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	<title>सुप्रीम कोर्ट &#8211; Shaurya Times | शौर्य टाइम्स</title>
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		<title>पेगासस जासूसी का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा</title>
		<link>https://www.shauryatimes.com/news/111795</link>
		
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		<pubDate>Thu, 22 Jul 2021 06:13:38 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[एडवोकेट मनोहर लाल शर्मा]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली। पेगासस सॉफ्टवेयर के जरिए कथित तौर पर भारत में विपक्षी नेताओं और पत्रकारों की जासूसी का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। एडवोकेट मनोहर लाल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है। इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी जांच की मांग की गई है। साथ ही &#8230;]]></description>
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<div class="wp-block-image"><figure class="aligncenter size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="700" height="437" src="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2021/07/suprem-court-1.jpg" alt="पेगासस जासूसी का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा" class="wp-image-111796" srcset="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2021/07/suprem-court-1.jpg 700w, https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2021/07/suprem-court-1-300x187.jpg 300w" sizes="(max-width: 700px) 100vw, 700px" /></figure></div>



<p><strong>नई दिल्ली।</strong> पेगासस सॉफ्टवेयर के जरिए कथित तौर पर भारत में विपक्षी नेताओं और पत्रकारों की जासूसी का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। एडवोकेट मनोहर लाल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है। इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी जांच की मांग की गई है। साथ ही भारत में पेगासस की खरीद पर रोक लगाने की भी मांग की गई है।</p>



<p>पेगासस जासूसी मामले को लेकर देश के कई विपक्षी नेता मोदी सरकार को घेरने में जुटे हुए हैं। कांग्रेस पार्टी संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच कराने की मांग कर रही है। हालांकि सरकार इस जासूसी के मामले को संसद में भी खारिज कर चुकी है।</p>



<p>एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठन ने खुलासा किया है कि इजराइली जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस के जरिए भारत के दो मंत्रियों, 40 से अधिक पत्रकारों, विपक्ष के तीन नेताओं सहित बड़ी संख्या में कारोबारियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के 300 से अधिक मोबाइल नंबर हैक किए गए।</p>



<p><strong>जासूसी के लिए पेगासस के इस्तेमाल पर कितना खर्च?<br></strong>NSO ग्रुप पेगासस स्पाईवेयर का लाइसेंस बेचती है। एक दिन के लिए लाइसेंस की कीमत 70 लाख रुपये तक होती है। एक लाइसेंस से कई स्मार्ट फोन हैक हो सकते हैं। 500 फोन को मॉनिटर किया जा सकता है और एक बार में 50 फोन ही ट्रैक हो सकते हैं। 2016 में पेगासस के जरिए 10 लोगों की जासूसी का खर्च करीब 9 करोड़ रुपये बैठता था। इसमें करीब 4 करोड़ 84 लाख 10 फोन को हैक करने का खर्च था। करीब 3 करोड़ 75 लाख रुपये इंस्टॉलेशन फीस के तौर पर चार्ज किए जाते थे। एक साल की लाइसेंस फीस करीब 60 करोड़ रुपये के आसपास बैठती थी। भारत में करीब 300 लोगों की जासूसी का आरोप पेगासस पर लगा है। यानी कि अगर 2016 के दाम पर हिसाब किताब किया जाए तो ये रकम करीब 2700 करोड़ बैठती है।</p>
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		<item>
		<title>महामारी फैली तो कोर्ट उचित कार्रवाई कर सकता है : सुप्रीम कोर्ट</title>
		<link>https://www.shauryatimes.com/news/111648</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 20 Jul 2021 18:18:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने केरल में बकरीद के मद्देनजर खरीदारी के लिए लॉकडाउन में ढील दिये जाने के राज्य सरकार के फैसले को निरस्त करने से मंगलवार को इनकार कर दिया, लेकिन उसे आगाह किया कि इस फैसले की वजह से यदि कोरोना महामारी फैलती है तो इस पर उचित कार्रवाई हो सकती है। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<div class="wp-block-image"><figure class="aligncenter size-large"><img decoding="async" width="700" height="350" src="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2021/07/suprem-court.jpg" alt="महामारी फैली तो कोर्ट उचित कार्रवाई कर सकता है : सुप्रीम कोर्ट" class="wp-image-111649" srcset="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2021/07/suprem-court.jpg 700w, https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2021/07/suprem-court-300x150.jpg 300w" sizes="(max-width: 700px) 100vw, 700px" /></figure></div>



<p><strong>नयी दिल्ली।</strong> उच्चतम न्यायालय ने केरल में बकरीद के मद्देनजर खरीदारी के लिए लॉकडाउन में ढील दिये जाने के राज्य सरकार के फैसले को निरस्त करने से मंगलवार को इनकार कर दिया, लेकिन उसे आगाह किया कि इस फैसले की वजह से यदि कोरोना महामारी फैलती है तो इस पर उचित कार्रवाई हो सकती है।</p>



<p>मुख्य न्यायाधीश एन वी रमन, की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार को संविधान के अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 141 के तहत निर्णय करना चाहिए और उत्तर प्रदेश की कांवड़ यात्रा से जुड़े मामले में दिये गये दिशानिर्देशों का अनुसरण करना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि धार्मिक और अन्य तरह के दबाव बनाने वाले समूहों को भी नागरिकों के मौलिक अधिकारों में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।</p>



<p>न्यायमूर्ति रमन ने राज्य सरकार के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन उसे आगाह किया कि यदि राज्य सरकार के इस फैसले से महामारी का प्रसार होता है तो न्यायालय उचित कार्रवाई कर सकता है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>सुप्रीम कोर्ट ने मुहर्रम जुलूस की इजाज़त नहीं दी, कहा-फिर कोरोना फैलाने को लेकर होगा बवाल</title>
		<link>https://www.shauryatimes.com/news/82209</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[PMC Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 27 Aug 2020 12:29:31 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने मुहर्रम के मौके पर ताजिया जुलूस निकालने की अनुमित देने वाली याचिका को गुरुवार को खारिज कर दिया और कहा कि अगर ताजिया जुलूस निकालने की इजाजत दी गई तो फिर इसके बाद कोरोना फैलाने के लिए एक विशेष समुदाय को निशाना बनाया जाएगा, जिससे अराजकता  फैलेगी. चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div data-io-article-url="https://www.india.com/hindi-news/india-hindi/supreme-court-declines-permission-to-take-moharram-tajia-procession-during-corona-virus-spread-4123691/">
<div class="articleBody">
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट ने मुहर्रम के मौके पर ताजिया जुलूस निकालने की अनुमित देने वाली याचिका को गुरुवार को खारिज कर दिया और कहा कि अगर ताजिया जुलूस निकालने की इजाजत दी गई तो फिर इसके बाद कोरोना फैलाने के लिए एक विशेष समुदाय को निशाना बनाया जाएगा, जिससे अराजकता  फैलेगी. <img decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-82211" src="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2020/08/Capture-4.jpg" alt="" width="748" height="505" srcset="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2020/08/Capture-4.jpg 748w, https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2020/08/Capture-4-300x203.jpg 300w" sizes="(max-width: 748px) 100vw, 748px" /></strong></p>
<p><strong>चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा, अगर हम देशभर में मुहर्रम पर ताजिया जुलूस निकालने की इजाजत देते हैं तो इससे अराजकता हो जाएगी और एक समुदाय को फिर कोविड-19 महामारी फैलाने के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा. </strong></p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट में उत्तर प्रदेश के सैयद कल्बे जवाद की याचिका पर सुनवाई की जा रही थी, जो देशभर में शनिवार और रविवार को मुहर्रम जुलूस की इजाजत मांग रहे थे. याचिका पर अदालत की तरफ से जगन्नाथ रथ यात्रा फेस्टिवल की अनुमति का हवाला दिया गया था. </strong></p>
<p><strong>चीफ जस्टिस ने कहा, “आप पुरी जगन्नाथ यात्रा का संदर्भ दे रहे हैं, जो एक जगह पर और एक रुट पर तय था. उस केस में हमने खतरे का आकलन कर आदेश दिया था. इसमें दिक्कत ये है कि आप देशभर के लिए आदेश देने की इजाजत मांग रहे हैं.”</strong></p>
<p><strong>चीफ जस्टिस ने यहां तक कह दिया, हम सभी लोगों को स्वास्थ्य को खतरे में नहीं डाल सकते हैं. अगर आपने एक जगह के लिए इजाजत मांगी होती तो हम उस खतरे का आकलन कर सकते थे. सर्वोच्च अदालत ने पूर्ण रूप से देशभर में इजाजत की कठिनाई के बारे में बताते हुए कहा कि राज्य सरकारें भी इस याचिका के पक्ष में नहीं हैं.</strong></p>
</div>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Mathura : राष्ट्रपति ने देखी अक्षयपात्र की रसोई, 32 नौनिहालों को परोसा भोजन</title>
		<link>https://www.shauryatimes.com/news/67024</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[PMC Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 28 Nov 2019 12:01:42 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[kovind in mathura]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[अक्षय पात्र की केन्द्रीयकृत रसोई का भ्रमण करके कार्य प्रणाली को बारीकी से समझा मथुरा : वृंदावन के छटीकरा मार्ग स्थित अक्षयपात्र फाउंडेशन में गुरुवार दोपहर पहुंचे राष्ट्रपति, उनकी पत्नी सविता, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परिषदीय स्कूल के 32 बच्चों को भोजन परोसा। उसके उपरांत उन्होंने चन्द्रोदय मंदिर एवं अक्षयपात्र की रसोई &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify"><span style="color: #800000"><strong><img loading="lazy" decoding="async" class="wp-image-67025 aligncenter" src="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2019/11/kovind-knp_1-300x168.jpg" alt="" width="636" height="356" srcset="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2019/11/kovind-knp_1-300x168.jpg 300w, https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2019/11/kovind-knp_1-768x429.jpg 768w, https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2019/11/kovind-knp_1.jpg 931w" sizes="auto, (max-width: 636px) 100vw, 636px" />अक्षय पात्र की केन्द्रीयकृत रसोई का भ्रमण करके कार्य प्रणाली को बारीकी से समझा</strong></span></p>
<p style="text-align: justify"><strong>मथुरा :</strong> वृंदावन के छटीकरा मार्ग स्थित अक्षयपात्र फाउंडेशन में गुरुवार दोपहर पहुंचे राष्ट्रपति, उनकी पत्नी सविता, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परिषदीय स्कूल के 32 बच्चों को भोजन परोसा। उसके उपरांत उन्होंने चन्द्रोदय मंदिर एवं अक्षयपात्र की रसोई का भी अवलोकन किया। इस दौरान संस्था के चेयरमैन मधु पंडित दास ने गुच्छ देकर सभी का स्वागत किया।</p>
<p style="text-align: justify">भक्ति वेदांत स्वामी मार्ग स्थित अक्षय पात्र परिसर, वृन्दावन में गुरुवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उनकी पत्नी सविता कोविंद, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहुंचे। संस्था के चेयरमैन मधु पंडित दास एवं वाइस चेयरमैन चंचलापति दास ने पुष्प गुच्छ प्रदान कर उनका स्वागत किया। वृंदावन नगर के बाटी, गौंदा आटस, मघेरा, रामताल, देवी आटस, भरतिया व नारायणपुर के शासकीय विद्यालयों से आए 34 बच्चों ने गुलाब का फूल देकर उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया।</p>
<p style="text-align: justify"><img loading="lazy" decoding="async" class="wp-image-67026 aligncenter" src="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2019/11/kovind-knp_2-300x95.jpg" alt="" width="632" height="200" srcset="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2019/11/kovind-knp_2-300x95.jpg 300w, https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2019/11/kovind-knp_2-768x243.jpg 768w, https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2019/11/kovind-knp_2-1024x324.jpg 1024w" sizes="auto, (max-width: 632px) 100vw, 632px" />इसके पश्चात उन्होंने प्रांगण स्थित चंद्रोदय मंदिर में श्रीश्री राधा वृन्दावन चंद्र के दर्शन किये और अक्षय पात्र की केन्द्रीयकृत रसोई का भ्रमण करके उसकी कार्य प्रणाली को बारीकी से समझा। इस दौरान संस्था के चेयरमैन मधु पंडित दास ने उन्हें वृन्दावन स्थित केन्द्रीयकृत रसोई के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसके बाद राष्ट्रपति ने शासकीय विद्यालयों से आये बच्चों को अपने हाथों से भोजन परोसा व अक्षय पात्र की मध्याह्न भोजन वितरण सेवा की सराहना की। इस अवसर पर डेयरी विकास मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी, ऊर्जामंत्री श्रीकांत शर्मा, बेसिक शिक्षामंत्री सतीश द्विवेदी एवं संस्था के उपाध्यक्ष भरतर्षभा दास, युधिष्ठिर कृष्ण दास एवं संघ के प्रांत प्रचारक हरीशजी उपस्थित थे।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सुप्रीम कोर्ट आज दो याचिकाओं पर सुनवाई करेगा</title>
		<link>https://www.shauryatimes.com/news/52503</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[PMC Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 16 Aug 2019 04:38:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[दो याचिकाओं पर सुनवाई करेगा]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[अनुच्छेद 370 का मसला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के सामने है. सुप्रीम कोर्ट आज दो याचिकाओं पर सुनवाई करेगा. पहली याचिका में अनुच्छेद 370 हटाए जाने का विरोध किया गया है. वहीं दूसरी याचिका में कश्मीर में पत्रकारों से सरकार का नियंत्रण हटाने की मांग की गई है. पहली याचिका एमएल शर्मा ने डाली &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h2>अनुच्छेद 370 का मसला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के सामने है. सुप्रीम कोर्ट आज दो याचिकाओं पर सुनवाई करेगा. पहली याचिका में अनुच्छेद 370 हटाए जाने का विरोध किया गया है. वहीं दूसरी याचिका में कश्मीर में पत्रकारों से सरकार का नियंत्रण हटाने की मांग की गई है. पहली याचिका एमएल शर्मा ने डाली है, जिसमें कहा गया है कि सरकार ने आर्टिकल 370 हटाकर मनमानी की है, उसने संसदीय रास्ता नहीं अपनाया, राष्ट्रपति का आदेश असंवैधानिक है. दूसरी याचिका कश्मीर टाइम्स की संपादक अनुराधा भसीन ने दायर की है. इस याचिका में कहा गया है कि अनुच्छेद 370 समाप्त होने के बाद पत्रकारों पर लगाए गए नियंत्रण खत्म किए जाएं.</h2>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter  wp-image-52504" src="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2019/08/download-2019-08-16T100723.449.jpg" alt="" width="1022" height="629" /></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट</title>
		<link>https://www.shauryatimes.com/news/52325</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[PMC Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 13 Aug 2019 04:27:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में सुनवाई]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में आज फिर सुनवाई है. इससे पहले नियमित मामलों की सुनवाई के लिए बनी परंपरा से हटते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को भी राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद की सुनवाई करने का फैसला लिया था. सामान्यता, शीर्ष अदालत सोमवार और शुक्रवार को नए मामलों पर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h3 align="justify">सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में आज फिर सुनवाई है. इससे पहले नियमित मामलों की सुनवाई के लिए बनी परंपरा से हटते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को भी राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद की सुनवाई करने का फैसला लिया था. सामान्यता, शीर्ष अदालत सोमवार और शुक्रवार को नए मामलों पर विचार करती है. इस मामले में संवैधानिक पीठ सुनवाई कर रही है जिसमें पांच जज मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस एस.ए. बोबडे, जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस.ए. नजीर शामिल हैं. वरिष्ठ अधिवक्ता के. पारासरन (93) सुप्रीम कोर्ट में रामलला विराजमान का पक्ष रख रहे हैं. पूर्व में सुनवाई के दौरान तीन जजों ने हिंदू मतों और कानून से उसके संबंध के विभिन्न पहलुओं पर पूछताछ की थी. इसके सबसे महत्वपूर्ण पहलू पर शुक्रवार को बहस हुई.</h3>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter  wp-image-52326" src="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2019/08/2019_7largeimg17_Jul_2019_222037660.jpg" alt="" width="1012" height="623" srcset="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2019/08/2019_7largeimg17_Jul_2019_222037660.jpg 650w, https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2019/08/2019_7largeimg17_Jul_2019_222037660-300x185.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 1012px) 100vw, 1012px" /></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पीड़िता को दिल्ली के एम्स में शिफ्ट करने का आदेश: सुप्रीम कोर्ट</title>
		<link>https://www.shauryatimes.com/news/51440</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[PMC Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 05 Aug 2019 09:17:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[पीड़िता को दिल्ली के एम्स में शिफ्ट करने का आदेश]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता को इलाज के लिए दिल्ली के एम्स में शिफ्ट करने का आदेश दे दिया है। फिलहाल वह लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में दाखिल है। &#160;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता को इलाज के लिए दिल्ली के एम्स में शिफ्ट करने का आदेश दे दिया है। फिलहाल वह लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में दाखिल है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter  wp-image-51441" src="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2019/08/download-2019-08-05T144525.276.jpg" alt="" width="1171" height="789" /></p>
<div class="ad-dt"></div>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सुप्रीम कोर्ट एक जुलाई से खुल रहा: संवेदनशील मुकदमों</title>
		<link>https://www.shauryatimes.com/news/47062</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[PMC Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 29 Jun 2019 08:28:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[एक जुलाई से खुल रहा]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट छह सप्ताह के अवकाश के बाद एक जुलाई से खुल रहा है. गर्मी छुट्टी के बाद सुप्रीम कोर्ट को अयोध्या और राफेल जैसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुकदमों से निपटना होगा. राहुल गांधी ने राफेल मामले में ‘चौकीदार चोर है’ टिप्पणी को लेकर अपने खिलाफ चल रही अवमानना की कार्रवाई के लिए शीर्ष अदालत &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>सुप्रीम कोर्ट छह सप्ताह के अवकाश के बाद एक जुलाई से खुल रहा है. गर्मी छुट्टी के बाद सुप्रीम कोर्ट को अयोध्या और राफेल जैसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुकदमों से निपटना होगा. राहुल गांधी ने राफेल मामले में ‘चौकीदार चोर है’ टिप्पणी को लेकर अपने खिलाफ चल रही अवमानना की कार्रवाई के लिए शीर्ष अदालत से माफी मांग ली थी, लेकिन मामले में सुनवाई अभी होनी है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट 31 न्यायाधीशों के साथ एक जुलाई से अपना काम शुरू करेगा. संभावना है कि वह राफेल मामले से जुड़ी समीक्षा याचिकाओं पर फैसला सुनाएगा.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter  wp-image-47063" src="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2019/06/download-2019-06-29T135726.220.jpg" alt="" width="900" height="599" /></p>
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		<item>
		<title>सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज: महिला वकीलों की सुरक्षा</title>
		<link>https://www.shauryatimes.com/news/46878</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[PMC Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 28 Jun 2019 07:08:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[महिला वकीलों की सुरक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की अध्यक्ष दरवेश यादव की हत्या के बाद कोर्ट परिसर में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है. इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा. इससे पहले दरवेश हत्याकांड की सीबीआई जांच कराने की मांग वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुका है.]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की अध्यक्ष दरवेश यादव की हत्या के बाद कोर्ट परिसर में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है. इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा. इससे पहले दरवेश हत्याकांड की सीबीआई जांच कराने की मांग वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुका है.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter  wp-image-46879" src="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2019/06/400124-supreme-court.jpg" alt="" width="1129" height="635" srcset="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2019/06/400124-supreme-court.jpg 970w, https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2019/06/400124-supreme-court-300x169.jpg 300w, https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2019/06/400124-supreme-court-768x432.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1129px) 100vw, 1129px" /></p>
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		<title>अयोध्या राम मंदिर निर्माण: साठ से 65 प्रतिशत तक कार्य हो चुका हैं, राम मंदिर निर्माण के लिए तराशे गए पत्थरों पर भिड़े</title>
		<link>https://www.shauryatimes.com/news/16304</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[PMC Web_Wing]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 29 Oct 2018 05:23:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[अयोध्या राम मंदिर]]></category>
		<category><![CDATA[जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद]]></category>
		<category><![CDATA[न्यायमूर्ति]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट अयोध्या की राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि को तीन भागों में बांटने वाले 2010 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई कर सकता है. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल एवं न्यायमूर्ति के एम जोसफ की पीठ इस मामले में दायर अपीलों पर सुनवाई करेगी. शीर्ष अदालत &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>सुप्रीम कोर्ट अयोध्या की राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि को तीन भागों में बांटने वाले 2010 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई कर सकता है. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल एवं न्यायमूर्ति के एम जोसफ की पीठ इस मामले में दायर अपीलों पर सुनवाई करेगी. शीर्ष अदालत ने 27 सितंबर को 1994 के अपने उस फैसले पर पुनर्विचार के मुद्दे को पांच न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ को सौंपने से इंकार कर दिया था जिसमें कहा गया था कि ‘मस्जिद इस्लाम का अनिवार्य अंग नहीं’ है. यह मुद्दा अयोध्या भूमि विवाद की सुनवाई के दौरान उठा था.<img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter  wp-image-16305" src="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2018/10/307713-ram-mandir.jpg" alt="" width="760" height="427" srcset="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2018/10/307713-ram-mandir.jpg 970w, https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2018/10/307713-ram-mandir-300x169.jpg 300w, https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2018/10/307713-ram-mandir-768x432.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 760px) 100vw, 760px" /></strong></p>
<p><strong>राम मंदिर निर्माण के लिए तराशे गए पत्थरों पर भिड़े</strong><br />
<strong>उधर, अयोध्या राम मंदिर निर्माण कार्यशाला में पत्थर तराशने का कार्य सत्र 1990 से अबतक लगभग एक लाख घन फुट तराशे जा चुके हैं और निरंतर चल रहा है. विहिप की प्रान्तीय प्रवक्ता शरद शर्मा ने बताया की मंदिर निर्माण के लिए साठ से 65 प्रतिशत तक कार्य हो चुका हैं. पूरे मंदिर निर्माण के लिये एक लाख 75 हजार घन फुट पत्थर का लगना है. पत्थरों का आना लगा रहता है. यहां पर दूर प्रदेश से श्रद्धालु आकर दर्शन करते हैं. राम मंदिर निर्माण के लिए अपनी भावना को प्रकट करते हुए अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त किया है</strong></p>
<p><strong>अयोध्या निर्मोही अखाड़ा के पक्षकार ने कहा कि निर्मोही अखाड़ा अपना पक्ष रखती है और विश्व हिंदू परिषद के इन तराशे हुए पत्थरों का हम इस्तेमाल नहीं करेंगे. हमारे पक्ष में फैसला आएगा तो हम राम जी की कृपा से अपनी व्यवस्था हम स्वयं करेंगे.</strong></p>
<p><strong>दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में पीठ ने 2:1 के बहुमत से सुनाई था फैसला</strong><br />
<strong>शीर्ष अदालत के तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने 2:1 के बहुमत से अपने फैसले में कहा कि अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में दीवानी वाद का निर्णय साक्ष्यों के आधार पर होगा और पूर्व का फैसला इस मामले में प्रासंगिक नहीं है.</strong></p>
<p><strong>न्यायमूर्ति अशोक भूषण ने अपनी और प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की ओर से फैसला सुनाते हुए कहा था कि उसे यह देखना होगा कि 1994 में पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने किस संदर्भ में यह फैसला सुनाया था. </strong></p>
<p><strong>दूसरी ओर, खंडपीठ के तीसरे सदस्य न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर ने दोनों न्यायाधीशों से असहमति व्यक्त करते हुये कहा कि धार्मिक आस्था को ध्यान में रखते हुए यह फैसला करना होगा कि क्या मस्जिद इस्लाम का अंग है और इसके लिये विस्तार से विचार की आवश्यकता है. </strong></p>
<p><strong>तीनों पक्षों को बराबर-बराबर जमीन देने का आया था फैसला</strong><br />
<strong>अदालत ने 27 सितंबर को कहा था कि भूमि विवाद पर दीवानी वाद की सुनवाई तीन न्यायाधीशों की पीठ 29 अक्टूबर को करेगी. मस्जिद इस्लाम का अनिवार्य अंग है या नहीं, यह मुद्दा उस वक्त उठा जब तीन न्यायाधीशों की पीठ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई कर रही थी. सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने 30 सितंबर, 2010 को 2:1 के बहुमत वाले फैसले में कहा था कि 2.77 एकड़ जमीन को तीनों पक्षों- सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला में बराबर-बराबर बांट दिया जाये.</strong></p>
<p>&nbsp;</p>
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