जवानी जानेमन की एक्ट्रेस अलाया फर्नीचरवाला ने इस वजह से बदल लिया था अपना नाम – Shaurya Times | शौर्य टाइम्स https://www.shauryatimes.com Latest Hindi News Portal Sat, 18 Jan 2020 10:39:41 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.2 जवानी जानेमन की एक्ट्रेस अलाया फर्नीचरवाला ने इस वजह से बदल लिया था अपना नाम https://www.shauryatimes.com/news/74661 Sat, 18 Jan 2020 10:39:41 +0000 http://www.shauryatimes.com/?p=74661 दुनिया में दिन पर दिन कचरा बढ़त जा रहा है और इसका प्रबंध करने में भी काफी दिक्कते आ रही है. कचरे के प्रबंधन की चुनौती एक ऐसी व्यापक समस्या बन गई है, जिससे दुनिया के कई देश परेशान हैं. इसके रीसाइकिल के लिए हर जगह नए से नए तकनीक को इस्तेमाल में लाया जा रहा है. इसी दौरान कनाडा की एक कंपनी ने प्लास्टिक कचरे के रीसाइकिल का एक बहुत ही बढ़िया विकल्प तैयार किया है.

यह कंपनी प्लास्टिक के कचरे को रीसाइकिल कर लकड़ी का रूप दे रही है. कनाडा के नोवा स्कॉटिया प्रांत के हॉलीफैक्स में कुल 80 फीसदी प्लास्टिक कचरे को केवल इसी एक कंपनी के द्वारा रीसाइकिल किया जा रहा है. गुडवुड नामक यह कंपनी प्लास्टिक के कचरे को लकड़ी जैसा रूप दे रही है, जिसका इस्तेमाल बिल्डिंग ब्लॉक बनाने में किया जा रहा है. लकड़ी के तरह ही इन ब्लॉक में भी ड्रिल किया जा सकता है और उनमें कील ठोकी जा सकती है.

हॉलीफैक्स के प्रांतीय विधायक कंपनी के इस प्रयास से काफी खुश हैं और वे इसे दोहरी सफलता मान रहे हैं. प्लास्टिक कचरे के निपटान के साथ-साथ लकड़ी का विकल्प मिलने से पेड़ों की कटाई पर भी रोक लग जाएगी. पीछले साल दिसंबर में ही इस कंपनी ने अपना नाम गुडवुड रखा है. इस कंपनी ने सोबे ग्रॉसरी स्टोर के साथ मिलकर एक ऐसा पार्किंग एरिया तैयार किया था, जो पूरी तरह से प्लास्टिक के कचरे से बना हुआ था. कंपनी के पास आने वाला अधिकतर कचरा प्लास्टिक की थैलियों के रूप में आता है. इसके अलावा यह कंपनी प्लास्टिक के जार व पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक को भी रीसाइकिल करती है. और उस प्लास्टिक का काया पलट कर देते है.

गुडवुड कंपनी के उपाध्यक्ष माइक चैसी के अनुसार उनके बनाए उत्पाद से पार्क की बेंच से लेकर पिकनिक टेबल तक तैयार किए जा सकते हैं. कंपनी इस प्रयास में है कि वह अपने बिजनेस मॉडल को अन्य क्षेत्रों में भी फैलाए. माइक चैसी बताते हैं कि प्लास्टिक के इस्तेमाल को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता है. ऐसे में हमें ऐसे तरीके तलाशने हैं, जिससे यह कचरा संसाधन बन जाए.

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