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	<title>कब-कब महामारी के संकट से उबरी दुनिया &#8211; Shaurya Times | शौर्य टाइम्स</title>
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		<title>जानें, कब-कब महामारी के संकट से उबरी दुनिया, वैक्‍सीन की खोज ने किया चमत्‍कार, बच गई लाखों जिंदग‍ियां</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 14 Dec 2020 07:51:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[कब-कब महामारी के संकट से उबरी दुनिया]]></category>
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		<category><![CDATA[वैक्‍सीन की खोज ने किया चमत्‍कार]]></category>
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					<description><![CDATA[&#8216;आवश्‍यकता आविष्‍कार की जननी है&#8217; यह कहावत दुनिया में फैली महामारियों और उसके वैक्‍सीन पर एकदम सटीक बैठती है। जब-जब दुनिया में किसी महामारी ने पैर पसारा है, तब-तब किसी वैक्‍सीन का आविष्‍कार हुआ है। महामारी और वैक्‍सीन का एक लंबा इतिहास है। कोरोना महामारी की वैक्‍सीन को लेकर पूरी दुनिया में हल्‍ला है। दुनिया &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&#8216;आवश्&#x200d;यकता आविष्&#x200d;कार की जननी है&#8217; यह कहावत दुनिया में फैली महामारियों और उसके वैक्&#x200d;सीन पर एकदम सटीक बैठती है। जब-जब दुनिया में किसी महामारी ने पैर पसारा है, तब-तब किसी वैक्&#x200d;सीन का आविष्&#x200d;कार हुआ है। महामारी और वैक्&#x200d;सीन का एक लंबा इतिहास है। कोरोना महामारी की वैक्&#x200d;सीन को लेकर पूरी दुनिया में हल्&#x200d;ला है। दुनिया के लिए खतरा बन चुके कोरोना वायरस से बचाव का अब स&#x200d;िर्फ वैक्&#x200d;सीन ही सहारा है। ऐसे में पूरी दुनिया की नजर कोरोना वैक्&#x200d;सीन पर टिकी है। ऐसे में यह जिज्ञासा पैदा होती है कि आखिर इस वैक्&#x200d;सीन का इतिहास क्&#x200d;या है। दुनिया ने पहली बार किस रोग के लिए वैक्&#x200d;सीन का इस्&#x200d;तेमाल किया गया। <img fetchpriority="high" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-94220" src="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2020/12/rtfgrf.jpg" alt="" width="650" height="540" srcset="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2020/12/rtfgrf.jpg 650w, https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2020/12/rtfgrf-300x249.jpg 300w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></p>
<p><strong>संक्रामक बीमारियों से रू-ब-रू हो चुकी है दुनिया</strong></p>
<p>कोरोना के पूर्व दुनिया में प्&#x200d;लेग, चेचक, हैजा, टाइफाइड, टिटनेस, रेबीज, टीबी, पोलियो जैसी कई महामारियों से रू-ब-रू हो चुकी है। दुनिया कई दफा संक्रामक बीमारी के प्रकोप से जूझ चुकी है। इन संक्रामक बीमारी के चलते लाखों-करोड़ों लोगों की जानें जा चुकी है। सदियों से किए जा रहे अध्ययन और शोध बताते हैं कि इन महामारी से निजात दिलाने के लिए शोधकर्ताओं एवं वैज्ञानिकों ने वैक्&#x200d;सीन की खोज की और संक्रामक बीमारियों से निजात दिलाया।</p>
<p><strong>1- 1796 में दुनिया में आई पहली वैक्&#x200d;सीन</strong></p>
<p>दुनिया में कई दशकों तक चेचक का प्रकोप जारी रहा था। इसकी वजह से कई लोगों को जान गंवानी पड़ी थी। चेचक दुनिया की पहली बीमारी थी, जिसके टीके की खोज हुई। 1796 में अंग्रेज चिकित्&#x200d;सक एडवर्ड जेनर ने चेचक के टीके का आविष्&#x200d;कार किया। इस आविष्&#x200d;कार से आज करोड़ों लोग चेचक जैसी घातक बीमारी से ठीक हो चुके हैं। चेचक का टीका दुनिया के लिए एक चमत्&#x200d;कार से कम नहीं था। अमेरिका में पहली बार वैक्सीन को लेकर कानून तैयार किया गया। अमेरिका में स्मॉलपॉक्स वैक्सीन सभी को देना अनिवार्य किया गया। 1898 में कानून को अपडेट भी किया गया था।</p>
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<p>1885 में पूरी दुनिया रेबीज महामारी से जूझ रही थी। यह एक संक्रामक बीमारी है। रेबीज कुत्&#x200d;ते के काटने से होता है। ऐसे में प्रसिद्ध फ्रेंच वैज्ञानिक लुई पाश्&#x200d;चर ने रेबीज के टीके का सफल परीक्षण किया। इस खोज ने चिकित्&#x200d;सा की दुनिया में एक क्रांति ला दी। मानवता को एक बड़े संकट से बचा लिया। उन्&#x200d;होंने डिप्&#x200d;थेरिया, टिटनेस, हैजा, प्&#x200d;लेग, टाइफाइड, टीबी समेत कई बीमारियों के लिए टीके विकसित किए।</p>
<div class="relativeNews">
<p><strong>3- 1921 में टीबी का टीका</strong></p>
<p>1921 में टीबी की बैसिलस कैल्मेट-गुएरिन (BCG) वैक्&#x200d;सीन विकसित की गई। इसके बाद टीबी एक लाइलाज बीमारी नहीं रही। यह वैक्&#x200d;सीन शरीर के इम्&#x200d;यून सिस्&#x200d;टम या प्रतिरोधी क्षमता को एक खास संक्रमण से बचाव के लिए तैयार करता है। बीसीजी का टीका पश्चिम अफ्रीका के देश गिनी बिसाउ में नवजातों में मृत्&#x200d;यु दर को 38 फीसद तक कम करने में कामयाब रहा। क्षय रोग (TB) एक ऐसी बीमारी है जो मायकोबैक्टीरियम ट्युबर्कुलॉसिस नामक क्षय रोग के जीवाणु के कारण होती है।</p>
<div class="relativeNews">
<p><strong>यह भी जानें</strong></p>
<p>1923 : डिप्थीरिया की बीमारी से बचने के लिए वैक्सीन बनाई गई।</p>
<p>1926 : टिटनेस की बीमारी से बचने के लिए वैक्सीन का आविष्कार हुआ।</p>
<p>1936 : मैक्स थैलर और उनके सहयोगी ने पहली बार यलो फीवर से बचने के टीके का ईजाद किया गया।</p>
<p>1944 : जापानी इनसेफेलाइटिक बुखार से कई लोगों की मौत के बाद वैक्सीन की खोज की गई।</p>
<p>1945 : पहली बार फ्लू वैक्सीन कैम्पेन शुरू किया गया।</p>
<p>1960 : अल्बर्ट सैबिन के पोलियोवायरस के टीके को अमेरिका में लाइसेंस मिला। इस वैक्सीन से टाइप-1 पोलियोवायरस से सुरक्षा मिली। बाद में पोलिया वायरस के टाइप-2 और टाइप-3 को भी लाइसेंस मिल गया। वर्ष 1963 के टीका में सभी तीन प्रकार शामिल थे।</p>
<p>1963 : खसरा के टीके को लाइसेंस प्राप्त हुआ। खसरे के टीके का सबसे पहले बंदरों और उसके बाद मनुष्यों में प्रयोग किया गया। जॉन एंडर्स और उनके सहकर्मियों ने अपने खसरे के टीके की घोषणा। अमेरिका में 1963 में खसरे की टीके को लाइसेंस मिला और अगले 12 वर्षों में देश में करीब 19 मिलियन खुराक दी गई। इसके बाद 1969 में रुबेला वायरस के टीके को भी मान्यता दे दी गई।</p>
<p>1971 : अमेरिकी सरकार ने खसरा, गलसुआ, और रुबेला के संयुक्त टीके (MMR) को लाइसेंस किया। यह टीका इन तीनों रोगों की रोकथाम में बहुत प्रभावी रहा।</p>
<p>1977 : न्यूमोकोकल टीके को मंजूरी दी गई। यह एक मल्टी-सेरोटाइप टीका था, जिसे पेंसिल्वेनिया युनिवर्सिटी के एमडी रॉबर्ट अस्ट्रिअन (1916-2007) वर्षों तक अध्ययन के बाद तैयार किया था। इस टीके के साथ ही स्वाइन फ्लू के टीके को लेकर भी अमेरिकी में काम शुरू किया गया।</p>
<p>1986 : हेपाटाइटिस-B के रिकम्बिनेंट वैक्सिन को लाइसेंस दिया गया। यह हेपाटाइटिस B टीका रिकम्बिनेंट DNA विधियों से तैयार पहला मानव टीका था।</p>
<p>2002 : पूरा यूरोप पोलियो मुक्त घोषित कर दिया गया।</p>
<p>2009 : एच1एन1 के खिलाफ वैक्सीन बनाने में सफलता मिली।</p>
<p>अगस्त 2020 : पूरा अफ्रीकी महाद्वीप पोलियो से मुक्त घोषित किया गया।</p>
<p>दिसंबर 2020 : कोरोना वायरस के खिलाफ फाइजर, ऑक्सफोर्ड और कुछ अन्य कंपनियों ने वैक्सीन बनाने में सफलता पाई।</p>
<p>&nbsp;</p>
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