खुद इतना बदल गया – Shaurya Times | शौर्य टाइम्स https://www.shauryatimes.com Latest Hindi News Portal Thu, 30 Aug 2018 08:23:30 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.2 केजरीवालः एक नायक जो बदलने आया था राजनीति को, खुद इतना बदल गया https://www.shauryatimes.com/news/9828 Thu, 30 Aug 2018 08:23:30 +0000 http://www.shauryatimes.com/?p=9828 दशकों से भारतीय राजनीति में जाति का एक महत्वपूर्ण स्थान रहा है। राज्यों की राजनीति के परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो राजनीतिक पार्टियों ने जाति को एक मुद्दा बनाकर अपने-अपने हित साधे हैं। ऐसे में अलग तरह की राजनीति करने का दावा कर दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने वाली आम आदमी पार्टी (AAP) और इसके मुखिया अरविंद केजरीवाल अब उसी दलदल में धंसते-फंसते नजर आ रहे हैं, जैसा वह दूसरे दलों के बारे में कहते थे। दरअसल, 2015 में मुख्यमंत्री बनने के बाद अरविंद केजरीवाल ने कुछ ऐसे अजीब और जनमानस की सोच के विपरीत फैसले लिए, जिनसे उनमें वैकल्पिक राजनीति की उम्मीद देख रहे लोगों का विश्वास डगमगाने लगा था। तकरीबन तीन साल बाद केजरीवाल की नायक वाली छवि काफी धूमिल हो चुकी है।दशकों से भारतीय राजनीति में जाति का एक महत्वपूर्ण स्थान रहा है। राज्यों की राजनीति के परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो राजनीतिक पार्टियों ने जाति को एक मुद्दा बनाकर अपने-अपने हित साधे हैं। ऐसे में अलग तरह की राजनीति करने का दावा कर दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने वाली आम आदमी पार्टी (AAP) और इसके मुखिया अरविंद केजरीवाल अब उसी दलदल में धंसते-फंसते नजर आ रहे हैं, जैसा वह दूसरे दलों के बारे में कहते थे। दरअसल, 2015 में मुख्यमंत्री बनने के बाद अरविंद केजरीवाल ने कुछ ऐसे अजीब और जनमानस की सोच के विपरीत फैसले लिए, जिनसे उनमें वैकल्पिक राजनीति की उम्मीद देख रहे लोगों का विश्वास डगमगाने लगा था। तकरीबन तीन साल बाद केजरीवाल की नायक वाली छवि काफी धूमिल हो चुकी है।  जाति-क्षेत्रवाद को ध्यान में रख केजरीवाल ने दिल्ली में बांटे थे टिकट खासकर धर्म और जाति की राजनीति से खुद को दूर रखने का दावा करने वाली AAP में हालात शायद इससे जुदा दिख रहे हैं। आतिशी मर्लेना से पहले आशुतोष के साथ भी ऐसी ही घटना हो चुकी है। AAP को कुछ दिनों पहले अलविदा करने वाले आशुतोष ने खुद यह बात स्वीकार की है। आशुतोष ने ट्वीट किया है कि उनके 23 वर्ष के पत्रकारिता के करियर में उन्हें कभी जाति के प्रयोग की जरूरत नहीं पड़ी, लेकिन पार्टी की तरफ से जब चुनाव लड़ना पड़ा तो मुझे इसके लिए कहा गया। मेरे विरोध के बावजूद मेरा सरनेम जोड़ा गया। जाहिर है कि ऐसा पार्टी आलाकमान की सहमति से ही हुआ होगा।    –– ADVERTISEMENT ––     दो 'आप' विधायकों के बीच बैठे थे अंशु प्रकाश, अचानक बरसने लगे थप्पड़ व घूंसे यह भी पढ़ें आशतोष के ट्वीट ने खोली AAP की पोल दरअसल, AAP नेता आशुतोष के ट्वीट ने अरविंद केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में अब एक सवाल यह भी उठ रहा है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में क्या अरविंद केजरीवाल ने जातीय समीकरणों को ध्यान में रखकर टिकट बांटे थे।  दरअसल, यह सवाल इसलिए भी उठा है कि आशुतोष ने खुद ट्वीट कर कहा है कि दिल्ली की चांदनी चौक सीट पर चुनाव प्रचार के दौरान उनसे सरनेम लगाने के लिए कहा गया था। यानी चांदनी चौक सीट पर एक खास जाति को ध्यान में रखकर ही आशुतोष को अरविंद केजरीवाल ने टिकट दिया होगा।   सीएम के एक गलत फैसले से दिल्ली को 800 करोड़ से अधिक का घाटा, HC भी उठा चुका सवाल यह भी पढ़ें   कुछ ऐसा ही हाल नई दिल्ली सीट का भी लगता है। नई दिल्ली लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी मीनाक्षी लेखी ने आम आदमी पार्टी के अशीष खेतान को तकरीबन 1 लाख 33 हजार वोटों से हराकर ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। यहां पर पंजाबी मतदाओं की संख्या ज्यादा है, इसीलिए शायद आशीष खेतान को टिकट दिया गया था। आशीष खेतान पंजाबी समुदाय से आते हैं। हालांकि, उन्होंने हाल ही में AAP से इस्तीफा दिया है।

जाति-क्षेत्रवाद को ध्यान में रख केजरीवाल ने दिल्ली में बांटे थे टिकट
खासकर धर्म और जाति की राजनीति से खुद को दूर रखने का दावा करने वाली AAP में हालात शायद इससे जुदा दिख रहे हैं। आतिशी मर्लेना से पहले आशुतोष के साथ भी ऐसी ही घटना हो चुकी है। AAP को कुछ दिनों पहले अलविदा करने वाले आशुतोष ने खुद यह बात स्वीकार की है। आशुतोष ने ट्वीट किया है कि उनके 23 वर्ष के पत्रकारिता के करियर में उन्हें कभी जाति के प्रयोग की जरूरत नहीं पड़ी, लेकिन पार्टी की तरफ से जब चुनाव लड़ना पड़ा तो मुझे इसके लिए कहा गया। मेरे विरोध के बावजूद मेरा सरनेम जोड़ा गया। जाहिर है कि ऐसा पार्टी आलाकमान की सहमति से ही हुआ होगा। 

आशतोष के ट्वीट ने खोली AAP की पोल
दरअसल, AAP नेता आशुतोष के ट्वीट ने अरविंद केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में अब एक सवाल यह भी उठ रहा है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में क्या अरविंद केजरीवाल ने जातीय समीकरणों को ध्यान में रखकर टिकट बांटे थे।

दरअसल, यह सवाल इसलिए भी उठा है कि आशुतोष ने खुद ट्वीट कर कहा है कि दिल्ली की चांदनी चौक सीट पर चुनाव प्रचार के दौरान उनसे सरनेम लगाने के लिए कहा गया था। यानी चांदनी चौक सीट पर एक खास जाति को ध्यान में रखकर ही आशुतोष को अरविंद केजरीवाल ने टिकट दिया होगा।

कुछ ऐसा ही हाल नई दिल्ली सीट का भी लगता है। नई दिल्ली लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी मीनाक्षी लेखी ने आम आदमी पार्टी के अशीष खेतान को तकरीबन 1 लाख 33 हजार वोटों से हराकर ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। यहां पर पंजाबी मतदाओं की संख्या ज्यादा है, इसीलिए शायद आशीष खेतान को टिकट दिया गया था। आशीष खेतान पंजाबी समुदाय से आते हैं। हालांकि, उन्होंने हाल ही में AAP से इस्तीफा दिया है।

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