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	<title>करवा चौथ की कथा हिन्दी में मिलेगी यहां &#8211; Shaurya Times | शौर्य टाइम्स</title>
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		<title>करवा चौथ की कथा हिन्दी में मिलेगी यहां,</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 03 Nov 2020 05:19:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[करवा चौथ की कथा हिन्दी में मिलेगी यहां]]></category>
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					<description><![CDATA[* करवा चौथ व्रत की पौराणिक कहानी :- करवा चौथ व्रत की प्रामाणिक एवं पौराणिक कथा के अनुसार बहुत समय पहले की बात है, एक साहूकार के सात बेटे और उनकी एक बहन करवा थी। सभी सातों भाई अपनी बहन से बहुत प्यार करते थे। यहां तक कि वे पहले उसे खाना खिलाते और बाद &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>* करवा चौथ व्रत की पौराणिक<br />
</strong><strong>कहानी :-</strong></p>
<div>करवा चौथ व्रत की प्रामाणिक एवं पौराणिक कथा के अनुसार बहुत समय पहले की बात है, एक साहूकार के सात बेटे और उनकी एक बहन करवा थी। सभी सातों भाई अपनी बहन से बहुत प्यार करते थे। यहां तक कि वे पहले उसे खाना खिलाते और बाद में स्वयं खाते थे। एक बार उनकी बहन ससुराल से मायके आई हुई थी।</div>
<div></div>
<div><img fetchpriority="high" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-89199" src="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2020/11/fvbgfgv.jpg" alt="" width="1280" height="720" srcset="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2020/11/fvbgfgv.jpg 1280w, https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2020/11/fvbgfgv-300x169.jpg 300w, https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2020/11/fvbgfgv-1024x576.jpg 1024w, https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2020/11/fvbgfgv-768x432.jpg 768w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></div>
<div></div>
<div>शाम को भाई जब अपना व्यापार-व्यवसाय बंद कर घर आए तो देखा उनकी बहन बहुत व्याकुल थी। सभी भाई खाना खाने बैठे और अपनी बहन से भी खाने का आग्रह करने लगे, लेकिन बहन ने बताया कि उसका आज करवा चौथ का निर्जल व्रत है और वह खाना सिर्फ चंद्रमा को देखकर उसे अर्घ्&#x200d;य देकर ही खा सकती है। चूंकि चंद्रमा अभी तक नहीं निकला है, इसलिए वह भूख-प्यास से व्याकुल हो उठी है।</div>
<div></div>
<div>सबसे छोटे भाई को अपनी बहन की हालत देखी नहीं जाती और वह दूर पीपल के पेड़ पर एक दीपक जलाकर चलनी की ओट में रख देता है। दूर से देखने पर वह ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे चतुर्थी का चांद उदित हो रहा हो।</div>
<div></div>
<div>इसके बाद भाई अपनी बहन को बताता है कि चांद निकल आया है, तुम उसे अर्घ्य देने के बाद भोजन कर सकती हो। बहन खुशी के मारे सीढ़ियों पर चढ़कर चांद को देखती है, उसे अर्घ्&#x200d;य देकर खाना खाने बैठ जाती है।</div>
<div></div>
<div>वह पहला टुकड़ा मुंह में डालती है तो उसे छींक आ जाती है। दूसरा टुकड़ा डालती है तो उसमें बाल निकल आता है और जैसे ही तीसरा टुकड़ा मुंह में डालने की कोशिश करती है तो उसके पति की मृत्यु का समाचार उसे मिलता है। वह बौखला जाती है।</div>
<div></div>
<div>उसकी भाभी उसे सच्चाई से अवगत कराती है कि उसके साथ ऐसा क्यों हुआ। करवा चौथ का व्रत गलत तरीके से टूटने के कारण देवता उससे नाराज हो गए हैं और उन्होंने ऐसा किया है।</div>
<div></div>
<div>सच्चाई जानने के बाद करवा निश्चय करती है कि वह अपने पति का अंतिम संस्कार नहीं होने देगी और अपने सतीत्व से उन्हें पुनर्जीवन दिलाकर रहेगी। वह पूरे एक साल तक अपने पति के शव के पास बैठी रहती है। उसकी देखभाल करती है। उसके ऊपर उगने वाली सूईनुमा घास को वह एकत्रित करती जाती है।</div>
<div></div>
<div>एक साल बाद फिर करवा चौथ का दिन आता है। उसकी सभी भाभियां करवा चौथ का व्रत रखती हैं। जब भाभियां उससे आशीर्वाद लेने आती हैं तो वह प्रत्येक भाभी से &#8216;यम सूई ले लो, पिय सूई दे दो, मुझे भी अपनी जैसी सुहागिन बना दो&#8217; ऐसा आग्रह करती है, लेकिन हर बार भाभी उसे अगली भाभी से आग्रह करने का कह चली जाती है।</div>
<div></div>
<div>इस प्रकार जब छठे नंबर की भाभी आती है तो करवा उससे भी यही बात दोहराती है। यह भाभी उसे बताती है कि चूंकि सबसे छोटे भाई की वजह से उसका व्रत टूटा था अतः उसकी पत्नी में ही शक्ति है कि वह तुम्हारे पति को दोबारा जीवित कर सकती है, इसलिए जब वह आए तो तुम उसे पकड़ लेना और जब तक वह तुम्हारे पति को जिंदा न कर दे, उसे नहीं छोड़ना। ऐसा कह</div>
<div>कर वह चली जाती है।</div>
<div>
<div></div>
<div>सबसे अंत में छोटी भाभी आती है। करवा उनसे भी सुहागिन बनने का आग्रह करती है, लेकिन वह टालमटोली करने लगती है। इसे देख करवा उन्हें जोर से पकड़ लेती है और अपने सुहाग को जिंदा करने के लिए कहती है। भाभी उससे छुड़ाने के लिए नोचती है, खसोटती है, लेकिन करवा नहीं छोड़ती है। अंत में उसकी तपस्या को देख भाभी पसीज जाती है और अपनी छोटी अंगुली को चीरकर उसमें से अमृत उसके पति के मुंह में डाल देती है।</div>
<div></div>
<div>करवा का पति तुरंत श्रीगणेश-श्रीगणेश कहता हुआ उठ बैठता है। इस प्रकार प्रभु कृपा से उसकी छोटी भाभी के माध्यम से करवा को अपना सुहाग वापस मिल जाता है। हे श्री गणेश- मां गौरी जिस प्रकार करवा को चिर सुहागन का वरदान आपसे मिला है, वैसा ही सब सुहागिनों को मिले।</div>
</div>
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