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	<title>कोविड-19 ने लगाया शरणार्थियों की पुनर्वास प्रक्रिया पर ब्रेक &#8211; Shaurya Times | शौर्य टाइम्स</title>
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		<title>कोविड-19 ने लगाया शरणार्थियों की पुनर्वास प्रक्रिया पर ब्रेक, दो दशकों में सबसे कम रहा आंकड़ा</title>
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		<pubDate>Sun, 22 Nov 2020 11:03:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दुनिया]]></category>
		<category><![CDATA[कोविड-19 ने लगाया शरणार्थियों की पुनर्वास प्रक्रिया पर ब्रेक]]></category>
		<category><![CDATA[दो दशकों में सबसे कम रहा आंकड़ा]]></category>
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					<description><![CDATA[इस वर्ष के शुरुआती 9 माह के दौरान पुनर्वासितों की संख्‍या में जबरदस्‍त गिरावट दर्ज की गई है। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) की एक ताजा रिपोर्ट में इस बात की जानकारी सामने आई है। यूएनएचसीआर के मुताबिक वर्ष 2019 के शुरुआती नौ माह में जहां 50 से अधिक शरणार्थियों को पुनर्वासित किया गया था &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>इस वर्ष के शुरुआती 9 माह के दौरान पुनर्वासितों की संख्&#x200d;या में जबरदस्&#x200d;त गिरावट दर्ज की गई है। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) की एक ताजा रिपोर्ट में इस बात की जानकारी सामने आई है। यूएनएचसीआर के मुताबिक वर्ष 2019 के शुरुआती नौ माह में जहां 50 से अधिक शरणार्थियों को पुनर्वासित किया गया था वहीं इस बार ये संख्&#x200d;या महज 15425 है। एजेंसी में इस काम का जिम्&#x200d;मा संभाल रही असिसटेंट हाई कमिश्&#x200d;नर गिलियन ट्रिग्&#x200d;गस का कहना है कि मौजूदा आंकड़े दो दशकों में सबसे कम हैं। ये संगठन के उन प्रयासों को जबरदस्&#x200d;त झटका है जो शरणार्थियों के तौर पर जीने वाले और जोखिमों का सामना करने वालों का जीवन बचाने में जुटा है।</p>
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<p><strong>इन्&#x200d;हें किया गया पुनर्वासित </strong></p>
<p>यूएनएचसीआर के आंकड़े बताते हैं कि मौजूदा वर्ष में सबसे अधिक सीरियाई नागरिकों को पुनर्वासित किया गया है, जो करीब 40 फीसद से कुछ अधिक हैं। इसके बाद अफ्रीकी देश कांगो के लोग हैं जिनकी तादाद करीब 16 फीसद है। इसके बाद आने वालों में इराक, म्&#x200d;यांमार और अफगानिस्&#x200d;तान से आए शरणार्थियों को पुनर्वासित किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार जनवरी-सितंबर के बीच करीब 15 हजार लोगों को हिंसा का शिकार होना पड़ा है। वहीं वैश्विक महामारी कोविड-19 की वजह पुनर्वासितों की संख्&#x200d;या में गिरावट की बात सामने आई है।</p>
<p><strong>कोविड-19 ने लगाया पुनर्वास पर ब्रेक </strong></p>
<p>इसमें कहा गया है कि इसकी वजह से लगे वैश्विक लॉकडाउन के चलते शरणार्थियों को दूसरे देशों में भेजना मुश्किल हो गया। इस वजह से इन्&#x200d;हें पुनर्वासित भी नहीं किया जा सका। लीबिया में इस महामारी की वजह से शरणार्थियों को दी जाने वाली सहायता में भी कमी आई है। रुआंडा में मौजूदा करीब 280 शरणार्थियों को इसकी वजह से इमरजेंसी सेंटर्स में भेजा गया। इनको अभी तक पुनर्वासित होने का इंतजार है। यहां पर ऐसे और 354 लोग भी है जो इसकी बाट जोह रहे हैं। इस वैश्विक समस्&#x200d;या के बाद 15 अक्&#x200d;टूबर से दोबारा पुनर्वासित प्रक्रिया को शुरू किया जा सका है।</p>
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<p><strong>पुनर्वास को तरजीह </strong></p>
<p>गौरतलब है कि लेबनान की राजधानी बेरूत के बंदरगाह पर हुए जबरदस्&#x200d;त धमाके की वजह से बड़ी संख्&#x200d;या में शरणार्थी शिविर प्रभावित हुए थे। लॉकडाउन खुलने के बाद कई देशों ने शरणार्थियों को पुनर्वासित करने को तरजीह दी है। अगस्&#x200d;त-सितंबर के दौरान लेबनान में मौजूद करीब एक हजार शरणार्थियों को 9 अलग-अलग देशों में पुनर्वासित करने के लिए भेजा गया है। शरणार्थियों पर निगाह रखने वाली यूएन की इस एजेंसी ने वर्ष 2020 में पुनर्वासित करने के लिए आए 31 हजार आवेदनों को 50 देशों में भेजा है। इसके बाद भी केवल आधों को ही सफलतापूर्वक पुनर्वासित किया गया है। जो शरणार्थियों को पुनर्वासित करने की प्रक्रिया में एक बड़ा झटका माना जा रहा है। यूएनएचसीआर ने विभिन्&#x200d;न देशों से इस प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया है, जिससे इन लोगों का जीवन बचाया जा सके।</p>
<p><strong>पुनर्वास की कानूनी प्रक्रिया</strong></p>
<p>गिलियन का कहना है कि यूएन एजेंसी के माध्&#x200d;यम से पुनर्वास के लिए किए गए आवेदनों से इन शरणार्थियों को जोखिम भरी गैरकानूनी यात्राओं से छुटकारा मिल जाता है। शरणार्थियों के आवेदनों को यूएनएचसीआर के माध्&#x200d;यम से विभिन्&#x200d;न देशों में भेजा जाता है। ये वो देश होते हैं जो इन्&#x200d;हें स्&#x200d;वीकार करते हैं। एक बार उस देश से सहमति हासित होने के बाद शरणार्थियों को वहां पर भेज दिया जाता है। आपको यहां पर ये भी बता दें कि यूएन जनरल असेंबली ने वर्ष 2018 में शरणार्थियों पर ग्&#x200d;लोबल कॉम्&#x200d;पैक्&#x200d;ट का अनुमोदन किया था। इसमें सभी देशों से इसका हिस्&#x200d;सा बनने की अपील भी की गई थी।</p>
<div class="relativeNews">
<p><strong>पूरा नहीं हुआ लक्ष्&#x200d;य </strong></p>
<p>एजेंसी के मुताबिक वर्ष 2019 में भी उसकी कोशिश दो करोड़ शरणार्थियों को विभिन्&#x200d;न देशों में पुनर्वासित करने की थी, लेकिन इसमें वो कामयाब नहीं हो सकी। एजेंसी के मुताबिक पूरे प्रयास के बाद भी हर वर्ष करीब एक फीसद ही शरणार्थियों को पुनर्वासित करना संभव होता है। मौजूदा समय में भी करीब 14 लाख से अधिक शरणार्थियों को पुनर्वासित किए जाने की जरूरत है। इनमें अफ्रीका में 6 लाख से अधिक, यूरोप में चार लाख से अधिक, मध्&#x200d;य पूर्व उत्&#x200d;तर अफ्रीका में करीब ढाई लाख शरणार्थी शामिल हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
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<div class="relativeNews"></div>
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