सपा-बसपा गठजोड़ को मात देने के लिए इन 5 फ्रंट पर काम कर रही है BJP – Shaurya Times | शौर्य टाइम्स https://www.shauryatimes.com Latest Hindi News Portal Tue, 24 Jul 2018 05:10:57 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.2 सपा-बसपा गठजोड़ को मात देने के लिए इन 5 फ्रंट पर काम कर रही है BJP https://www.shauryatimes.com/news/6652 Tue, 24 Jul 2018 05:10:57 +0000 http://www.shauryatimes.com/?p=6652 केंद्र की सत्ता का रास्ता यूपी से होकर गुजरता है. 2019 में बीजेपी और पीएम नरेंद्र मोदी के लिए इसी रास्ते को रोकने के लिए मायावती और अखिलेश यादव जैसे यूपी के दो बड़े क्षत्रप हाथ मिला रहे हैं. अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर यूपी में बनते-बिगड़ते राजनीतिक समीकरणों पर बीजेपी की पैनी नजर है. ऐसे में सपा-बसपा के मंसूबों पर पानी फेरने और 2014 चुनाव जैसे नतीजे दोहराने के लिए इन दिनों बीजेपी 5 फ्रंट पर काम कर रही है.सपा-बसपा गठजोड़ को मात देने के लिए इन 5 फ्रंट पर काम कर रही है BJP

1. मोदी की रैलियों से माहौल

बीजेपी उत्तर प्रदेश में मोदीमय माहौल बनाने में जुट गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं मोर्चा संभाल लिया है. वे एक के बाद एक ताबड़तोड़ रैलियां करने में जुटे हैं. पिछले एक महीने के अंदर सूबे में पांच रैलियों को पीएम संबोधित कर चुके हैं और आगे भी ये सिलसिला जारी रहेगा. मोदी की प्रत्येक रैली की रूपरेखा कुछ ऐसी है, जिसके जरिए 2 से 3 संसदीय सीटों के वोटरों को कवर किया जा रहा है. लोकसभा चुनवा से पहले तक सूबे में मोदी की 20 रैलियां कराने की योजना बीजेपी ने बनाई है.

सपा-बसपा गठबंधन की चुनौती और मौजूदा सांसदों के खिलाफ विरोधी फैक्टर का मुकाबला करने के लिए बीजेपी यूपी सरकार के अपने कई ताकतवर मंत्रियों को चुनाव लड़ा सकती है. इसके लिए बीजेपी राज्य के अपने सबसे प्रभावशाली मंत्रियों की सूची भी तैयार कर रही है, जिनकी चुनाव क्षेत्र में अच्छी पकड़ है. वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री सतीश महाना, एसपी शाही, दारा सिंह चौहान, एसपीएस बघेल और स्पीकर हृदय नारायण दीक्षित जैसे चेहरों को 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी उतार सकती है.

3. नए चेहरों पर दांव

बीजेपी हाई कमान ने साफ संकेत दिए हैं कि वह 71 विजयी उम्मीदवारों में से 50 फीसदी को इस बार मौका नहीं देंगे. ऐसे में पार्टी को जिताऊ उम्मीदवारों की जरूरत है जिससे राज्य में सीटों का गणित न गड़बड़ाए. ऐसे में बीजेपी अपने मौजूदा सांसदों की जगह नए चेहरों को मैदान में उतार सकती है. बीजेपी का इस बात पर भी फोकस है कि उम्मीदवार मजबूत हों और उनकी जीत पक्की हो. हालांकि, गोरखपुर सीट को लेकर बीजेपी बड़ी दुविधा में है. योगी आदित्यनाथ के सीएम बनने बाद हुए उपचुनाव में बीजेपी को हार मिली है. ऐसे में मजबूत उम्मीदवारों को लेकर मंथन किया जा रहा है.

सपा-बसपा के साथ आने से बीजेपी का समीकरण बिगड़ा है. ऐसे में बीजेपी अपनी जमीन को मजबूत करने के लिए गैर यादव ओबीसी मतों को साधने की कवायद में जुट गई है. खासकर कुर्मी मतों को लेकर बीजेपी ने खास प्लान बनाया है. इसी के चलते मोदी की यूपी में अभी तक जो रैलियां हुई हैं उनमें मिर्जापुर और शाहजहांपुर दोनों कुर्मी बहुल क्षेत्र है. बीजेपी सूत्रों की माने तो प्रदेश में पार्टी की कमान कुर्मी समाज के नेता को सौंपी जा सकती है. इसके अलावा प्रजापति, मौर्य, लोध, पाल सहित गैर यादव ओबीसी पर बीजेपी का फोकस है.

5. ध्रुवीकरण की बिसात

सपा-बसपा जातीय समीकरण के जरिए मोदी को मात देने की कोशिश में हैं. वहीं, बीजेपी 2014 की तर्ज पर हिंदुत्व की बिसात बिछाने में जुटी है. यूपी में बीजेपी उन सीटों पर खास नजर लगाए हुए हैं, जहां विपक्ष मुस्लिम उम्मीदवार उतारेगा. खासकर पश्चिम यूपी की सीटों पर नजर है, जहां आसानी से ध्रुवीकरण के जरिए चुनावी जंग फतह की जा सके.

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