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	<title>दुनियाभर में बिखरेगी उत्तराखंडी इत्र और सुगंधित तेलों की महक &#8211; Shaurya Times | शौर्य टाइम्स</title>
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		<title>दुनियाभर में बिखरेगी उत्तराखंडी इत्र और सुगंधित तेलों की महक</title>
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		<pubDate>Mon, 07 Jan 2019 07:43:57 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[देवभूमि में तैयार होने वाले इत्र और सुगंधित तेलों की महक अब दुनियाभर में बिखरेगी। राज्य में सगंध फसलों को बढ़ावा देने के आए उत्साहजनक नतीजों और इस क्षेत्र में अपार संभावनाओं को देखते हुए अब सरकार यहां खुद इत्र फैक्ट्री लगाने जा रही है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) में इसके &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>देवभूमि में तैयार होने वाले इत्र और सुगंधित तेलों की महक अब दुनियाभर में बिखरेगी। राज्य में सगंध फसलों को बढ़ावा देने के आए उत्साहजनक नतीजों और इस क्षेत्र में अपार संभावनाओं को देखते हुए अब सरकार यहां खुद इत्र फैक्ट्री लगाने जा रही है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) में इसके लिए नौ करोड़ की राशि मंजूर की है।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="aligncenter  wp-image-26513" src="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2019/01/download-10.jpg" alt="" width="455" height="307" /></p>
<p>देहरादून के सेलाकुई स्थित सगंध पौधा केंद्र (कैप) में इसकी स्थापना के मद्देनजर कवायद शुरू कर दी गई है। फैक्ट्री में उत्पादित होने वाले इत्र व सुगंधित तेलों को एक्सपोर्ट भी किया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से जहां किसानों को अधिक लाभ मिलेगा, वहीं एरोमा सेक्टर में बूम आएगा। राज्य में घटती कृषि विकास दर और विभिन्न कारणों के चलते घटती कृषि भूमि ने सरकार की पेशानी पर बल डाले हैं। राज्य में बंजर भूमि का रकबा 3.66 लाख हेक्टेयर के करीब है।</p>
<p>इसे देखते हुए सगंध खेती (सुगंध देने वाले पौधे) को प्रोत्साहित किया गया। इसके बेहतर नतीजे आए हैं। राज्यभर में 18 हजार से अधिक किसान सगंध खेती से जुड़े हैं। यहां होने वाले सुगंधित तेल अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर भी खरे उतरे हैं। इस सबके मद्देनजर मौजूदा सरकार ने प्रदेश में सगंध खेती को बढ़ावा देने के साथ ही यहां की सुगंध को देश-दुनिया में फैलाने की ठानी है।</p>
<p>इस क्रम में राज्य की ओर से भेजे गए इत्र फैक्ट्री के प्रस्ताव को केंद्र ने न सिर्फ मंजूरी दी, बल्कि इसके लिए नौ करोड़ की राशि भी आरकेवीवाई के तहत मंजूर कर दी है। सगंध पौधा केंद्र में करीब 15 बीघा भूमि में इत्र फैक्ट्री की स्थापना को खाका खींच लिया गया है। केंद्र के निदेशक डॉ. नृपेंद्र चौहान के मुताबिक अभी तक लेमनग्रास, पामारोजा, मिंट, तुलसी, गुलाब जैसी फसलों का हाइड्रो स्टीम डिस्टिलेशन (आसवन सयंत्र) से ही तेल निकाला जा रहा था।</p>
<p>आधुनिक इकाई न होने के कारण सुगंधबाला, बच, कैमोमाइल, तिमूर समेत अन्य फसलों से इत्र व सुगंधित तेल का उत्पादन नहीं हो पा रहा था। इसी के मद्देनजर इत्र फैक्ट्री लगाने का निश्चय किया गया। डॉ.चौहान के अनुसार इत्र फैक्ट्री में सभी अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी। इसमें इत्र भी तैयार होगा और सुगंधित तेल भी। साथ ही उन सभी क्षेत्रों में आधुनिक आसवन सयंत्र लगाए जाएंगे, जहां सगंध खेती हो रही है। उन्होंने कहा कि इससे जहां सगंध खेती कर रहे किसानों को उत्पाद के अधिक दाम मिलेंगे, वहीं इस खेती को बढ़ावा मिलेगा और ज्यादा किसान इससे जुड़ेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि मार्च अथवा अपै्रल से फैक्ट्री स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।</p>
<p><strong>राज्य में एरोमा सेक्टर में हैं अपार संभावनाएं</strong></p>
<p>सुबोध उनियाल (कृषि मंत्री, उत्तराखंड) का कहना है कि राज्य में एरोमा सेक्टर में अपार संभावनाएं हैं। एरोमा का अंतर्राष्ट्रीय मार्केट है। इस सबके मद्देनजर ही इत्र फैक्ट्री स्थापित की जा रही है। इत्र व सुगंधित तेलों को जहां देश-दुनिया में एक्सपोर्ट किया जा सकेगा, वहीं किसानों की आय दोगुना करने में भी मदद मिलेगी। यही नहीं, बड़ी संख्या में किसानों को सगंध खेती से जोड़ने की दिशा में भी सरकार काम कर रही है।</p>
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