सेहत के लिए व्रतों का वार्षिक चक्र जानिए – Shaurya Times | शौर्य टाइम्स https://www.shauryatimes.com Latest Hindi News Portal Sat, 13 Feb 2021 06:22:06 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.2 सेहत के लिए व्रतों का वार्षिक चक्र जानिए, चमत्कारिक लाभ मिलेगा https://www.shauryatimes.com/news/102421 Sat, 13 Feb 2021 10:30:36 +0000 http://www.shauryatimes.com/?p=102421 राजा भोज के राजमार्तण्ड में 24 व्रतों का उल्लेख है। हेमादि में 700 व्रतों के नाम बताए गए हैं। गोपीनाथ कविराज ने 1622 व्रतों का उल्लेख अपने व्रतकोश में किया है। व्रतों के प्रकार तो मूलत: तीन है:- 1. नित्य, 2. नैमित्तिक और 3. काम्य। परंतु उपवास के मुख्‍य 13 प्रकार है:- 1.प्रात: उपवास, 2.अद्धोपवास, 3.एकाहारोपवास, 4.रसोपवास, 5.फलोपवास, 6.दुग्धोपवास, 7.तक्रोपवास, 8.पूर्णोपवास, 9.साप्ताहिक उपवास, 10.लघु उपवास, 11.कठोर उपवास, 12.टूटे उपवास, 13.दीर्घ उपवास। परंतु हम यहां पर व्रतों का वर्षिक चक्र संक्षिप्त में बता रहे हैं जिन्हें करने से निरोगी काया प्राप्त की जा सकती है।

इन निम्मलिखित में से किसी भी एक को जीवनभर पाल लिया तो हर तरह के रोग और शोक मिट जाते हैं।
व्रतों का वार्षिक चक्र है :-
1. साप्ताहिक व्रत : सप्ताह में एक दिन व्रत रखना चाहिए। यह सबसे उत्तम है। मतलब आपको माह में 4 और वर्ष में 48 बार उपवास करना है।
2. पाक्षिक व्रत : 15-15 दिन के दो पक्ष होते हैं कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष। प्रत्येक पक्ष में चतुर्थी, एकादशी, त्रयोदशी, अमावस्या और पूर्णिमा के व्रत महतवपूर्ण होते हैं। उक्त में से किसी भी एक व्रत को करना चाहिए। मतलब आपको माह में 2 और वर्ष में 24 उपवास करना होंगे। यदि अधिकमास हुआ तो 26 उपवास करना होंगे।
3. त्रैमासिक : वैसे त्रैमासिक व्रतों में प्रमुख है नवरात्रि के व्रत। हिंदू माह अनुसार पौष, चैत्र, आषाढ़ और अश्विन मान में नवरात्रि आती है। उक्त प्रत्येक माह की प्रतिपदा यानी एकम् से नवमी तक का समय नवरात्रि का होता है। इन नौ दिनों तक व्रत और उपवास रखने से सभी तरह के क्लेश समाप्त हो जाते हैं। मतलब आपको वर्ष में 36 उपवास करना होंगे।
4. छह मासिक व्रत : चैत्र माह की नवरात्रि को बड़ी नवरात्रि और अश्विन माह की नवरात्रि को छोटी नवरात्रि कहते हैं। उक्त दोंनों के बीच छह माह का अंतर होता है। मतलब यह कि आपको हर छह माह में मात्र 9 दिन ही व्रत रखना है और वर्ष में 18 दिन उपवास रखना होंगे।
5. वार्षिक व्रत : वार्षिक व्रतों में पूरे श्रावण मास में व्रत रखने का विधान है। इसके अलावा जो लोग चतुर्मास करते हैं उन्हें जिंदगी में किसी भी प्रकार का रोग और शोक नहीं होता है। इससे यह सिद्ध हुआ की व्रतों में ‘श्रावण माह’ महत्वपूर्ण होता है। सोमवार नहीं पूरे श्रावण माह में व्रत रखने से हर तरह के शारीरिक और मानसिक कलेश मिट जाते हैं।
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