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	<title>भारत की बेटी स्वाति मोहन जो बनी मंगल पर नासा के ऐतिहासिक कदम की आवाज &#8211; Shaurya Times | शौर्य टाइम्स</title>
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		<title>भारत की बेटी स्वाति मोहन जो बनी मंगल पर नासा के ऐतिहासिक कदम की आवाज</title>
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		<pubDate>Fri, 19 Feb 2021 07:12:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नासा के मंगल ग्रह पर भेजे गए रोवर परसिवरेंस की सफलता के पीछे जिन लोगों का हाथ है उनमें से एक स्‍वाति मोहन भी हैं। स्‍वाति मोहन नासा की जेट प्रपल्‍शन लैब में इस प्रोग्राम की नेवीगेशन गाइडेंस और कंट्रोल ऑपरेशन (GNC) की हैड हैं। नासा का रोवर इसी लैब में तैयार किया गया है। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नासा के मंगल ग्रह पर भेजे गए रोवर परसिवरेंस की सफलता के पीछे जिन लोगों का हाथ है उनमें से एक स्&#x200d;वाति मोहन भी हैं। स्&#x200d;वाति मोहन नासा की जेट प्रपल्&#x200d;शन लैब में इस प्रोग्राम की नेवीगेशन गाइडेंस और कंट्रोल ऑपरेशन (GNC) की हैड हैं। नासा का रोवर इसी लैब में तैयार किया गया है। इसके पीछे वर्षों की मेहनत है। नासा के इस मिशन में रोवर परसिवरेंस के साथ एक मिनी हैलीकॉप्&#x200d;टर इनज्&#x200d;यूनिटी भी सफलतापूर्वक मंगल ग्रह पर पहुंच गया है। ये इस पूरी टीम के लिए गौरव का पल है। स्&#x200d;वाति की बात करें तो वो इसकी टीम से बीते आठ वर्षों से जुड़ी हैं।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-103065" src="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2021/02/jhyjm.jpg" alt="" width="680" height="510" srcset="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2021/02/jhyjm.jpg 680w, https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2021/02/jhyjm-300x225.jpg 300w" sizes="(max-width: 680px) 100vw, 680px" /></p>
<p>स्&#x200d;वाति के ऊपर मार्स रोवर परसिवरेंस को सही जगह पर उतारने और इसके लिए एकदम सही जगह का चयन करने की जिम्&#x200d;मेदारी थी। वो केवल इसी मिशन के साथ जुड़ी नहीं रही है बल्कि इससे पहले वो शनि ग्रह पर भेजे गए कासिनी यान और नासा के चांद पर भेजे गए ग्रेविटी रिकवरी एंड इंटीरियर लैबोरेटरी (ग्रेल) यान से भी जुड़ी रह चुकी हैं।</p>
<p>नासा के रोवर परसिवरेंस मिशन को लेकर स्&#x200d;वाति कुछ बीते दिनों में कुछ ट्वीट भी किए हैं। इनमें से एक ट्वीट में उन्&#x200d;होंने लिखा कि वो काफी बिजी शडयूल के बाद और काफी देर तक काम करने के बाद घर जा रही हैं। इसके बाद उन्&#x200d;होंने इसकी लैंडिंग की उलटी गिनती कर रही एक क्&#x200d;लॉक की फोटो भी ट्वीट की थी।रोवर की मार्स पर लैंडिंग से पहले उन्&#x200d;होंने लिखा कि अपनी टीम की मांग पर उन्&#x200d;होंने अपने बालों को ऐसा रूप दिया है।</p>
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<p>स्&#x200d;वाति इस पूरे मिशन में जीएनसी और दूसरी टीमों के बीच एक की-कम्&#x200d;यूनिकेटर की भी भूमिका निभा रही हैं। बेहद कम लोग इस बात से वाकिफ होंगे कि जब वो महज एक वर्ष की थी तब उनके पैरेंटस अमेरिका में उत्&#x200d;तरी वर्जीनिया चले गए थे। उन्&#x200d;होंने कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल एंड एयरोस्&#x200d;पेस इंजीनियरिंग में बीएस की डिग्री हासिल की। इसके बाद मैसेचुसेट्स यूनिवर्सिटी से एयरोनॉटिक्&#x200d;स में एमएस और पीएचडी की डिग्री हासिल की।</p>
<p>अपने वैज्ञानिक बनने और नासा से जुड़ने की बात का खुलासा करते हुए एक बार उन्&#x200d;होंने कहा था कि वो जब 9 वर्ष की थीं तब टीवी पर आने वाले प्रोग्राम स्&#x200d;टार ट्रेक को बेहद मन से देखा करती थीं। इससे उन्&#x200d;हें ब्रह्मांड के नए खुलासे करने का मन करता था। उन्&#x200d;हें ये जानने में अच्&#x200d;छा लगता था कि पृथ्&#x200d;वी से करोड़ों किमी दूर भी कुछ है। यहां से उन्&#x200d;हें ब्रह्मांड को खंगालने की धुन सवार हुई थी। उन्&#x200d;हें लगने लगा था कि उन्&#x200d;हें भी इस ब्रह्मांड के नए सवालों का जवाब तलाशने हैं। जब वो 16 वर्ष की थीं तब उनके दिमाग में पैड्रीटिशियन बनने का ख्&#x200d;याल आया। लेकिन इसी दौरान उन्&#x200d;हें मिले फिजिक्&#x200d;स के टीचर की बदौलत उनके मन में दोबारा इंजीनियर बनने का ख्&#x200d;याल मन में आया था। इसके बाद उनकी दिलचस्&#x200d;पी स्&#x200d;पेस एक्&#x200d;सप्&#x200d;लोरेशन में बढ़ती ही चली गई।</p>
<p>जिस वक्&#x200d;त उनकी वर्षों की मेहनत को मंगल ग्रह के लिए लॉन्&#x200d;च किया जाना था उस वक्&#x200d;त वो और उनकी पूरी टीम काफी नर्वस हो गई थी। इसकी वजह थी कि मंगल की पथरीली सतह पर उनका रोवर कितनी सफलता से उतरेगा। उनके और उनकी टीम में इस दौरान कई तरह के विचार आ रहे थे। इनमें एक ये भी था कि यदि किसी गलती की वजह से मिशन नाकाम रहा तो उनकी वर्षों की मेहनत पर पानी फिर जाएगा। उनकी वर्षों की मेहनत रोवर परसिवरेंस की लैंडिंग के आखिरी 7 मिनट पर टिकी हुई थी, क्&#x200d;योंकि ये पल बेहद मुश्किलों भरे थे। इस रोवर एक ऐसी जगह पर उतरना था जो बेहद पथरीली थी और जहां पर बड़ी-बड़ी चट्टानें और बड़े बड़े पत्&#x200d;थर थे। यहां पर वो सबकुछ था जो रोवर को नुकसान पहुंचा सकता था।</p>
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