अमेरिका में सरकारी कामकाज ठप होने के कारण लोगों को नहीं मिल रहा शादी का लाइसेंस – Shaurya Times | शौर्य टाइम्स https://www.shauryatimes.com Latest Hindi News Portal Fri, 04 Jan 2019 06:57:26 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.2 अमेरिका में सरकारी कामकाज ठप होने के कारण लोगों को नहीं मिल रहा शादी का लाइसेंस https://www.shauryatimes.com/news/25913 Fri, 04 Jan 2019 06:57:26 +0000 http://www.shauryatimes.com/?p=25913 अमेरिकी नागरिक डैन पोलक और उनकी होने वाली पत्नी अपनी शादी का प्रमाण पत्र लेने वॉशिंगटन में ‘मैरिज ब्यूरो’ पहुंचे, लेकिन सरकारी कामकाज ठप होने के कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा. डैन पोलक और उनकी पत्नी की तरह अमेरिका में कई ऐसे जोड़े हैं जो सरकारी कामकाज ठप होने के कारण अपने विवाह को कानूनी दर्जा नहीं दे पा रहे हैं.

पोलक ने कहा, ‘‘जब हम ब्यूरो पहुंचे और तो उन्होंने विनम्रता के साथ हमें लौटा दिया और कहा कि सरकारी कामकाज फिर से आरंभ होने तक लाइसेंस जारी नहीं किए जाएंगे.’’ पूर्व निर्धारित विवाह समारोह में दो ही दिन शेष होने के कारण उन्होंने विवाह कार्यक्रम में बदलाव नहीं करने का फैसला किया, लेकिन अपनी शादी को कानूनी दर्जा देने के लिए वे कामकाज शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं.

इस दंपति ने ट्विटर पर अपनी कहानी पोस्ट की है जो सरकारी कामकाज ठप होने के कारण आम लोगों को हो रही परेशानियों का एक उदाहरण है. सरकारी कामकाज जल्द पुन: शुरू होने का आसार नहीं दिखने के कारण नवविवाहित जोड़ों की चिंता बढ़ने लगी है. पोलक की ही तरह क्लेयर ओ रौरके की 12 जनवरी को शादी तय है. उन्होंने कहा, ‘‘हम विवाह करेंगे लेकिन हम चाहते हैं कि कागजी काम भी जल्द पूरा हो.’

मेयर ने की यह घोषणा

हालांकि वॉशिंगटन के मेयर मुरियल बोजर ने कामकाज ठप होने के बावजूद विवाह लाइसेंस जारी करने के लिए असाधारण कदम उठाने की घोषाणा की है, ताकि प्रमाण पत्र जारी किए जा सकें.

आखिरकार क्योंं ठप पड़ा है कामकाज?

उल्लेखनीय है कि अमेरिका-मेक्सिको सीमा पर दीवार निर्माण की ट्रंप की मांग को लेकर रिपब्लिकन एवं डेमोक्रेट्स अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं. ट्रंप इस दीवार के लिए 5.6 अरब डॉलर की निधि मांग रहे हैं और उनके मुताबिक अमेरिका में अवैध आव्रजकों के प्रवेश को रोकने के लिए इस दीवार का बनना बेहद जरूरी है. वहीं डेमोक्रेट्स का कहना है कि इस तरह का कदम उठाना “करदाताओं के धन की बर्बादी” है.

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