्मीदवार’ वाले फॉर्मूले के तहत भाजपा और सहयोगी दल इस बार कई मौजूदा विधायकों के टिकट काट सकते हैं, ताकि स्थानीय स्तर पर एंटी-इंकंबेंसी (नाराजगी) को दूर किया जा सके।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>2. बीजेपी के लिए ‘अतिरिक्त ताकत’?: चर्चा है कि चिराग पासवान यूपी में बीजेपी के लिए ‘अतिरिक्त ताकत’ बन सकते हैं, बशर्ते उन्हें समय रहते साध लिया जाए। अगर गठबंधन में बात नहीं बनी, तो वे कुछ सीटों पर स्वतंत्र रूप से लड़कर अपनी ताकत भी दिखा सकते हैं। हालांकि, फिलहाल वे एनडीए के मंच से ही आगे बढ़ने की रणनीति अपना रहे हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>‘2027 में प्रचंड बहुमत से बनेगी NDA सरकार’, लखनऊ में विपक्ष के ‘जातिगत चक्रव्यूह’ पर नितिन नवीन बोले- कार्यकर्ता ढहाएंगे विरोधियों का किला</title>
		<link>https://www.shauryatimes.com/news/240622</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Poonam]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 05 Jul 2026 10:53:03 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
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					<description><![CDATA[लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों का शंखनाद कर दिया है। अपने दो दिवसीय लखनऊ प्रवास के दौरान एनडीए के सहयोगी दलों, सांसदों और विधायकों के साथ हुई उच्च स्तरीय समन्वय बैठक के बाद नितिन नवीन ने दावा किया कि एनडीए आगामी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों का शंखनाद कर दिया है। अपने दो दिवसीय लखनऊ प्रवास के दौरान एनडीए के सहयोगी दलों, सांसदों और विधायकों के साथ हुई उच्च स्तरीय समन्वय बैठक के बाद नितिन नवीन ने दावा किया कि एनडीए आगामी चुनाव में प्रचंड बहुमत के साथ दोबारा सरकार बनाएगा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>राष्ट्रीय अध्यक्ष ने साफ शब्दों में कहा, पूरी तरह से भाजपा अपने आपको चुनाव मैदान में रखती है। उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के लिए एनडीए के सभी सहयोगी दलों ने मिलकर काम किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिस सेवा भाव के साथ जनता के लिए काम किया है, मुझे पूरी उम्मीद है कि 2027 में हम इतिहास दोहराएंगे।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>विपक्ष के भ्रामक नैरेटिव और जातिगत राजनीति पर कड़ा प्रहार</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>बैठक के भीतर की कड़ियों को साझा करते हुए सूत्रों ने बताया कि नितिन नवीन ने विपक्ष के ‘जातिगत कार्ड’ पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने पार्टी के सभी जनप्रनिधियों और कार्यकर्ताओं को आगाह किया कि विपक्ष एक बार फिर समाज को जातियों में बांटने की साजिश रच रहा है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>नितिन नवीन ने कहा, हमारी विचारधारा ‘नेशन फर्स्ट’ की है। भाजपा का कोई भी कार्यकर्ता या नेता किसी जातिगत खेमे में नहीं बंटेगा। विपक्ष सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से जो भ्रामक नैरेटिव बनाने की कोशिश कर रहा है, हमें जमीन पर उतरकर उसे ध्वस्त करना होगा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>जनप्रतिनिधियों को सख्त हिदायत</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>बैठक में संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सांसदों और विधायकों को दोटूक शब्दों में नसीहत दी कि अब दफ्तरों से बाहर निकलने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से करोड़ों लाभार्थी जुड़े हैं, लेकिन अगर यह समर्थन वोटों में तब्दील होने में कहीं चूक रहा है, तो इसका मतलब है कि हमारा जनता से संवाद कमजोर हुआ है। इसी संवादहीनता को दूर करने के लिए नेताओं को हर छोटी-बड़ी संगठनात्मक बैठक में अनिवार्य रूप से शामिल होना होगा।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पंजाब कांग्रेस में असंतोष की खबरों को खारिज कर जयराम रमेश ने कहा- पार्टी में लोकतांत्रिक संस्कृति</title>
		<link>https://www.shauryatimes.com/news/240615</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Poonam]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 05 Jul 2026 10:40:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली : कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने पंजाब कांग्रेस में विधानसभा चुनाव समिति की सूची पर असंतोष और आंतरिक मतभेदों की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है, जहां नेताओं और कार्यकर्ताओं को अपनी राय रखने की पूरी स्वतंत्रता है। पार्टी में किसी भी प्रकार का कोई असंतोष &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली : कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने पंजाब कांग्रेस में विधानसभा चुनाव समिति की सूची पर असंतोष और आंतरिक मतभेदों की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है, जहां नेताओं और कार्यकर्ताओं को अपनी राय रखने की पूरी स्वतंत्रता है। पार्टी में किसी भी प्रकार का कोई असंतोष नहीं है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>रमेश ने यहां पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि पार्टी में अनेक अनुभवी और प्रभावशाली नेता हैं, जिनके समर्थक उत्साह के साथ अपनी बात रखते हैं। कभी-कभी यही उत्साह मीडिया में सुर्खियां बन जाता है, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि पार्टी में कोई गंभीर संकट है। कांग्रेस में विचारों को दबाने की परंपरा नहीं है। पार्टी के नेता खुलकर अपनी बात रखते हैं और यही उसकी लोकतांत्रिक संस्कृति की पहचान है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास अनुभवी और जनाधार वाले नेताओं की कोई कमी नहीं है। विभिन्न नेताओं के समर्थकों का उत्साह स्वाभाविक है और इसे किसी तरह के संकट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। पंजाब में मौजूदा सरकार के खिलाफ माहौल बन रहा है और कांग्रेस एक बार फिर लोगों का विश्वास जीतने की स्थिति में है। पंजाब की जनता बदलाव चाहती है और आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को व्यापक जनादेश मिलेगा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>जयराम रमेश ने लोकसभा सीटों के परिसीमन और संभावित संवैधानिक संशोधन के मुद्दे पर कहा कि कांग्रेस ऐसे किसी भी प्रस्ताव का विरोध करेगी, जो लोकतांत्रिक और संघीय ढांचे को प्रभावित करता हो। केंद्र सरकार संसद में आवश्यक संख्या जुटाने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों में विभाजन कराने की कोशिश कर रही है। परिसीमन से जुड़ा संवैधानिक संशोधन पहले भी अपेक्षित समर्थन प्राप्त नहीं कर सका था और अब सरकार दोबारा इसे आगे बढ़ाने का प्रयास कर सकती है। विपक्षी दलों को कमजोर करने और राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से विभिन्न क्षेत्रीय दलों में टूट को प्रोत्साहित किया जा रहा है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर उन्होंने निर्वाचन आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया के खिलाफ नहीं है, लेकिन जिस तरीके से इसे लागू किया जा रहा है, उस पर गंभीर चिंताएं हैं। निर्वाचन आयोग भाजपा के एक अंग की तरह काम कर रहा है। कांग्रेस ने कर्नाटक के सभी विधायकों के साथ बैठक की है और पार्टी यह सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से न हटे। बिहार में जिस तरह मतदाता सूची को लेकर विवाद सामने आए थे, वैसी स्थिति कर्नाटक में नहीं बनने दी जाएगी।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उन्होंने राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले पर उच्चतम न्यायालय के किसी वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में जांच कराने की मांग फिर की। उन्होंने कहा कि इस मामले में प्रधानमंत्री को भी अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर पर संसद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान को लेकर कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल द्वारा दिए गए विशेषाधिकार हनन नोटिस पर कहा कि लोकसभा अध्यक्ष को अब इस मामले में उचित निर्णय लेना चाहिए।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आज ही के दिन शुरू की गई थी दबे-कुचले, शोषित और अल्पसंख्यकों के लिए लड़ाई : लालू यादव</title>
		<link>https://www.shauryatimes.com/news/240604</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Poonam]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 05 Jul 2026 09:41:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पटना : राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू यादव ने पार्टी के स्थापना दिवस के अवसर पर कार्यकर्ताओं के नाम संदेश जारी करते हुए कहा कि राजद केवल चुनाव लड़ने वाला राजनीतिक दल नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाला जनआंदोलन है। उन्होंने पार्टी नेताओं और &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>पटना : राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू यादव ने पार्टी के स्थापना दिवस के अवसर पर कार्यकर्ताओं के नाम संदेश जारी करते हुए कहा कि राजद केवल चुनाव लड़ने वाला राजनीतिक दल नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाला जनआंदोलन है। उन्होंने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से सामाजिक सरोकारों के साथ निरंतर जुड़े रहने तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में लालू यादव ने कहा कि 05 जुलाई का दिन उनके लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसी दिन अनेक वरिष्ठ साथियों के साथ मिलकर गरीबों, शोषितों, दबे-कुचले वर्गों, पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की लड़ाई शुरू की गई थी। उन्होंने कहा कि बिहार में सामाजिक और आर्थिक असमानता को समाप्त करने के उद्देश्य से राजद के हजारों कार्यकर्ताओं ने त्याग और बलिदान की मिसाल कायम की है। पार्टी का आज जो स्वरूप है, वह समर्पित कार्यकर्ताओं के खून-पसीने और संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने सभी समर्पित नेताओं और कार्यकर्ताओं को नमन करते हुए उनके योगदान की सराहना की।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>लालू यादव ने कहा कि राजद की राजनीति हमेशा सामाजिक और आर्थिक गैरबराबरी के खिलाफ रही है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का विकास मॉडल केवल हवाई अड्डों, बड़े मॉल और आलीशान होटलों के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा में शामिल करना उसका मूल उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि विकास तभी सार्थक माना जाएगा, जब गरीब और वंचित वर्गों की उसमें समान भागीदारी सुनिश्चित हो।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>लालू यादव ने कहा कि राजद ने सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था में व्याप्त असमानताओं के खिलाफ लगातार संघर्ष करते हुए लोकतंत्र को अधिक समावेशी बनाने का प्रयास किया है। समाजवादी विचारधारा के पुरोधाओं डॉ. राम मनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण, कर्पूरी ठाकुर और डॉ. भीमराव अंबेडकर के मूल्यों के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता पहले से अधिक मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि अब लक्ष्य वंचित समाज के आर्थिक और मनोवैज्ञानिक सशक्तीकरण की लड़ाई को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाना है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>राजद अध्यक्ष ने देश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक और जनवादी विचारधारा वाले दलों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं पर नियंत्रण, पूंजी के प्रभाव, जनप्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त और दक्षिणपंथी राजनीति के कारण लोकतांत्रिक व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है। उनके अनुसार पिछड़ों की भागीदारी, शिक्षा, रोजगार और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को अन्य राजनीतिक विमर्शों के पीछे धकेला जा रहा है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>राजद प्रमुख ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से कहा कि वे यह समझें कि राजद केवल चुनाव जीतने का माध्यम नहीं है। पार्टी को अपने समर्थक वर्गों, सामाजिक संगठनों और प्रगतिशील समूहों के साथ लगातार संवाद बनाए रखना होगा। उन्होंने कहा कि राजद संसद से लेकर सड़क तक जनता के मुद्दों पर संघर्ष करने में सक्षम है और आगे भी सामाजिक न्याय तथा संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उल्लेखनीय है कि राजद ने 01 जुलाई को पटना में अपना स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया था। पार्टी अपने 29 वर्ष पूरे कर 30वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। &#8212;&#8212;&#8212;&#8211;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बांकीपुर उपचुनाव में जनसुराज से उम्मीदवार होंगे प्रशांत किशोर</title>
		<link>https://www.shauryatimes.com/news/240601</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Poonam]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 05 Jul 2026 09:35:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[पटना : जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में पार्टी के उम्मीदवार होंगे। उनकी उम्मीदवारी की घोषणा रविवार को जनसुराज के अध्यक्ष मनोज भारती ने की। &#160; उम्मीदवारी की घोषणा के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि पिछले चार वर्षों से जनसुराज ही उनका जीवन है। उन्होंने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>पटना : जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में पार्टी के उम्मीदवार होंगे। उनकी उम्मीदवारी की घोषणा रविवार को जनसुराज के अध्यक्ष मनोज भारती ने की।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उम्मीदवारी की घोषणा के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि पिछले चार वर्षों से जनसुराज ही उनका जीवन है। उन्होंने कहा कि बांकीपुर से चुनाव लड़ने की जो जिम्मेदारी पार्टी ने उन्हें सौंपी है, उसका वह पूरी निष्ठा के साथ निर्वहन करेंगे।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उन्होंने पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनसुराज की यात्रा आने वाले दिनों में चाहे जितनी भी आगे बढ़े, स्थापना काल से जुड़े साथियों और पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी पर भरोसा जताने वाले मतदाताओं का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने बांकीपुर के कार्यकर्ताओं का विशेष रूप से धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके आग्रह पर ही उन्होंने चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>प्रशांत किशोर ने दावा किया कि बांकीपुर उपचुनाव पिछले छह महीने में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यों और नीतियों पर जनमत संग्रह साबित होगा। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा चुनाव जीतती है तो इसे सरकार की नीतियों के प्रति जनता के समर्थन के रूप में देखा जाएगा, जबकि हार की स्थिति में यह सरकार के प्रति जनविश्वास में कमी का संकेत होगा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उन्होंने कहा कि जनसुराज अपनी नीतियों और मुद्दों के आधार पर चुनाव लड़ रही है तथा पार्टी में शामिल होने के इच्छुक सभी लोगों का स्वागत है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>गौरतलब है कि 182-बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि मतगणना तीन अगस्त को होगी। उपचुनाव की अधिसूचना छह जुलाई को जारी की जाएगी। उसी दिन से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी। उम्मीदवार 13 जुलाई तक नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। नामांकन पत्रों की जांच 14 जुलाई को होगी, जबकि 16 जुलाई तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। इसके बाद चुनाव प्रचार तेज होगा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>यह सीट भाजपा नेता नितिन नवीन के विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद रिक्त हुई थी। फिलहाल किसी अन्य राजनीतिक दल ने अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सपा नेता राजेंद्र चौधरी को पड़ा दिल का दौरा: सिविल अस्पताल पहुंचे अखिलेश यादव और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, लोहिया संस्थान शिफ्ट करने की तैयारी</title>
		<link>https://www.shauryatimes.com/news/240425</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Poonam]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Jul 2026 12:36:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[चेन्नई : तमिलनाडु सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के अपने पहले पूर्ण बजट की तैयारियों को लगभग अंतिम चरण में पहुंचा दिया है। मुख्यमंत्री विजय की अध्यक्षता में शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन विभागवार समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न विभागों की योजनाओं, बजटीय आवश्यकताओं और नई घोषणाओं पर विस्तार से मंथन किया गया। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>चेन्नई : तमिलनाडु सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के अपने पहले पूर्ण बजट की तैयारियों को लगभग अंतिम चरण में पहुंचा दिया है। मुख्यमंत्री विजय की अध्यक्षता में शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन विभागवार समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न विभागों की योजनाओं, बजटीय आवश्यकताओं और नई घोषणाओं पर विस्तार से मंथन किया गया। मुख्यमंत्री बनने के बाद यह पहला अवसर है जब विजय सरकार अपना पूर्ण बजट पेश करने जा रही है। ऐसे में इस बजट को नई सरकार की नीतियों, चुनावी घोषणाओं और अगले पांच वर्षों के विकास रोडमैप का आधार माना जा रहा है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>सरकारी सूत्रों के अनुसार, तमिलनाडु विधानसभा का अगला सत्र जुलाई के अंतिम सप्ताह अथवा अगस्त के पहले सप्ताह में बुलाया जा सकता है। इसी सत्र में वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश किए जाने की संभावना है। इसे देखते हुए सभी विभागों से योजनाओं, परियोजनाओं और वित्तीय आवश्यकताओं का अंतिम आकलन कराया जा रहा है ताकि बजट दस्तावेज को अंतिम रूप दिया जा सके।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा है कि इस बार का बजट सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) के चुनावी घोषणा पत्र का प्रतिबिंब हो सकता है। चुनाव प्रचार के दौरान किए गए कई प्रमुख वादों को बजट के माध्यम से लागू करने की तैयारी चल रही है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>सूत्रों के मुताबिक सरकार महिलाओं को प्रति माह 2,500 रुपये की आर्थिक सहायता देने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रही है। इसके अलावा प्रत्येक परिवार को वर्ष में छह रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने के वादे को भी चरणबद्ध तरीके से लागू करने के विकल्पों पर मंथन जारी है। हालांकि सरकार इन योजनाओं को लागू करने से पहले उनके वित्तीय प्रभाव, राजकोषीय बोझ और संसाधनों की उपलब्धता का विस्तृत अध्ययन कर रही है, ताकि लोककल्याण और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>आज आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री विजय ने ग्रामीण विकास विभाग और राजमार्ग विभाग के अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की। बैठक में ग्रामीण सड़क नेटवर्क के विस्तार, पंचायत स्तर पर आधारभूत सुविधाओं के विकास, पेयजल आपूर्ति, स्वच्छता, ग्रामीण रोजगार, संपर्क मार्गों के निर्माण और राज्य के राजमार्गों के आधुनिकीकरण से जुड़े प्रस्तावों की समीक्षा की गई।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इसके साथ ही राज्य में चल रही सड़क निर्माण परियोजनाओं की प्रगति, नए पुलों और सड़कों के निर्माण, यातायात प्रबंधन तथा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच बेहतर संपर्क व्यवस्था विकसित करने के लिए आवश्यक बजटीय प्रावधानों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>सरकारी सूत्रों के अनुसार, विभागवार समीक्षा बैठकों का यह सिलसिला 22 जुलाई तक जारी रहेगा। इस दौरान लगभग सभी प्रमुख विभागों की योजनाओं, उपलब्धियों, लंबित परियोजनाओं और आगामी वित्तीय आवश्यकताओं की समीक्षा की जाएगी। इन बैठकों से प्राप्त सुझावों और विभागों द्वारा प्रस्तुत वित्तीय मांगों के आधार पर वित्त विभाग अंतिम बजट दस्तावेज तैयार करेगा, जिसे विधानसभा में पेश किया जाएगा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>मुख्यमंत्री विजय की अध्यक्षता में विभागवार समीक्षा बैठकों का दौर गुरुवार से शुरू हुआ था। पहले दिन सहकारिता एवं खाद्य विभाग तथा राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>बैठक में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस), खाद्यान्न आपूर्ति, सहकारी संस्थाओं के संचालन, प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारियों, राहत एवं पुनर्वास कार्यों तथा राजस्व प्रशासन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>बैठक में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री के.ए. सेंगोट्टैयन, वित्त मंत्री मरिया विल्सन, खाद्य मंत्री वेंकटरमणन, सहकारिता मंत्री गांधिराज सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और सचिव उपस्थित रहे। अधिकारियों ने विभागवार प्रस्तुतियों के माध्यम से योजनाओं की वर्तमान स्थिति, बजटीय आवश्यकताओं और भविष्य की प्राथमिकताओं से मुख्यमंत्री को अवगत कराया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>समीक्षा बैठकों में राज्य की वर्तमान वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए ऐसे प्रस्तावों पर चर्चा की जा रही है जिन्हें अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों स्तरों पर प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। सरकार अधूरी विकास परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने, लंबित सार्वजनिक सेवाओं में तेजी लाने, आधारभूत संरचना को मजबूत करने तथा जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दे रही है।&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>‘इस बार बीजेपी को वोट का चंदा भी नहीं मिलेगा’, अखिलेश यादव बोले- ‘2027 चुनाव चाहें सितंबर में करा लें, समाजवादी पार्टी पूरी तरह तैयार’</title>
		<link>https://www.shauryatimes.com/news/240343</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Poonam]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Jul 2026 13:02:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
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					<description><![CDATA[लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अगर वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव अक्टूबर-नवंबर में कराना चाहें, तो वे तैयार हैं। उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि जो लोग नवंबर में चुनाव कराना चाहते हैं, वे &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अगर वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव अक्टूबर-नवंबर में कराना चाहें, तो वे तैयार हैं। उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि जो लोग नवंबर में चुनाव कराना चाहते हैं, वे इसे सितंबर में करा सकते हैं, क्योंकि हम पूरी तरह से तैयार हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>अखिलेश यादव ने अपने इस बयान के साथ ही मौजूदा राजनीतिक हालात और न्याय व्यवस्था पर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि आज भी लोग न्याय के लिए भटक रहे हैं, लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि इस बार भाजपा को न तो चंदा मिलेगा, न दान, न चढ़ावा और न ही वोट।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उन्होंने कहा कि मर्यादा का पहला नाम प्रभु श्रीराम है और दूसरा नाम संविधान। उन्होंने कहा कि पहले आस्था के साथ खिलवाड़ किया गया और अब संविधान को दबाने का प्रयास हो रहा है, जिससे आस्था, मर्यादा और श्रद्धा तीनों को चोट पहुंची है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित घोटाले का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि चोरी भाजपा की “प्रैक्टिस” बन चुकी है। उन्होंने कहा कि इस बार स्वयं प्रभु श्रीराम ने उनकी पोल खोल दी है। यादव का कहना था कि यदि प्रभु श्रीराम के नाम पर चढ़े चढ़ावे का सही आंकड़ा सामने आए, तो यह रकम बहुत बड़ी हो सकती है, क्योंकि गुप्त दान का भी कोई हिसाब-किताब नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अंततः, प्रभु श्रीराम ही इसका हिसाब-किताब करेंगे।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>तृणमूल पर अधिकार की लड़ाई, चुनाव आयोग के समक्ष आज बागी और ममता गुट की दावेदारी पर अहम सुनवाई</title>
		<link>https://www.shauryatimes.com/news/240297</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Poonam]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Jul 2026 06:42:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
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					<description><![CDATA[कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस के नाम, चुनाव चिह्न और संगठन पर अधिकार को लेकर चल रही सियासी लड़ाई गुरुवार को निर्णायक मोड़ पर पहुंच सकती है। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के 10 विधायक आज नई दिल्ली स्थित भारत निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे। इस सुनवाई में बागी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस के नाम, चुनाव चिह्न और संगठन पर अधिकार को लेकर चल रही सियासी लड़ाई गुरुवार को निर्णायक मोड़ पर पहुंच सकती है। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के 10 विधायक आज नई दिल्ली स्थित भारत निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे। इस सुनवाई में बागी गुट पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और पार्टी निधि पर अपना दावा पेश करेगा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>ऋतब्रत बनर्जी ने बताया कि बागी गुट ने पहले ही आयोग से सुनवाई का समय मांगा था, जिसके बाद आयोग ने दो जुलाई को पूर्ण पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए बुलाया है। बुधवार शाम बागी गुट के विधायक नई दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>यह विवाद 22 जून को उस समय और गहरा गया था, जब बागी गुट ने 30 सदस्यीय नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी और 10 सदस्यीय उपसमिति का गठन किया। नई कार्यकारिणी में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाकर वरिष्ठ विधायक अरूप राय को यह जिम्मेदारी सौंप दी गई। इसके बाद दोनों गुटों के बीच संगठनात्मक और कानूनी संघर्ष तेज हो गया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>बागी गुट के अधिवक्ताओं ने निर्वाचन आयोग के समक्ष सभी प्रस्ताव और आवश्यक कानूनी दस्तावेज पहले ही जमा कर दिए हैं। अब आयोग दोनों पक्षों के दावों और दस्तावेजों के आधार पर मामले पर विचार करेगा। बागी गुट का दावा है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल 80 विधायकों में से 60 से अधिक विधायक उसके साथ हैं, जबकि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के पास केवल 20 विधायक हैं। इसी आधार पर बागी गुट का कहना है कि पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर उसका दावा अधिक मजबूत है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>बागी गुट ने निर्वाचन आयोग के समक्ष यह भी तर्क रखा है कि यदि उसके साथ मौजूद 60 से अधिक विधायकों के औसत मतों की गणना की जाए तो उसके पक्ष में लगभग 48 लाख मत आते हैं, जो निर्वाचन आयोग के निर्धारित मानदंड से अधिक हैं। दूसरी ओर, ममता गुट के साथ केवल 20 विधायक होने के कारण उसके मत निर्धारित सीमा तक नहीं पहुंचते।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>अब सभी की नजर निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ की सुनवाई पर टिकी है। इस सुनवाई का परिणाम यह तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है कि तृणमूल कांग्रेस के नाम, चुनाव चिह्न और संगठनात्मक अधिकार पर किस गुट का दावा मजबूत माना जाएगा। हालांकि, अंतिम निर्णय निर्वाचन आयोग द्वारा दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध कानूनी तथ्यों के परीक्षण के बाद ही लिया जाएगा।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने की तैयारी! महिला आरक्षण लागू करने के लिए सरकार का नया ‘मेगा प्लान’</title>
		<link>https://www.shauryatimes.com/news/240162</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Poonam]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 30 Jun 2026 16:06:02 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली : संसद के आगामी मॉनसून सत्र से पहले देश की सियासत में एक बार फिर संविधान संशोधन विधेयक को लेकर हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, सरकार महिला आरक्षण कानून को पूरी तरह से लागू करने की दिशा में एक बड़े मास्टरप्लान पर काम कर रही है। चर्चा है कि लोकसभा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली : संसद के आगामी मॉनसून सत्र से पहले देश की सियासत में एक बार फिर संविधान संशोधन विधेयक को लेकर हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, सरकार महिला आरक्षण कानून को पूरी तरह से लागू करने की दिशा में एक बड़े मास्टरप्लान पर काम कर रही है। चर्चा है कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 850 तक किया जा सकता है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य न केवल महिला प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करना है, बल्कि परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों की आपत्तियों को भी शांत करना है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>सीटें बढ़ाने का नया गणित और ‘प्रस्तावित फॉर्मूला’</p>
<p>सरकार जिस नए फॉर्मूले पर विचार कर रही है, उसके तहत सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत तक की वृद्धि का प्रस्ताव है। सबसे अहम बात यह है कि इसमें 1971 की जनगणना के आधार पर राज्यों के बीच सीटों का मौजूदा अनुपात बरकरार रखा जाएगा, जबकि 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर सीटों का पुनर्निर्धारण होगा। इस कवायद का अंतिम लक्ष्य 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून को जमीनी स्तर पर लागू करना है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>संसद में बहुमत का ‘अग्निपरीक्षा’</p>
<p>संविधान संशोधन के लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की अनिवार्यता होती है। लोकसभा में मौजूदा स्थिति पर नजर डालें तो प्रभावी सदस्य संख्या 540 है, जिसके लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 360 का आंकड़ा चाहिए। वर्तमान में एनडीए के पास 319 सांसदों का समर्थन है, जिसमें हाल ही में शामिल हुए कुछ बागी सांसद भी शामिल हैं। हालांकि, यह संख्या अपेक्षित आंकड़े से अभी भी पीछे है। माना जा रहा है कि यदि विपक्ष के कुछ दल मतदान से दूरी बनाते हैं, तो यह जादुई आंकड़ा घटकर 342 तक आ सकता है, जो सरकार के लिए राहत की बात हो सकती है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>राज्यसभा का समीकरण</p>
<p>उच्च सदन यानी राज्यसभा में एनडीए की स्थिति थोड़ी मजबूत जरूर है, लेकिन वहां भी बहुमत का रास्ता आसान नहीं है। राज्यसभा की 242 सीटों में से दो-तिहाई बहुमत यानी 164 सीटों की आवश्यकता है। वर्तमान में भाजपा के पास 114 सीटें हैं। शेष सीटें कांग्रेस, तृणमूल, द्रमुक और अन्य क्षेत्रीय दलों के पास हैं। इन आंकड़ों को देखते हुए आगामी सत्र में सरकार को विधेयक पारित कराने के लिए विपक्षी दलों या अन्य क्षेत्रीय ताकतों के साथ गहन राजनीतिक तालमेल बिठाना होगा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>अध्यक्ष के फैसलों पर टिकी निगाहें</p>
<p>संसद के इस महत्वपूर्ण सत्र से पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की भूमिका भी बेहद अहम होने वाली है। सदन में तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) के बागी सांसदों को लेकर कई कानूनी और प्रक्रियात्मक निर्णय होने हैं। वहीं, द्रमुक ने भी सदन में बैठने की व्यवस्था में बदलाव का अनुरोध किया है, जो राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि मॉनसून सत्र में सरकार इस बड़े संवैधानिक बदलाव का विधेयक पेश करती है या नहीं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Modi Cabinet Expansion: मानसून सत्र से पहले बड़ा फेरबदल! कई दिग्गजों की होगी छुट्टी, इन नए चेहरों की चमकेगी किस्मत</title>
		<link>https://www.shauryatimes.com/news/240159</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Poonam]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 30 Jun 2026 15:55:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी राजनीतिक खबर सामने आ रही है। सरकार अपने मंत्रिमंडल में एक बहुत बड़े और व्यापक फेरबदल की तैयारी में है। सियासी हलकों में बेहद पुख्ता सूत्रों के हवाले से यह दावा किया जा रहा है कि &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी राजनीतिक खबर सामने आ रही है। सरकार अपने मंत्रिमंडल में एक बहुत बड़े और व्यापक फेरबदल की तैयारी में है। सियासी हलकों में बेहद पुख्ता सूत्रों के हवाले से यह दावा किया जा रहा है कि अगले कुछ ही दिनों के भीतर मोदी कैबिनेट का विस्तार हो सकता है। इस महा-विस्तार में जहां कई नए और चौंकाने वाले चेहरों को कैबिनेट में एंट्री मिल सकती है, वहीं खराब परफॉर्मेंस या संगठन की जिम्मेदारी संभाल रहे कुछ पुराने मंत्रियों की छुट्टी होना भी लगभग तय माना जा रहा है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>चुनावी राज्यों पर फोकस, तैयार हो रहा है सियासी रोडमैप</p>
<p>इस संभावित कैबिनेट विस्तार को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और सरकार के शीर्ष नेतृत्व के बीच बैठकों का दौर जारी है और इसका पूरा रोडमैप तैयार कर लिया गया है। इस बार के फेरबदल का मुख्य फोकस उन राज्यों पर रहने वाला है, जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड जैसे बेहद महत्वपूर्ण राज्यों का प्रतिनिधित्व कैबिनेट में बढ़ाने जा रही है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>तारीखों की बात करें तो 11 जुलाई तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कई अहम कार्यक्रम और विदेशी दौरे पहले से तय हैं। वहीं, संसद का आगामी मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने की प्रबल संभावना है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रधानमंत्री इस सत्र की शुरुआत से ठीक पहले अपने नए सहयोगियों को शपथ दिला सकते हैं ताकि विपक्ष के सामने एक नई और मजबूत टीम के साथ उतरा जा सके।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>जातीय समीकरण और ‘एक व्यक्ति, एक पद’ का फॉर्मूला</p>
<p>देश की सियासत में इस वक्त सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि आखिर किन मंत्रियों की कुर्सी खतरे में है। भाजपा के ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के कड़े सिद्धांत के तहत उत्तर प्रदेश के पंकज चौधरी और दिल्ली के हर्ष मल्होत्रा को संगठन में प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी गई है, जिसके चलते इन दोनों ही नेताओं की कैबिनेट से विदाई तय मानी जा रही है। इसके अलावा केरल से आने वाले जॉर्ज कुरियन पहले ही मंत्री पद से इस्तीफा दे चुके हैं और रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो चुका है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>वर्तमान में मोदी सरकार के मंत्रिपरिषद में कुल 72 मंत्री शामिल हैं, जिनमें 31 कैबिनेट, 5 स्वतंत्र प्रभार और 36 राज्यमंत्री हैं। नियमों के मुताबिक, केंद्र सरकार में अधिकतम 81 मंत्री हो सकते हैं, जिसका मतलब है कि इस वक्त भी सीधे तौर पर 13 पद खाली चल रहे हैं। भाजपा इस खाली जगह को क्षेत्रीय, राज्यवार और जातीय संतुलन साधने के लिए इस्तेमाल करेगी।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>यूपी से लेकर पंजाब तक दिखेगा नए मंत्रियों का दबदबा</p>
<p>उत्तर प्रदेश में साल 2027 के विधानसभा रण को फतह करने के लिए इस कैबिनेट विस्तार का सबसे ज्यादा असर यूपी कोटे पर दिखेगा। वर्तमान में सूबे से प्रधानमंत्री सहित 10 मंत्री हैं। सूत्रों की मानें तो लोकसभा चुनाव के बाद बदले सामाजिक समीकरणों को ठीक करने के लिए पश्चिमी यूपी को इस बार मोदी कैबिनेट में भारी प्रतिनिधित्व मिल सकता है। प्रधानमंत्री मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ का ध्यान इस क्षेत्र पर विशेष रूप से केंद्रित है। यहां से ओबीसी और दलित समुदाय के कुछ नए चेहरों को लाल बत्ती मिलना तय है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>वहीं, उत्तराखंड की बात करें तो दलित चेहरे के रूप में स्थापित अजय टम्टा, जो फिलहाल परिवहन राज्य मंत्री हैं, का कद बढ़ाया जा सकता है या फिर राज्य से किसी अन्य युवा चेहरे को मौका मिल सकता है। पंजाब, जहां जल्द ही विधानसभा चुनाव होने हैं, वहां से भी सिखों और अन्य वर्गों को साधने के लिए 2 से 3 नए चेहरे शामिल किए जा सकते हैं। आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में आए कुछ राज्यसभा सदस्यों के नामों पर भी इस समय गंभीरता से विचार चल रहा है।</p>
<p>बागी और क्षेत्रीय क्षत्रपों को साधने की बड़ी रणनीति</p>
<p>इस बार के फेरबदल में केवल भाजपा ही नहीं, बल्कि सहयोगी दलों और विपक्षी खेमे में सेंधमारी करने वाले नेताओं को भी बड़ा इनाम मिल सकता है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के करीब 20 लोकसभा सांसदों ने ममता बनर्जी का साथ छोड़कर एनसीपीआई (NCPI) में विलय किया है और वे मोदी सरकार को समर्थन दे रहे हैं। चर्चा तेज है कि इन बागी सांसदों में से एक या दो को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में जगह दी जा सकती है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>महाराष्ट्र की राजनीति में भी बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से 6 लोकसभा सांसद उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ आ चुके हैं। शिंदे गुट की इस बढ़ती ताकत को देखते हुए उनके कोटे से मंत्रियों की संख्या एक से बढ़कर तीन हो सकती है। इसके अलावा बिहार की राजनीति में आए ऐतिहासिक मोड़ के बाद, जहां नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बने हैं, नीतीश कुमार को राज्यसभा भेजे जाने के बाद केंद्र में कैबिनेट मंत्री बनाए जाने की अटकलें बेहद तेज हो चुकी हैं।</p>
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