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	<title>जानिए बद्रीनाथ की यह सबसे रोचक कथा &#8211; Shaurya Times | शौर्य टाइम्स</title>
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		<title>शुरू हुई चारधाम यात्रा, जानिए बद्रीनाथ की यह सबसे रोचक कथा</title>
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		<pubDate>Wed, 08 May 2019 05:47:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[जानिए बद्रीनाथ की यह सबसे रोचक कथा]]></category>
		<category><![CDATA[शुरू हुई चारधाम यात्रा]]></category>
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					<description><![CDATA[आप सभी को बता दें कि उत्‍तराखंड की चारधाम यात्रा का हुआ शुभारम्भ. वहीं गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलेंगे और उसके बाद 9 मई को केदारनाथ और 10 मई को बद्रीनाथ के कपाट खुलेंगे. इसी के साथ कहा गया है कि चारों धामों का अपना-अपना पौराणिक महत्‍व बताया गया है और इन्‍हीं में से &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>आप सभी को बता दें कि उत्&#x200d;तराखंड की चारधाम यात्रा का हुआ शुभारम्भ. वहीं गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलेंगे और उसके बाद 9 मई को केदारनाथ और 10 मई को बद्रीनाथ के कपाट खुलेंगे. इसी के साथ कहा गया है कि चारों धामों का अपना-अपना पौराणिक महत्&#x200d;व बताया गया है और इन्&#x200d;हीं में से एक ब्रदीनाथ भी है. जी हाँ, बद्रीनाथ के विषय में एक रोचक कथा प्रचलित है जो हम आपको बताने जा रहे हैं. कहा जाता है पहले यह शिव की भूमि थी और बाद में यह श्री हरि विष्&#x200d;णु का निवास स्&#x200d;थान बन गया. वैसे आपको यह जानने के बाद हैरानी होगी कि यह कैसे हुआ&#8230;? आइए जानते हैं इसके पीछे की कथा.<img fetchpriority="high" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-42092" src="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2019/05/badrinath3_5cd169dd4754f.jpg" alt="" width="789" height="450" srcset="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2019/05/badrinath3_5cd169dd4754f.jpg 789w, https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2019/05/badrinath3_5cd169dd4754f-300x171.jpg 300w, https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2019/05/badrinath3_5cd169dd4754f-768x438.jpg 768w" sizes="(max-width: 789px) 100vw, 789px" /></strong></p>
<p><strong>कथा &#8211; श्री विष्&#x200d;णु की इस भूमि में यानी कि बद्रीनाथ में पहले भगवान भोलेनाथ का निवास स्&#x200d;थान था. शिव यहां पर अपने परिवार के साथ वास करते थे. लेकिन एक दिन भगवान विष्&#x200d;णु जब ध्&#x200d;यान करने के लिए स्&#x200d;थान की खोज में थे तो उन्&#x200d;हें यह स्&#x200d;थान दिखाई दिया. यहां के वातावरण को देखकर वह मोहित हो गए. लेकिन वह जानते थे कि यह तो उनके आराध्&#x200d;य का निवास स्&#x200d;थान है. ऐसे में वह उस जगह पर कैसे निवास करते. तभी प्रभु के मन में लीला का विचार आया और उन्&#x200d;होंने एक बालक का रूप लेकर जोर-जोर से रोना शुरू कर दिया. कुछ ही देर में मां पार्वती की नजर उनपर पड़ी तो वह बालक को चुप कराने का प्रयास करने लगीं.</strong></p>
<p><strong>लेकिन वह तो चुप ही नहीं हो रहा था. इसके बाद माता उसे लेकर जैसे ही भीतर प्रवेश करने लगी भोलेनाथ समझ गए कि यह तो श्री हरि हैं. उन्&#x200d;होंने मां पार्वती से कहा कि बालक को छोड़ दें वह अपने आप ही चला जाएगा. लेकिन मां नहीं मानी और उसे सुलाने के लिए भीतर लेकर चली गईं. जब बालक सो गया तो मां पार्वती बाहर आ गईं. इसके बाद शुरू हुई विष्&#x200d;णु की एक और लीला. उन्&#x200d;होंने भीतर से दरवाजे को बंद कर लिया और जब भोलेनाथ लौटे तो भगवान विष्&#x200d;णु ने कहा कि यह स्&#x200d;थान मुझे बहुत पसंद आ गया है.</strong></p>
<p><strong>अब आप यहां से केदारनाथ जाएं, मैं इसी स्&#x200d;थान पर अपने भक्&#x200d;तों को दर्शन दूंगा. इस तरह शिवभूमि भगवान विष्&#x200d;णु का धाम बद्रीनाथ कहलाई और भोले केदारनाथ में निवास करने लगे. मान्&#x200d;यता है कि एक बार देवी लक्ष्&#x200d;मी श्री हरि से रूठकर अपने मायके चली गईं. इसके बाद उन्&#x200d;हें मनाने के लिए भगवान विष्&#x200d;णु ने तप करना शुरू कर दिया. इसके बाद देवी लक्ष्&#x200d;मी की नाराजगी दूर हुई और वह भगवान को ढूंढ़ते हुए उसी स्&#x200d;थान पर पहुंची जहां वह तप में लीन थे. उन्&#x200d;होंने देखा कि श्री विष्&#x200d;णु तो बेर के पेड़ पर बैठकर तपस्&#x200d;या कर रहे हैं. इसके बाद मां लक्ष्&#x200d;मी ने भगवान विष्&#x200d;णु को ‘बद्रीनाथ’ का नाम दिया. इसके बाद विष्&#x200d;णुधाम बद्रीनाथ के नाम से जाना जाने लगा.</strong></p>
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