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	<title>राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे को आज ही के दिन दी गई थी सजा-ए-मौत &#8211; Shaurya Times | शौर्य टाइम्स</title>
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		<title>राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर CM आदित्यनाथ ने अर्पित की अपनी श्रद्धांजलि</title>
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		<pubDate>Sat, 30 Jan 2021 11:03:10 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[राष्ट्रपिता तथा देश की आजादी के महानायक महात्मा गांधी की 73वीं पुण्यतिथि पर आज राष्ट्र उनको श्रद्धांजलि दे रहा है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के जीपीओ पार्क में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि की। देश उनकी पुण्य तिथि यानी 30 जनवरी को शहीद दिवस के रूप में मनाता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>राष्ट्रपिता तथा देश की आजादी के महानायक महात्मा गांधी की 73वीं पुण्यतिथि पर आज राष्ट्र उनको श्रद्धांजलि दे रहा है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के जीपीओ पार्क में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि की। देश उनकी पुण्य तिथि यानी 30 जनवरी को शहीद दिवस के रूप में मनाता है।<img fetchpriority="high" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-100362" src="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2021/01/zxzxzxzxzz.jpg" alt="" width="512" height="425" srcset="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2021/01/zxzxzxzxzz.jpg 512w, https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2021/01/zxzxzxzxzz-300x249.jpg 300w" sizes="(max-width: 512px) 100vw, 512px" /></p>
<p>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्य और अहिंसा के पुजारी तथा हम सभी के पथ प्रदर्शक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 73वीं पुण्यतिथि पर शनिवार को लखनऊ के जीपीओ पार्क में उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उनके साथ कैबिनेट मंत्री ब्रजेश पाठक तथा महेंद्र सिंह भी थे।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि विश्व को सत्य और अहिंसा का मार्ग दिखाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को उनकी पुण्यतिथि पर मेरी विनम्र श्रद्धांजलि है। आपकी शिक्षाएं व आदर्श हमें रामराज्य की संकल्पना के निकट ले जाती हैं। यह एक भारत-श्रेष्ठ भारत के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करती हैं।</p>
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<p>इस अवसर पर स्कूली बच्चों ने महात्मा गांधी तथा देश की आजादी से से जुड़े तराने भी झेड़े। मुख्यमंत्री ने भी गांधी प्रतिमा के समक्ष कुछ देर बैठकर पाठ भी किया और बच्चों के तरानों को सुना।</p>
<p>लखनऊ के हजरतगंज चौराहा पर आज 11 बजे देश की आजादी के नायक महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के साथ राष्ट्र के नायक के योगदान को याद करने के लिए कुछ देर तक ट्रैफिक रोका गया। सभी ने एक मिनट मौन रहकर उनको श्रद्धांजलि भी दी।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे को आज ही के दिन दी गई थी सजा-ए-मौत</title>
		<link>https://www.shauryatimes.com/news/64649</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[PMC Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 15 Nov 2019 06:01:21 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे को आज ही के दिन दी गई थी सजा-ए-मौत]]></category>
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					<description><![CDATA[राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को आज ही के दिन 15 नवंबर 1949 को सजा-ए-मौत यानि फांसी दी गई थी। नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी की 30 जनवरी 1948 को गोली मारकर हत्या कर दी थी। उनको मौके पर मौजूद लोगों ने ही पकड़ लिया था, उसके बाद नाथूराम को पुलिस के हवाले &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को आज ही के दिन 15 नवंबर 1949 को सजा-ए-मौत यानि फांसी दी गई थी। नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी की 30 जनवरी 1948 को गोली मारकर हत्या कर दी थी। उनको मौके पर मौजूद लोगों ने ही पकड़ लिया था, उसके बाद नाथूराम को पुलिस के हवाले किया गया। पुलिस ने नाथूराम के अन्य साथियों को भी पकड़ा इन सभी पर केस चला, कुछ बरी हो गए और जो इस साजिश में संलिप्त पाए गए उनको फांसी की सजा दी गई। नाथूराम को हत्या के आरोप में 15 नवंबर 1949 को अंबाला जेल में फांसी पर लटका दिया गया था।</p>
<p><img decoding="async" class="lazy aligncenter" src="https://www.jagranimages.com/images/newimg/articleimage/nathuram-godse-2(1).jpg" alt="" width="650" height="540" /></p>
<p><strong>भरी भीड़ के बीच मारी थी गोली </strong></p>
<p>आमतौर पर दबंग किस्म के बदमाश ही भरी भीड़ में किसी को मारने की हिम्मत जुटा पाते हैं वो भी तब जब काफी समय से उनकी सामने वाले से दुश्मनी चली आ रही हो मगर यहां ऐसा कुछ नहीं था। उसके बाद भी नाथूराम ने महात्मा गांधी को भरी भीड़ में गोली मार दी थी। नाथूराम के नाम से लगता था कि वो हिम्मती और दबंग किस्म के इंसान रहे होंगे मगर सच्चाई इससे एकदम अलग थी। गोडसे का बचपन एक अंधविश्वास की वजह से डर के साये में गुजरा था। कम ही लोगों को पता है कि इसी अंधविश्वास की वजह से नाथूराम को बचपन में काफी समय तक लड़कियों की तरह बिताना पड़ा था।</p>
<p><img decoding="async" class="lazy aligncenter" src="https://www.jagranimages.com/images/newimg/articleimage/nathuram-godse_.jpg" alt="" width="650" height="540" /></p>
<p><strong>नथूराम से हो गए नाथूराम </strong></p>
<p>नाथूराम गोड़से का असली नाम ‘नथूराम’था। उनके परिवार के सदस्य भी उनको इसी नाम से बुलाते थे। अंग्रेजी में लिखी गई उनके नाम की स्पेलिंग के कारण काफी समय बाद उनका नाम नथूराम से नाथूराम (Nathuram)हो गया। नाथूराम के इस नाम के पीछे भी एक लंबी कहानी है। दरअसल नाथूराम के परिवार में उनसे पहले जितने भी लड़के पैदा हुए, सभी की अकाल मौत हो जाती थी। इसे देखते हुए जब नथू पैदा हुए तो परिवार ने उन्हें लड़कियों की तरह पाला। उन्हें बकायदा नथ तक पहनाई गई थी और लड़कियों के कपड़ों में रखा जाता था। इसी नथ के कारण उनका नाम नथूराम पड़ गया था, जो आगे चलकर अंग्रेजी की स्पेलिंग के कारण नाथूराम हो गया था।</p>
<p><strong>हत्या में अकेले नहीं थे शामिल </strong></p>
<p>नाथूराम महात्मा गांधी की हत्या में अकेले शामिल नहीं थे, उनके साथ और भी लोग थे। दिल्ली के लाल किले में चले मुकदमे में न्यायाधीश आत्मचरण की अदालत ने नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे को फांसी की सजा सुनाई थी। बाकी पाँच अन्य विष्णु करकरे, मदनलाल पाहवा, शंकर किस्तैया, गोपाल गोडसे और दत्तारिह परचुरे को उम्रकैद की सज़ा मिली थी। बाद में हाईकोर्ट ने किस्तैया और परचुरे को हत्या के आरोप से बरी कर दिया था।</p>
<p><strong>अदालत को गोडसे ने बताई थी हत्या की ये वजह </strong></p>
<p>अदालत में चले ट्रायल के दौरान नाथूराम ने गांधी की हत्या की बात स्वीकार कर ली थी। कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए गोडसे ने कहा था कि गांधी जी ने देश की जो सेवा की है, मैं उसका आदर करता हूँ। उन पर गोली चलाने से पूर्व मैं उनके सम्मान में इसीलिए नतमस्तक हुआ था। किंतु जनता को धोखा देकर पूज्य मातृभूमि के विभाजन का अधिकार किसी बड़े से बड़े महात्मा को भी नहीं है। गाँधी जी ने देश को छल कर देश के टुकड़े कर दिए। ऐसा कोई न्यायालय या कानून नहीं था, जिसके आधार पर ऐसे अपराधी को दंड दिया जा सकता, इसीलिए मैंने गाँधी को गोली मारी।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="lazy aligncenter" src="https://www.jagranimages.com/images/newimg/articleimage/Gandhi-Just-Before-Death(1).jpg" alt="" width="650" height="540" /></p>
<p><strong>मौत से ठीक पहले गांधी ने कहा था ‘जो देर करते हैं उन्हें सजा मिलती है’ </strong></p>
<p>महात्मा गांधी को 30 जनवरी 1948 को शाम 5:15 बजे महात्मा गाँधी भागते हुए बिरला हाउस के प्रार्थना स्थल की तरफ बढ़ रहे थे। उनके स्टाफ के सदस्य गुरबचन सिंह ने घड़ी देखते हुए कहा था, &#8220;बापू आज आपको थोड़ी देरी हो गई।&#8221; इस पर गांधी ने भागते हुए ही हंसकर जवाब दिया था, &#8220;जो लोग देर करते हैं उन्हें सजा मिलती है।&#8221; इसके दो मिनट बाद ही नाथूराम गोडसे ने अपनी बेरेटा पिस्टल से तीन गोलियाँ महात्मा गाँधी को सामने से मार दी थी।</p>
<p><strong>गोडसे से जेल में मिलने गए गांधी के बेटे ने कहा था </strong></p>
<p>नाथूराम के भाई गोपाल गोडसे की किताब ‘गांधी वध और मैं’ के अनुसार जब गोडसे संसद मार्ग थाने में बंद थे, तो उन्हें देखने के लिए कई लोग जाते थे। एक बार गांधी जी के बेटे देवदास भी उनसे मिलने जेल पहुंचे थे। गोडसे ने उन्हें सलाखों के अंदर से देखते ही पहचान लिया था। इसके बाद गोडसे ने देवदास गांधी से कहा था कि आप आज मेरे कारण पितृविहीन हो चुके हैं। आप पर और आपके परिवार पर जो वज्रपात हुआ है उसका मुझे खेद है। लेकिन आप विश्वास करें, &#8216;किसी व्यक्तिगत शत्रुता की वजह से मैंने ऐसा नहीं किया है।&#8217; इस मुलाकात के बाद देवदास ने नाथूराम को एक पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने लिखा था &#8216;आपने मेरे पिता की नाशवान देह का ही अंत किया है और कुछ नहीं। इसका ज्ञान आपको एक दिन होगा, क्योंकि मुझ पर ही नहीं संपूर्ण संसार के लाखों लोगों के दिलों में उनके विचार अभी तक विद्यमान हैं और हमेशा रहेंगे।&#8217;</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="lazy aligncenter" src="https://www.jagranimages.com/images/newimg/articleimage/nathuram-godse-4(1)(1).jpg" alt="" width="650" height="540" /></p>
<p><strong>अब भी सुरक्षित हैं नाथूराम की अस्थियां </strong></p>
<p>नाथूराम का शव उनके परिवार को नहीं दिया गया था। अंबाला जेल के अंदर ही अंदर एक गाड़ी में डालकर उनके शव को पास की घाघर नदी ले जाया गया। वहीं सरकार ने गुपचुप तरीके से उनका अंतिम संस्कार कर दिया था। उस वक्त गोडसे के हिंदू महासभा के अत्री नाम के एक कार्यकर्ता उनके शव के पीछे-पीछे गए थे। उनके शव की अग्नि जब शांत हो गई तो, उन्होंने एक डिब्बे में उनकी अस्थियाँ समाहित कर लीं थीं। उनकी अस्थियों को अभी तक सुरक्षित रखा गया है। गोडसे परिवार ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए उनकी अस्थियों को अभी तक चाँदी के एक कलश में सुरक्षित रखा हुआ है।</p>
<p><strong>गोडसे की अंतिम इच्छा </strong></p>
<p>15 नवंबर 1949 को नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे को फाँसी दी गई थी। फांसी के लिए जाते वक्त नाथूराम के एक हाथ में गीता और अखंड भारत का नक्शा था और दूसरे हाथ में भगवा ध्वज। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि फाँसी का फंदा पहनाए जाने से पहले उन्होंने &#8216;नमस्ते सदा वत्सले&#8217; का उच्चारण किया और नारे लगाए थे। गोडसे ने अपनी अंतिम इच्छा लिखकर दी थी कि उनके शरीर के कुछ हिस्से को संभाल कर रखा जाए और जब सिंधु नदी स्वतंत्र भारत में फिर से समाहित हो जाए और फिर से अखंड भारत का निर्माण हो जाए, तब उनकी अस्थियां उसमें प्रवाहित की जाए। इसमें दो-चार पीढ़ियाँ भी लग जाएं तो कोई बात नहीं। उनकी अंतिम इच्छा अब भी अधूरी है और शायद ही कभी पूरी हो।</p>
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