अर्जुन से बदला लेने के लिए जब कर्ण के तूणीर में पहुंचा एक जहरीला सर्प – Shaurya Times | शौर्य टाइम्स https://www.shauryatimes.com Latest Hindi News Portal Thu, 07 Mar 2019 06:23:24 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.2 अर्जुन से बदला लेने के लिए जब कर्ण के तूणीर में पहुंचा एक जहरीला सर्प https://www.shauryatimes.com/news/34807 Thu, 07 Mar 2019 06:23:24 +0000 http://www.shauryatimes.com/?p=34807 महाभारत से इतर भी हमें महाभारत के संबंध में कुछ कथाएं मिलती हैं। उन्हीं में से एक कथा है कर्ण और सर्प के बारे में। लोककथाओं के अनुसार माना जाता है कि युद्ध के दौरान कर्ण के तूणीर में कहीं से एक बहुत ही जहरीला सर्प आकर बैठ गया। तूणीर अर्थात जहां तीर रखते हैं, जिसे तरकश भी कहते हैं। यह पीछे पीठ पर बंधी होती है। कर्ण ने जब एक तीर निकालना चाहा तो तीर की जगह यह सर्प उनके हाथ में आ गया।
कर्ण ने पूछा, तुम कौन हो और यहां कहां से आ गए। तब सर्प ने कहा, हे दानवीर कर्ण, मैं अर्जुन से बदला लेने के लिए आपके तूणीर में जा बैठा था। कर्ण ने पूछा, क्यों?

इस पर सर्प ने कहा, राजन! एक बार अर्जुन ने खांडव वन में आग लगा दी थी। उस आग में मेरी माता जलकर मर गई थी, तभी से मेरे मन में अर्जुन के प्रति विद्रोह है। मैं उससे प्रतिशोध लेने का अवसर देख रहा था। वह अवसर मुझे आज मिला है।
कुछ रुककर सर्प फिर बोला, आप मुझे तीर के स्थान पर चला दें। मैं सीधा अर्जुन को जाकर डस लूंगा और कुछ ही क्षणों में उसके प्राण-पखेरू उड़ जाएंगे।

सर्प की बात सुनकर कर्ण सहजता से बोले, हे सर्पराज, आप गलत कार्य कर रहे हैं। जब अर्जुन ने खांडव वन में आग लगाई होगी तो उनका उद्देश्य तुम्हारी माता को जलाना कभी न रहा होगा। ऐसे में मैं अर्जुन को दोषी नहीं मानता। दूसरा अनैतिक तरह से विजय प्राप्त करना मेरे संस्कारों में नहीं है इसलिए आप वापस लौट जाएं और अर्जुन को कोई नुकसान न पहुंचाएं। यह सुनकर सर्प वहां से उड़ गया। यदि कर्ण सर्प की बात मान लेते तो क्या होता?
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