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	<title>बिहार की राजनीति में खरमास बाद नहीं आया भूकंप &#8211; Shaurya Times | शौर्य टाइम्स</title>
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		<title>बिहार की राजनीति में खरमास बाद नहीं आया भूकंप, टांय-टांय फिस्‍स रहे दलों में टूट के दावे</title>
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		<pubDate>Wed, 20 Jan 2021 10:36:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ नेताओं के दावे पर भरोसा करना फिर भारी पड़ रहा है। बीते साल के 14 दिसम्बर से नए साल के 14 जनवरी तक नेताओं ने जितने दावे किए, सब अमल में आ जाते तो राज्य का राजनीतिक माहौल बदल गया रहता। यूं कहिए कि राजनीतिक दलों में भूकंप (Political Earthquake) का सीन रहता। सबकुछ उलटा-पुलटा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong> </strong>नेताओं के दावे पर भरोसा करना फिर भारी पड़ रहा है। बीते साल के 14 दिसम्बर से नए साल के 14 जनवरी तक नेताओं ने जितने दावे किए, सब अमल में आ जाते तो राज्य का राजनीतिक माहौल बदल गया रहता। यूं कहिए कि राजनीतिक दलों में भूकंप (Political Earthquake) का सीन रहता। सबकुछ उलटा-पुलटा और तहस-नहस। क्योंकि इस दौर में हरेक दल में भारी टूट का दावा किया गया। यहां तक कि नई सरकार के गठन तक की कल्पना कर ली गई। दावे इतने जोर से किए जा रहे थे कि जनता उसे सच मान बैठी। लेकिन, खरमास (Kharmas) गुजरे सप्ताह होने को आए, किसी दल में टूट की सुगबुगाहट नहीं है। हां, नेताओं के दावे पर एक बार फिर भरोसा टूटा है।</p>
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<p><strong>पहले से ही दलों में टूट के दावे</strong></p>
<p>दलों में टूट के दावे पहले से किए जा रहे थे। उसमें गंभीरता 10 जनवरी को आई, जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बिहार प्रभारी भूपेंद्र यादव (Bhupendra Yadav) ने राष्&#x200d;ट्रीय जनता दल (RJD) में बड़ी टूट का दावा किया। उन्होंने कहा- आरजेडी के नेता तरह-तरह के बयान दे रहे हैं। हम चुप हैं। अभी खरमास चल रहा है। संक्रांति के बाद आरजेडी अपनी पार्टी बचा ले।</p>
<p><strong>भूपेंद्र यादव ने गरमा दी सियासत</strong></p>
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<p>कोई और दावा करता तो लोग टाल देते। मगर यहां मामला भूपेंद्र यादव जैसे बीजेपी के वरिष्ठ रणनीतिकार का था, सो लोगों ने भरोसा कर लिया। अगले दिन सोमवार को लोकसभा में जनता दल यूनाइटेड (JDU) संसदीय दल के नेता राजीव रंजन सिंह ऊर्फ ललन सिंह (Lalan Singh) के दावे ने लोगों को यह सोचने को मजबूर कर दिया कि सचमुच मकर संक्रांति के बाद कुछ बड़ा होने वाला है। ललन सिंह ने कहा- भूपेंद्र यादव चाह लें तो आरजेडी का बीजेपी में मर्जर हो जाएगा।</p>
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<p><strong>कांग्रेस में टूट की भविष्यवाणी</strong></p>
<p>इससे पहले कांग्रेस (Congress) के पूर्व विधायक भरत प्रसाद सिंह (Bharat Prasad Singh) ने ठंडे के मौसम में राजनीति के माहौल को गर्म कर दिया कि कांग्रेस विधायक दल में बड़ी टूट होने वाली है। पार्टी के 19 में से 11 विधायक जेडीयू में जाने के लिए तैयार हैं। देरी संख्या के चलते हो रही है। विधायक दल में टूट के लिए 13 विधायकों का एकसाथ आना जरूरी है। सिंह के दावे को कांग्रेस विधायक दल के नेता अजित शर्मा (Ajit Sharma) ने खारिज कर दिया। फिलहाल यह मामला ठंडा हो गया है।</p>
<p><strong>जेडीयू को तोड़ रहा था आरजेडी</strong></p>
<p>सभी दल मिलकर आरजेडी को तोड़ रहे थे तो वह भला कैसे पीछे रहता। उसके नेता श्याम रजक (Shyam Rajak) ने दावा कर दिया कि खरमास के बाद जेडीयू में बड़ी टूूट होगी। जेडीयू के 43 में से 17 विधायक उनके संपर्क में हैं। बस, 13 विधायक और टूट जाएं तो सरकार गिर जाएगी। रजक के दावे के बाद जेडीयू के कुछ विधायकों की ओर शक की सूई घूमने लगी। क्योंकि जेडीयू में अगर टूट होती है तो न सिर्फ राष्&#x200d;ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार चली जाएगी, बल्कि तेजस्वी यादव बड़ी आसानी से सरकार बना लेंगे। सरकार बनाने के लिए उन्हें महज 13 विधायकों की जरूरत है। आरजेडी के 75 के अलावा कांग्रेस के 19 और वाम दलों के 16 विधायक हैं। यह संख्या 110 है। 243 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 122 विधायकों का समर्थन चाहिए।</p>
<p><strong>खरमास के साथ दावा भी खत्म</strong></p>
<p>14 जनवरी को मकर संक्रांति के साथ खरमास खत्म हो गया। अब कोई भी दल टूट का दावा नहीं कर रहा है। नई चर्चा कैबिनेट विस्तार (Cabinet Expansion) को लेकर हो रही है। यह हो जाए तो नए सिरे से टूट फूट की चर्चा होगी। तब कहा जाएगा कि कैबिनेट में जिन विधायकों को जगह नहीं मिली है, वे दूसरे दल में जाएंगे। गिनती के विधायकों के बल पर चलने वाली सरकार में इस तरह के कयास चलते रहते हैं। बिहार इस मामले में भी अपवाद रहा है। 1990 में लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व में बनी अल्पमत की सरकार चुनाव दर चुनाव 15 साल चली।</p>
<p>&nbsp;</p>
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