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	<title>भारी बारिश से गुफा में फंसे बच्चों का बचाव अभियान प्रभावित &#8211; Shaurya Times | शौर्य टाइम्स</title>
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		<title>भारी बारिश से गुफा में फंसे बच्चों का बचाव अभियान प्रभावित</title>
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		<pubDate>Sun, 08 Jul 2018 06:52:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दुनिया]]></category>
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					<description><![CDATA[उत्तरी थाइलैंड में शनिवार देर शाम भारी बारिश होने से बचाव अभियान प्रभावित हो गया है। चियांग राय प्रांत की तंग गुफा में 23 जून से फंसे 12 स्कूली बच्चे और उनका कोच को निकालने में जुटे बचाव दल को पानी और समय से संघर्ष करना पड़ रहा है। बचाव अभियान के अगुआ ने शनिवार &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>उत्तरी थाइलैंड में शनिवार देर शाम भारी बारिश होने से बचाव अभियान प्रभावित हो गया है। चियांग राय प्रांत की तंग गुफा में 23 जून से फंसे 12 स्कूली बच्चे और उनका कोच को निकालने में जुटे बचाव दल को पानी और समय से संघर्ष करना पड़ रहा है।<img fetchpriority="high" decoding="async" class="aligncenter  wp-image-5374" src="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2018/07/thai-cave-divers_08_07_2018.jpg" alt="उत्तरी थाइलैंड में शनिवार देर शाम भारी बारिश होने से बचाव अभियान प्रभावित हो गया है। चियांग राय प्रांत की तंग गुफा में 23 जून से फंसे 12 स्कूली बच्चे और उनका कोच को निकालने में जुटे बचाव दल को पानी और समय से संघर्ष करना पड़ रहा है।  बचाव अभियान के अगुआ ने शनिवार को बताया कि अगले तीन से चार दिनों में बचाव का रास्ता खुल सकता है। गुफा के बाहर मौजूद शाही थाई सेना के जवानों ने कहा कि वरिष्ठों ने रविवार या एक दिन बाद अभियान शुरू होने की उम्मीद जताई है।  बच्चों के लिए 13 मेडिकल टीमें तैयार बच्चों और उनके कोच के लिए 13 मेडिकल टीमें गठित की गई हैं। हर टीम के पास अपना हेलीकॉप्टर और एंबुलेंस है। गुफा में ऑक्सीजन का स्तर गिरने और तूफानी बारिश होने की आशंका के बाद बच्चों को तैराकी सिखाने के लिए समय नहीं रह गया है।  11 से 16 साल के बच्चे न तो अच्छे तैराक हैं और न ही तंग गुफा से गोता लगाकर निकलने में समर्थ हैं। ऑक्सीजन की कमी के कारण शुक्रवार को नौसेना के एक रिटायर कमांडो की मौत हो चुकी है।  गंभीर बीमारी का शिकार हो सकते हैं बच्चे अभियान में शामिल एक चिकित्साकर्मी ने बताया कि उनका ध्यान सबसे पहले बच्चों के सांस लेने पर रहेगा।  हाइपोथर्मिया और वायु जनित फेफड़े के संक्रमण के लक्षण को केव डिजीज के नाम से जाना जाता है। यह बीमारी चमगादड़ और चिड़ियों के मल से पैदा होती है। यदि समय पर इसका इलाज नहीं किया गया तो शरीर के दूसरे हिस्से इसकी चपेट में आ जाएंगे।  ऑक्सीजन लाइन बिछाई जा सकती है अधिकारियों ने ऑक्सीजन लाइन बिछाने की संभावना से इन्कार नहीं किया। यदि अगले कुछ दिनों में प्रयास सफल नहीं हो पाया तो उस स्थिति में यह कदम उठाया जाएगा और मानसून खत्म होने तक बच्चों को गुफा में रखा जाएगा।  कैसी हैं मेडिकल टीमें म्यांमार से सटी थाइलैंड की उत्तरी सीमा के पास जिस थाम लुआंग गुफा में बच्चे फंसे हैं उसमें भेजी जा रही हर मेडिकल टीम में एक डॉक्टर, दो नर्स, एक पारामेडिकल और एक एंबुलेंस शामिल है।  अभियान के प्रभारी और सेना की चिकित्सा विभाग की मेजर जनरल प्रमोटे इमवाट्टना ने यह जानकारी दी। प्रारंभिक आकलन के बाद समूह एंबुलेंस के माध्यम से अस्थायी हेलीपैड तक पहुंचेगा। वहां से करीब 70 किलोमीटर दूर चियांग राय अस्पताल लाया जाएगा।" width="671" height="503" srcset="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2018/07/thai-cave-divers_08_07_2018.jpg 435w, https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2018/07/thai-cave-divers_08_07_2018-300x225.jpg 300w" sizes="(max-width: 671px) 100vw, 671px" /></strong></p>
<p><strong>बचाव अभियान के अगुआ ने शनिवार को बताया कि अगले तीन से चार दिनों में बचाव का रास्ता खुल सकता है। गुफा के बाहर मौजूद शाही थाई सेना के जवानों ने कहा कि वरिष्ठों ने रविवार या एक दिन बाद अभियान शुरू होने की उम्मीद जताई है।</strong></p>
<p><strong>बच्चों के लिए 13 मेडिकल टीमें तैयार बच्चों और उनके कोच के लिए 13 मेडिकल टीमें गठित की गई हैं। हर टीम के पास अपना हेलीकॉप्टर और एंबुलेंस है। गुफा में ऑक्सीजन का स्तर गिरने और तूफानी बारिश होने की आशंका के बाद बच्चों को तैराकी सिखाने के लिए समय नहीं रह गया है।</strong></p>
<p><strong>11 से 16 साल के बच्चे न तो अच्छे तैराक हैं और न ही तंग गुफा से गोता लगाकर निकलने में समर्थ हैं। ऑक्सीजन की कमी के कारण शुक्रवार को नौसेना के एक रिटायर कमांडो की मौत हो चुकी है।</strong></p>
<p><strong>गंभीर बीमारी का शिकार हो सकते हैं बच्चे अभियान में शामिल एक चिकित्साकर्मी ने बताया कि उनका ध्यान सबसे पहले बच्चों के सांस लेने पर रहेगा।</strong></p>
<p><strong>हाइपोथर्मिया और वायु जनित फेफड़े के संक्रमण के लक्षण को केव डिजीज के नाम से जाना जाता है। यह बीमारी चमगादड़ और चिड़ियों के मल से पैदा होती है। यदि समय पर इसका इलाज नहीं किया गया तो शरीर के दूसरे हिस्से इसकी चपेट में आ जाएंगे।</strong></p>
<p><strong>ऑक्सीजन लाइन बिछाई जा सकती है अधिकारियों ने ऑक्सीजन लाइन बिछाने की संभावना से इन्कार नहीं किया। यदि अगले कुछ दिनों में प्रयास सफल नहीं हो पाया तो उस स्थिति में यह कदम उठाया जाएगा और मानसून खत्म होने तक बच्चों को गुफा में रखा जाएगा।</strong></p>
<p><strong>कैसी हैं मेडिकल टीमें म्यांमार से सटी थाइलैंड की उत्तरी सीमा के पास जिस थाम लुआंग गुफा में बच्चे फंसे हैं उसमें भेजी जा रही हर मेडिकल टीम में एक डॉक्टर, दो नर्स, एक पारामेडिकल और एक एंबुलेंस शामिल है।</strong></p>
<p><strong>अभियान के प्रभारी और सेना की चिकित्सा विभाग की मेजर जनरल प्रमोटे इमवाट्टना ने यह जानकारी दी। प्रारंभिक आकलन के बाद समूह एंबुलेंस के माध्यम से अस्थायी हेलीपैड तक पहुंचेगा। वहां से करीब 70 किलोमीटर दूर चियांग राय अस्पताल लाया जाएगा।</strong></p>
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