किसानों के साथ है TMC लेकिन भारत बंद का नहीं करेगी समर्थन- पार्टी सांसद सौगत राय – Shaurya Times | शौर्य टाइम्स https://www.shauryatimes.com Latest Hindi News Portal Mon, 07 Dec 2020 06:39:58 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.2 किसानों के साथ है TMC लेकिन भारत बंद का नहीं करेगी समर्थन- पार्टी सांसद सौगत राय https://www.shauryatimes.com/news/93233 Mon, 07 Dec 2020 06:39:58 +0000 http://www.shauryatimes.com/?p=93233 पिछले 11 दिनों से कृषि विधेयक के खिलाफ जारी किसानों के आंदोलन का सोमवार को 12वां दिन है। यह आंदोलन व्यापक रूप लेता जा रहा है। इस क्रम में मंगलवार, 8 दिसंबर को किसानों ने भारत बंद का ऐलान किया है जिसे विपक्षी पार्टियों का पूरा समर्थन प्राप्‍त है। कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी व महाराष्‍ट्र, बिहार, तमिलनाडु, उत्‍तर प्रदेश व जम्‍मू-कश्‍मीर की 10 पार्टियों ने संयुक्‍त बयान जारी कर भारत बंद को अपना समर्थन दिया है।

किसानों के साथ TMC लेकिन बंद को नहीं देगी समर्थन

तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत राय (TMC MP Saugata Roy) ने कहा, ‘पार्टी आंदोलनकारी किसानों के साथ है लेकिन पश्‍चिम बंगाल में भारत बंद को अपना समर्थन नहीं देंगे। यह हमारे सिद्धांतों के खिलाफ है।’

पंजाब में बंद रहेंगे होटल व रिसॉर्ट

भारत बंद के मद्देनजर 8 दिसंबर , बुधवार को पंजाब के होटलों व रिसॉर्ट को बंद रखा जाएगा। इसके तहत पहले से किए गए शादी व अन्‍य पार्टियों की बुकिंग को भी रद कर दिया गया है।

समर्थन में मायावती और केजरीवाल 

इसमें उत्‍तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती का नाम भी शामिल है। इसके अलावा आंदोलन करने वाले किसानों से दिल्ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आज मुलाकात की। वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े भारतीय किसान संघ ने आंदोलनकारी किसानों द्वारा बुलाए गए 8 दिसंबर को भारत बंद से दूरी बना ली है। इसके पीछे भारतीय किसान संघ की ओर से इसमें शामिल राजनीतिक पार्टियों को कारण बताया गया है। भारतीय किसान संघ का कहना है कि किसान संगठनों को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार के सामने रखनी चाहिए।

प्रदर्शन रहेगा जारी: फरीदकोट जिला प्रधान

फरीदकोट के ज़िला प्रधान बिंदर सिंह गोले वाला ने कहा, ‘कल बंद में सभी हमारा समर्थन कर रहे हैं। सभी अपने आप बाजार बंद करने के लिए कह रहे हैं सभी लोग इस बंद के लिए तैयार हैं वे जानते हैं कि किसान सही है इसलिए वो हमारा समर्थन कर रहे हैं। बंद के दौरान जरूरी सेवाओं पर छूट होगी।’ इससे पहले उन्‍होंने कहा था, ‘ 9 तारीख को हमारे पक्ष में फैसला आए चाहें नहीं, अगर आता है तो बहुत अच्छा है और अगर नहीं आता है तो हम ये सोच के नहीं आए थे कि हम घर वापस चले जाएंगे। हम यहीं संघर्ष करते रहेंगे। जब तक हम जीत नहीं जाते तब तक हम पीछे नहीं हटेंगे।’

केजरीवाल का समर्थन

किसानों द्वारा बुलाए गए 8 दिसंबर के भारत बंद को दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी समर्थन दिया है। दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Delhi CM Arvind Kejriwal) , उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और दिल्ली सरकार के अन्य मंत्रियों ने सिंघु बॉर्डर के पास गुरु तेग बहादुर मेमोरियल में किसानों से मुलाकात की और उनके लिए की गई व्यवस्थाओं का जायजा लिया। मुख्‍यमंत्री केजरीवाल ने कहा, ‘हम किसानों की सभी मांगों का समर्थन करते हैं। किसानों का मुद्दा और संघर्ष बिल्कुल जायज है। शुरू-शुरू में जब किसान सीमा पर आए थे तो केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस ने हमसे दिल्ली के नौ स्टेडियम को जेल बनाने की इजाजत मांगी थी। उस समय मेरे ऊपर बहुत दबाव डाला गया। उनकी पूरी योजना थी कि किसानों को दिल्ली आने देंगे और फिर उन्हें पकड़कर स्टेडियम में डाल देंगे और वो वहां पड़े रहेंगे।’

मायावती ने ट्वीट कर जताया अपना समर्थन

किसान नेता बलदेव सिंह यादव ने कहा, ‘यह आंदोलन केवल पंजाब के किसानों का नहीं है, बल्कि पूरे देश का है। हम अपने आंदोलन को मजबूत करने जा रहे हैं और यह पहले ही पूरे देश में फैल चुका है।’ उन्होंने सभी से बंद को शांतिपूर्ण बनाना सुनिश्चित करने की अपील करते हुए कहा, ‘चूंकि सरकार हमारे साथ ठीक से व्यवहार नहीं कर रही थी, इसलिए हमने भारत बंद का आह्वान किया।’ मायावती ने इस संबंध में ट्वीट किया और कहा, ‘तीनों कृषि कानूनों की वापसी को लेकर देश भर में किसान आंदोलन कर रहे हैं। इस क्रम में उन्‍होंने 8 दिसंबर को ‘भारत बंद’ का आह्वान किया है, इस बंद के लिए बसपा अपना समर्थन देती है और केंद्र से किसानों की मांगों को मानने की भी फिर अपील है।’

9 दिसंबर को केंद्र-किसानों की छठे दौर की वार्ता

दरअसल, शनिवार को केंद्र व किसानों के बीच पांचवे दौर की वार्ता असफल रही। किसानों को सरकार की ओर से विधेयक में संशोधन का भी प्रस्‍ताव दिया गया लेकिन वे मानने को तैयार नहीं हुए। किसान इन विधेयकों की पूरी तरह वापसी चाहते हैं। अब 9 दिसंबर , गुरुवार को केंद्र और किसानों के बीच जारी गतिरोध खत्‍म करने के लिए छठे दौर की वार्ता होने वाली है।

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