क्या यहां भी संयुक्त विपक्ष से मिलेगी बीजेपी को हार! – Shaurya Times | शौर्य टाइम्स https://www.shauryatimes.com Latest Hindi News Portal Thu, 14 Jun 2018 07:04:16 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.2 अब राज्यसभा के उपसभापति की लड़ाई, क्या यहां भी संयुक्त विपक्ष से मिलेगी बीजेपी को हार! https://www.shauryatimes.com/news/3391 Thu, 14 Jun 2018 07:04:16 +0000 http://www.shauryatimes.com/?p=3391 राज्यसभा के उप सभापति की लड़ाई में पहली बार संसद में बीजेपी को संयुक्त विपक्ष के गणित का सामना करना होगा. बीजेपी के पास राज्यसभा में सबसे ज्यादा सांसद हैं, लेकिन अगर विपक्ष एकजुट रहा तो उसे हार का सामना करना पड़ सकता है. ऐसा लग रहा है कि इस बार कोई गैर बीजेपी, गैर कांग्रेस सदस्य राज्यसभा का उपसभापति बन सकता है. राज्यसभा के उप सभापति की लड़ाई में पहली बार संसद में बीजेपी को संयुक्त विपक्ष के गणित का सामना करना होगा. बीजेपी के पास राज्यसभा में सबसे ज्यादा सांसद हैं, लेकिन अगर विपक्ष एकजुट रहा तो उसे हार का सामना करना पड़ सकता है. ऐसा लग रहा है कि इस बार कोई गैर बीजेपी, गैर कांग्रेस सदस्य राज्यसभा का उपसभापति बन सकता है.   राज्यसभा के मौजूदा उपसभापति पी.जे. कुरियन का कार्यकाल 30 जून को खत्म होने जा रहा है. अगर बीजेपी को हार मिली तो इससे मोदी सरकार के कार्यकाल के अंतिम साल में महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करा सकने की बीजेपी की क्षमता पर सवाल खड़े हो सकते हैं. विपक्ष अपना गणित लगा रहा है और ज्यादा से ज्यादा दलों को एकजुट करने की कोशिश हो रही है.  कांग्रेस को भी नहीं होगा फायदा  हालांकि इस कवायद में कांग्रेस को भी कोई फायदा नहीं मिलने वाला. अभी जो संकेत मिल रहे हैं उसके मुताबिक राज्यसभा में दूसरे सबसे बड़े दल कांग्रेस को भी अपना कैंडिडेट उतारने या उसे जिताने का मौका शायद ही मिले. ऐसे संकेत हैं कि तृणमूल कांग्रेस जैसे किसी क्षेत्रीय दल के कैंडिडेट को विपक्ष का समर्थन मिल सकता है. टीडीपी के एक नेता ने कहा, 'सब कुछ ठीक रहा तो टीएमसी के सुकेंदु रॉय सर्वसम्मति से विपक्ष के उम्मीदवार हो सकते हैं.'  राज्यसभा में एक विपक्षी दल के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, 'क्षेत्रीय दल कांग्रेस को मनाने की कोशिश कर रहे हैं कि वह उन पार्टियों को अपने साथ लाना सुनिश्चित करे जिनकी फिलहाल बीजेपी-कांग्रेस से संयुक्त दूरी है, ताकि विपक्ष में टूट न होने पाए. टीडीपी के प्रमुख चंद्रबाबू नायडू सहित कई क्षेत्रीय दलों के नेताओं से फोन से संपर्क कर रणनीति बनाई जा रही है.  इस तरह का हो सकता है गणित  राज्यसभा में फिलहाल कुल 241 सांसद हैं. किसी भी कैंडिडेट को जीतने के लिए कम से कम 121 वोटों की जरूरत होगी, यदि सभी सदस्य वोट करते हैं तो. फिलहाल बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के कुल मिलाकर 106 वोट ही हैं. बीजेपी के 69 सदस्य हैं. कांग्रेस गठबंधन के पास भी महज 86 वोट हैं. कांग्रेस के कुल 51 सदस्य हैं. ऐसे में टीएमसी जैसे क्षेत्रीय दलों की भूमिका बढ़ जाती है. अपनी ताकत को देखते हुए ही क्षेत्रीय दल एक गैर भाजपा, गैर सदस्य को राज्यसभा का उपसभापति बनाने के लिए जुट रहे हैं.  टीएमसी के पास राज्यसभा में 13 सदस्य, आम आदमी पार्टी के 3 सदस्य, टीडीपी के 6 सदस्य, सीपीएम के 6 सदस्य, आईएनएलडी का एक सदस्य है. इस गुट को एक निर्दलीय का भी समर्थन मिल सकता है जिससे कुल 30 वोट हो जाते हैं. यानी अगर यह गुट एकजुट होता है और कांग्रेस गठबंधन का साथ मिलता है तो भी इसे जीत नहीं मिलेगी. ऐसे में अकेले चलने वाले उन दलों की भूमिका भी बढ़ गई है जिनके पास कुल 17 वोट हैं और इन पर दोनों गुटों की नजर हैं. इनमें बीजेडी के पास 9, वाईएसआर कांग्रेस के पास 2 और टीआरएस के पास 6 वोट हैं.   अगर बीजू जनता दल हाल के कई वाकयों की तरह इस चुनाव में भी राज्यसभा में अनुपस्थित रहता है, तो वोट की संख्या घटकर 232 रह जाएगी, जिससे जीत के लिए जरूरी 116 वोट विपक्ष आसानी से जुटा सकता है.   बीजेपी के साथ सहयोगी दलों और निर्दलियों के साथ मिलाकर फिलहाल महज 108 वोट ही जाते दिख रहे हैं. सू्त्र बता रहे हैं कि अमित शाह राज्यसभा के उपसभापति सीट को बीजेपी के पास बनाए रखने के लिए अपने दांव खेलने में लग गए हैं. उन्होंने शिवसेना को ऑफर दिया है कि वह अपने कैंडिडेट खड़े करे जिसे बीजेपी जिताएगी. इस तरह से एक तीर से दो शिकार हो सकता है, राज्यसभा का कैंडिडेट भी जीतेगा और रूठे सहयोगी को भी मना लिया जाएगा.

राज्यसभा के मौजूदा उपसभापति पी.जे. कुरियन का कार्यकाल 30 जून को खत्म होने जा रहा है. अगर बीजेपी को हार मिली तो इससे मोदी सरकार के कार्यकाल के अंतिम साल में महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करा सकने की बीजेपी की क्षमता पर सवाल खड़े हो सकते हैं. विपक्ष अपना गणित लगा रहा है और ज्यादा से ज्यादा दलों को एकजुट करने की कोशिश हो रही है.

कांग्रेस को भी नहीं होगा फायदा

हालांकि इस कवायद में कांग्रेस को भी कोई फायदा नहीं मिलने वाला. अभी जो संकेत मिल रहे हैं उसके मुताबिक राज्यसभा में दूसरे सबसे बड़े दल कांग्रेस को भी अपना कैंडिडेट उतारने या उसे जिताने का मौका शायद ही मिले. ऐसे संकेत हैं कि तृणमूल कांग्रेस जैसे किसी क्षेत्रीय दल के कैंडिडेट को विपक्ष का समर्थन मिल सकता है. टीडीपी के एक नेता ने कहा, ‘सब कुछ ठीक रहा तो टीएमसी के सुकेंदु रॉय सर्वसम्मति से विपक्ष के उम्मीदवार हो सकते हैं.’

राज्यसभा में एक विपक्षी दल के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘क्षेत्रीय दल कांग्रेस को मनाने की कोशिश कर रहे हैं कि वह उन पार्टियों को अपने साथ लाना सुनिश्चित करे जिनकी फिलहाल बीजेपी-कांग्रेस से संयुक्त दूरी है, ताकि विपक्ष में टूट न होने पाए. टीडीपी के प्रमुख चंद्रबाबू नायडू सहित कई क्षेत्रीय दलों के नेताओं से फोन से संपर्क कर रणनीति बनाई जा रही है.

इस तरह का हो सकता है गणित

राज्यसभा में फिलहाल कुल 241 सांसद हैं. किसी भी कैंडिडेट को जीतने के लिए कम से कम 121 वोटों की जरूरत होगी, यदि सभी सदस्य वोट करते हैं तो. फिलहाल बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के कुल मिलाकर 106 वोट ही हैं. बीजेपी के 69 सदस्य हैं. कांग्रेस गठबंधन के पास भी महज 86 वोट हैं. कांग्रेस के कुल 51 सदस्य हैं. ऐसे में टीएमसी जैसे क्षेत्रीय दलों की भूमिका बढ़ जाती है. अपनी ताकत को देखते हुए ही क्षेत्रीय दल एक गैर भाजपा, गैर सदस्य को राज्यसभा का उपसभापति बनाने के लिए जुट रहे हैं.

टीएमसी के पास राज्यसभा में 13 सदस्य, आम आदमी पार्टी के 3 सदस्य, टीडीपी के 6 सदस्य, सीपीएम के 6 सदस्य, आईएनएलडी का एक सदस्य है. इस गुट को एक निर्दलीय का भी समर्थन मिल सकता है जिससे कुल 30 वोट हो जाते हैं. यानी अगर यह गुट एकजुट होता है और कांग्रेस गठबंधन का साथ मिलता है तो भी इसे जीत नहीं मिलेगी. ऐसे में अकेले चलने वाले उन दलों की भूमिका भी बढ़ गई है जिनके पास कुल 17 वोट हैं और इन पर दोनों गुटों की नजर हैं. इनमें बीजेडी के पास 9, वाईएसआर कांग्रेस के पास 2 और टीआरएस के पास 6 वोट हैं. 

अगर बीजू जनता दल हाल के कई वाकयों की तरह इस चुनाव में भी राज्यसभा में अनुपस्थित रहता है, तो वोट की संख्या घटकर 232 रह जाएगी, जिससे जीत के लिए जरूरी 116 वोट विपक्ष आसानी से जुटा सकता है. 

बीजेपी के साथ सहयोगी दलों और निर्दलियों के साथ मिलाकर फिलहाल महज 108 वोट ही जाते दिख रहे हैं. सू्त्र बता रहे हैं कि अमित शाह राज्यसभा के उपसभापति सीट को बीजेपी के पास बनाए रखने के लिए अपने दांव खेलने में लग गए हैं. उन्होंने शिवसेना को ऑफर दिया है कि वह अपने कैंडिडेट खड़े करे जिसे बीजेपी जिताएगी. इस तरह से एक तीर से दो शिकार हो सकता है, राज्यसभा का कैंडिडेट भी जीतेगा और रूठे सहयोगी को भी मना लिया जाएगा.

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