केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा… – Shaurya Times | शौर्य टाइम्स https://www.shauryatimes.com Latest Hindi News Portal Sat, 01 May 2021 08:29:13 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.2 केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया, राज्यों को कोरोना की दूसरी लहर के लिए तैयार रहने को कहा था https://www.shauryatimes.com/news/110350 Sat, 01 May 2021 08:29:13 +0000 http://www.shauryatimes.com/?p=110350 केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने राज्यों से कोरोना की दूसरी लहर के लिए तैयार रहने को कहा था। साथ ही सरकार इस बात को लेकर सतर्क थी कि पूरा देश तैयार रहे। सरकार ने कहा, ‘किसी संभावित दूसरी लहर के दौरान देश को किसी तरह की कमी से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने चार दिसंबर, 2020 (पहली लहर खत्म होने के बाद) को राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को राज्य एवं जिलावार कोविड बेड एवं अन्य जरूरतों के बारे में लिखा था। अदालत इस तथ्य से समझ सकती है कि केंद्र सरकार सतर्क थी।’

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने सतर्कता को लेकर रखा पक्ष

केंद्र ने बताया कि 27 फरवरी, 2021 को स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को सुझाव दिया था कि बचाव के कदमों में ढील न दें और उल्लंघन पर सख्ती से निपटें। राज्यों से कहा गया था कि आंकड़े बहुत अहम हैं, इसलिए समय पर व सही आंकड़े उपलब्ध कराएं। आक्सीजन को लेकर भी सरकार ने बताया कि राज्यों की कुल जरूरत 8,462 टन है और 8,410 टन आक्सीजन आवंटित की गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने 16 अप्रैल को 50 हजार टन आक्सीजन आयात का भी टेंडर जारी कर दिया था।

समय-समय पर राज्यों को दिए गए सुझावों की दी जानकारी

केंद्र सरकार ने कहा कि शुरुआती अनुमान के मुकाबले बाद में आक्सीजन की मांग अचानक बढ़ी। दिल्ली का संशोधित अनुमान 133 फीसद अधिक था और उत्तर प्रदेश का 100 फीसद। वैक्सीन को लेकर केंद्र ने कहा कि टीकाकरण सरकार की प्राथमिकता में है। रेमडेसिविर को घर में इलाज ले रहे लोगों के लिए इस्तेमाल की अनुमति देने के सवाल पर केंद्र सरकार ने कहा कि रेमडेसिविर केवल मेडिकल प्रिस्कि्रप्शन पर कोरोना के गंभीर मरीजों को दी जाती है। मेडिकल प्रोटोकॉल के हिसाब से इसके प्रयोग को सीमित रखना जरूरी है।

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केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा… https://www.shauryatimes.com/news/41696 Sat, 04 May 2019 07:12:06 +0000 http://www.shauryatimes.com/?p=41696 राफेल डील मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में ताजा हलफनामा दाखिल कर पुनर्विचार याचिका पर आगे सुनवाई का विरोध किया है. केंद्र ने हलफनामे में कहा है कि पुनर्विचार याचिकाओं पर आगे की सुनवाई का कोई आधार नहीं हैं, ऐसे में सभी याचिकाएं खारिज की जानी चाहिए. हलफनामे में सरकार ने कहा है कि सुरक्षा संबंधी गोपनीय दस्तावेजों के इस तरह सार्वजनिक खुलासे से देश के आस्तित्व पर खतरा हुआ है.

सुप्रीम कोर्ट के राफेल के गोपनीय दस्तावजों के परीक्षण के फैसले से रक्षा, बलों की तैनाती, परमाणु प्रतिष्ठानों, आतंकवाद निरोधक उपायों आदि से संबंधित गुप्त सूचनाओं का खुलासा होने की आशंका बढ़ गई है. हलफनामे में सरकार ने ये भी कहा है कि राफेल पुनर्विचार याचिकाओं के जरिए सौदे की चलती-फिरती जांच की कोशिश की गई.

मीडिया में छपे तीन आर्टिकल लोगों के विचार हैं ना कि सरकार का अंतिम फैसला. ये तीन लेख सरकार के पूरे आधिकारिक रुख को व्यक्त नहीं करते हैं. सरकार ने यह भी कहा है कि सीएजी ने राफेल के मूल्य संबंधी जानकारियों की जांच की है और यह 2.86% कम है.

दरअसल, मंगलवार को केंद्र सरकार की ओर से पेश अर्टनी जनरल केके वेणुगोपाल ने जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट से चार हफ्ते का समय मांगा था लेकिन कोर्ट ने शनिवार तक जवाब दाखिल करने का समय दिया था. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस आपत्ति को खारिज कर दिया था, जिसमें गोपनीय दस्तावेजों के आधार पर पुनर्विचार खारिज करने की मांग की गई थी. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस आपत्ति को खारिज कर दिया था, जिसमें गोपनीय दस्तावेजों के आधार पर पुनर्विचार खारिज करने की मांग की गई थी.

कोर्ट ने साफ किया था कि गोपनीय दस्तावेज के आधार पर आगे पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई जारी रहेगी. सरकार ने गोपनीय दस्तावेज के आधार पर पुनर्विचार खारिज करने की मांग की थी. दरअसल, 14 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की शुरुआती आपत्तियों (गोपनीयता, विशेषाधिकार, राष्ट्रीय सुरक्षा) पर आदेश सुरक्षित रख लिया था.

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में नया हलफनामा दाखिल कर कहा था कि केंद्र सरकार की बिना मंजूरी के संवेदनशील दस्तावेजों की फोटोकॉपी की गई. इन दस्तावेजोंकी अनाधिकृत फोटोकॉपी के जरिये की गई चोरी ने देश की सुरक्षा, सम्प्रभुता और दूसरे देशों के साथ दोस्ताना संबंधों को बुरी तरह प्रभावित किया है. केंद्र ने कहा था कि पुनर्विचार याचिका के साथ सलग्न दस्तावेज एयरक्राफ्ट की युद्ध क्षमता से जुड़े है. 

याचिकाकर्ताओं ने बेहद गोपीनाय जानकारी को लीक किया है. रक्षा मंत्रालय ने आगे हलफनामे में कहा था कि राफेल मामले में दायर पुनर्विचार याचिका सार्वजनिक रूप से सबको उपलब्ध है, हमारे प्रतिद्वंद्वी या दुश्मनों की भी इस तक पहुंच है. ये राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालना वाला है. आपको बता दें कि इस वक्त सुप्रीम कोर्ट राफेल डील के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है. याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण ने सौदे के बारे मे रक्षा मंत्रालय की उस फाइल नोटिंग को पेश किया जिसे हिन्दू अखबार ने छापा था, लेकिन अटार्नी जनरल ने इस पर आपत्ति जताई और कहा था कि ये चोरीकिया हुआ है जांच चल रही है मुकदमा किया जाएगा.

अटार्नी जनरल ने रक्षा मंत्रालय के नोट को संज्ञान मे लेने का विरोध किया था और कहा था कि यह गोपनीय दस्तावेज है.राफेल डील मामले में आप नेता संजय सिंह की पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार किया था और कहा था कि न्यायपालिका के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणीके चलते संजय सिंह की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई नहीं की जाएगी.

कोर्ट ने संजय सिंह से पूछा क्यों न आपके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई चलाई जाए? कोर्ट ने संजय सिंह से जवाब मांगा था. उधर, अर्टनी जनरल केके वेणुगोपाल ने कोर्ट बाताया था कि गोपनीय दस्तावेज लीक करने के मसले पर दो अखबारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे.

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