पापांकुशा एकादशी पर इस तरह करें पूजा – Shaurya Times | शौर्य टाइम्स https://www.shauryatimes.com Latest Hindi News Portal Tue, 27 Oct 2020 07:06:11 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.2 पापांकुशा एकादशी पर इस तरह करें पूजा, खत्म होंगे कई पीढ़ियों के पाप https://www.shauryatimes.com/news/88383 Tue, 27 Oct 2020 07:06:11 +0000 http://www.shauryatimes.com/?p=88383 व्रतों में प्रमुख व्रत नवरात्रि, पूर्णिमा, अमावस्या तथा ग्यारस के हैं। उसमे भी सबसे बड़ा व्रत ग्यारस का माना जाता है। चन्द्रमा की स्थिति की वजह से व्यक्ति की मानसिक तथा शारीरिक हालत ख़राब और अच्छी होती है। ऐसी अवस्था में ग्यारस व्रत से चन्द्रमा के हर खराब असर को रोका जा सकता है। यहां तक कि ग्रहों के प्रभाव को भी बहुत हद तक कम किया जा सकता है, क्योंकि ग्यारस व्रत का सीधा असर मन तथा शरीर दोनों पर पड़ता है। इसके अतिरिक्त एकादशी के व्रत से अशुभ संस्कारों को भी समाप्त किया जा सकता है।

क्यों महत्वपूर्ण है पापांकुशा एकादशी?
वैसे तो प्रत्येक ग्यारस अपने आप में अहम है, किन्तु पापांकुशा एकादशी खुद के साथ साथ दूसरों को भी फायदा पंहुचाती है। इस एकादशी पर भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा होती है। पापांकुशा एकादशी के व्रत से मन शुद्ध होता है। इंसान के पापों का प्रायश्चित होता है। साथ-साथ माता-पिता तथा मित्र की पीढ़ियों को भी मुक्ति प्राप्त होती है।

ऐसे करें भगवान पद्मनाभ की पूजा-
आज प्रातः अथवा शाम के समय श्री हरि के पद्मनाभ स्वरूप का पूजन करें। मस्तक पर सफ़ेद चन्दन अथवा गोपी चन्दन लगाकर वंदना करें। इनको पंचामृत, पुष्प तथा ऋतु फल चढ़ाएं। चाहें तो एक वेला उपवास रखकर एक वेला पूर्ण सात्विक आहार ग्रहण करें। शाम को आहार ग्रहण करने के पूर्व आराधना तथा आरती अवश्य करें। आज के दिन ऋतुफल तथा अन्न का दान करना भी खास शुभ होता है।

इन बातों का रखें ध्यान-
1. यदि उपवास रखें तो बहुत उत्तम होगा।
2. नहीं तो एक वेला सात्विक भोजन ग्रहण करें।
3. ग्यारस के दिन चावल तथा भारी खाद्य का सेवन न करें।
4. रात्रि के वक़्त पूजा उपासना का खास महत्व होता है।
5. गुस्सा न करें, कम बोलें तथा आचरण पर कंट्रोल रखें।

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