जय श्रीराम ने पतंग उड़ाई – Shaurya Times | शौर्य टाइम्स https://www.shauryatimes.com Latest Hindi News Portal Sun, 13 Jan 2019 06:54:07 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.2 जय श्रीराम ने पतंग उड़ाई https://www.shauryatimes.com/news/27449 Sun, 13 Jan 2019 06:54:07 +0000 http://www.shauryatimes.com/?p=27449 संक्रांति का माहौल है और इस समय पूरे देश में पतंगबाजी का मजा लिया जाता है। पतंग का इतिहास वैसे तो बहुत पुराना नहीं है लेकिन पुराणों में एक वर्णन ऐसा भी आता है जब श्रीराम ने भी पतंग उड़ाई थी। ये घटना रामचरितमानस के बालकाण्ड में वर्णित है। कथा इस प्रकार है कि श्रीराम और उनके तीनों भाई बालक थे और महाबली हनुमान भी बालरूप में श्रीराम के दर्शनों को अयोध्या आये हुए थे। संक्रांति के दिन सभी बालकों ने पतंग उड़ाने का मन बनाया। श्रीराम अपने भाइयों और हनुमान के साथ खुले मैदान में आ गए और श्रीराम ने अपनी पतंग उड़ाई। उन्होंने अपनी पतंग की इतनी ढील दी कि वो स्वर्गलोक तक जा पहुँची। इस बारे में तुलसीदास जी लिखते हैं:

राम इक दिन चंग उड़ाई।
इन्द्रलोक में पहुंची जाई।।

उधर इंद्रलोक में इंद्र के पुत्र जयंत की पत्नी ने अपनी मुंडेर पर एक सुन्दर पतंग देखा तो उसने सोचा कि इतने संदर पतंग को उड़ाने वाला स्वयं कितना सुंदर होगा। ये सोच कर कि इस पतंग को लेने के लिए इसे उड़ने वाला अवश्य आएगा, उसने उस पतंग को पकड़ लिया। इसके बारे में तुलसीदास कहते हैं:
जासु चंग अस सुन्दरताई।
सो पुरुष जग में अधिकाई।।

जब श्रीराम ने पतंग को खींचना चाहा तो पाया कि पतंग अटक गयी है। तब उन्होंने हनुमानजी से कहा कि ये पता करें कि ये पतंग कहाँ अटकी है। तब बजरंगबली उस पतंग की डोर पकड़ कर ऊपर की ओर चले ताकि इसका पता चला सकें कि ये पतंग कहाँ अटकी है। उस पतंग की डोर को थामे वो स्वर्गलोक तक पहुँच गए। वहाँ पहुँच कर उन्होंने देखा कि एक सुन्दर स्त्री श्रीराम के पतंग को पकड़ कर खड़ी है। उन्होंने पूछा कि वे कौन है और इस पतंग को पकड़ कर क्यों खड़ी है? तब उसने कहा कि वो देवराज इंद्र की पुत्रवधु है। उसने पूछा कि ये पतंग किसकी है? तब पवनपुत्र ने बताया कि ये पतंग श्रीराम की है। तब जयंत की पत्नी ने कहा कि वे श्रीराम के दर्शन करना चाहती है और जब तक उसे उनके दर्शन नहीं होंगे तब तक वो पतंग नहीं छोड़ेगी। उसकी बात सुनकर हनुमान वापस आये और सारी बातें श्रीराम को बताई। तब श्रीराम ने कहा कि वे देवराज की पुत्रवधु को कहें कि वे उन्हें चित्रकूट में अवश्य दर्शन देंगे। तब हनुमान वापस इंद्रलोक आये और उन्होंने उसे बताया कि श्रीराम उन्हें चित्रकूट में दर्शन देंगे। ये सुनकर ही जयंत की पत्नी ने अंततः पतंग छोड़ दी। इसके बारे में तुलसीदास जी कहते हैं:

 

तिन तब सुनत तुरंत ही, दीन्ही छोड़ पतंग।
खेंच लइ प्रभु बेग ही, खेलत बालक संग।।
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