सीनियर डॉक्टरों ने कहा – Shaurya Times | शौर्य टाइम्स https://www.shauryatimes.com Latest Hindi News Portal Wed, 06 Jan 2021 10:56:09 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.2 सीनियर डॉक्टरों ने कहा, स्वदेशी टीके पर संदेह उचित नहीं, यह बेहद सुरक्षित, इमरजेंसी इस्तेमाल में हर्ज नहीं https://www.shauryatimes.com/news/97605 Wed, 06 Jan 2021 10:56:09 +0000 http://www.shauryatimes.com/?p=97605 कोरोना ने बहुतों की जान ली। देश में करीब डेढ़ लाख और दिल्ली में भी साढ़े दस हजार से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। ब्रिटेन में वायरस में म्यूटेशन के बाद फैले संक्रमण के बाद टीके का ज्यादा इंतजार नहीं किया जा सकता है। इसलिए टीके के इमरजेंसी इस्तेमाल पर किसी तरह का विवाद नहीं होना चाहिए। स्वदेशी टीका कोवैक्सिन पूरी तरह सुरक्षित है।

प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न करने में भी यह कारगर पाया गया है। इसलिए इस टीके के इमरजेंसी इस्तेमाल से कोई हर्ज नहीं है। यह कहना है तीसरे फेज के ट्रायल में टीका लगवा चुके एम्स के वरिष्ठ डाक्टरों व संस्थान के पूर्व निदेशक का। एम्स के पूर्व निदेशक डा. एमसी मिश्रा, न्यूरोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष डा एमवी पद्मा श्रीवास्तव, मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डा. आशुतोष विश्वास सहित कई कई डॉक्टरों ने कोवैक्सिन के तीसरे फेज के ट्रायल में टीका लगवाया है।

डा एमवी पद्मा व डा. एमसी मिश्रा पहली डोज के 28 दिन बाद टीके की दूसरी डोज भी ले चुके हैं। डा. एमसी मिश्रा ने कहा कि टीके से लोगों को बिल्कुल डरने की भी जरूरत नहीं है। यह बहुत सुरक्षित है। संक्रमण से बचाव में यह कितना प्रभावशाली है यह तीसरे फेज के ट्रायल का डाटा सामने आने पर पता चलेगा लेकिन पहले व दूसरे फेज के ट्रायल में टीके के सुरक्षित होने व उसके प्रभाव को लेकर कोई सवाल नहीं उठा है। टीके से अच्छी प्रतिरोधकता उत्पन्न हो रही है।

मॉडर्ना व फाइजर कंपनी के विदेशी टीके को भी ट्रायल के दौरान ही इमरजेंसी इस्तेमाल की स्वीकृति मिली थी। इसलिए कोवैक्सिन पर सवाल उठाना उचित नहीं है।डॉ. एमवी पद्मा ने कहा कि यद्यपि यह नहीं मालूम कि उन्हें टीका लगाया या प्लेसिबो लेकिन उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई। एम्स खुद ट्रायल का हिस्सा है। देश में ट्रायल का सिस्टम भी बहुत बेहतर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) सहित कई देशों ने भारत के इस पहल की सराहना की है। बेवजह कुछ लोग यहां विवाद खड़ा करना चाहते हैं। ब्रिटेन जैसी स्थिति से बचने के लिए भी इमरजेंसी स्तर पर यहां टीकाकरण जरूरी है।

एम्स के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डा. आशुतोष विश्वास ने कहा कि टीका कितना प्रभावी है यह तीसरे चरण के ट्रायल में यह देखा जा रहा है। एक डॉक्टर होने के नाते चाहता था कि यह ट्रायल जल्दी पूरा हो। यदि वालेंटियर नहीं मिलते तो ट्रायल प्रभावित होता। संक्रमण रोकने का एक मात्र उपाय टीका है। इसलिए तीसरे फेज के ट्रायल में वालेंटियर के रूप में टीका लगवाया। वैसे भी पहले व दूसरे चरण के ट्रायल में यह साबित हो चुका है कि इससे कोई खतरा नहीं है। पर्याप्त एंटीबॉडी भी बन रही है।

तीसरे फेज के ट्रायल में अधिक संख्या में लोगों पर जब ट्रायल होता है तो टीके के प्रभाव को लेकर बेहतर जानकारी मिल पाती है। कोरोना से अब भी लोग मर रहे हैं। इसलिए इमरजेंसी रूप में बड़ी संख्या में लोगों को टीका लगाने से संभव है कि वह संक्रमण से बचाव में कारगर साबित हो। यदि टीके को अधिक समय तक रोक के रखा जाता तो संक्रमण बढ़ने पर स्थिति बिगड़ सकती है।

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