3 बरी – Shaurya Times | शौर्य टाइम्स https://www.shauryatimes.com Latest Hindi News Portal Mon, 27 Aug 2018 09:00:47 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.2 साबरमती एक्सप्रेस केसः SIT कोर्ट ने 2 को दी उम्रकैद, 3 बरी https://www.shauryatimes.com/news/9531 Mon, 27 Aug 2018 09:00:47 +0000 http://www.shauryatimes.com/?p=9531 साल 2002 में साबरमती एक्सप्रेस को जलाए जाने के मामले में एसआईटी कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए तीन लोगों को बरी कर दिया है. जबकि 2 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है. इस मामले में आज पांच लोगों पर फैसला सुनाया गया है.साल 2002 में साबरमती एक्सप्रेस को जलाए जाने के मामले में एसआईटी कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए तीन लोगों को बरी कर दिया है. जबकि 2 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है. इस मामले में आज पांच लोगों पर फैसला सुनाया गया है.  इससे पहले गुजरात हाई कोर्ट ने 11 दोषियों की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में तब्दील कर दिया था. आपको बताते चलें कि पंद्रह साल पहले 27 फरवरी 2002 को गुजरात के गोधरा में 59 लोगों की आग में जलकर मौत हो गई. ये सभी 'कारसेवक' थे, जो अयोध्या से लौट रहे थे.  ऐसे हुई थी घटना  27 फरवरी की सुबह जैसे ही साबरमती एक्सप्रेस गोधरा रेलवे स्टेशन के पास पहुंची, उसके एक कोच से आग की लपटें उठने लगीं और धुएं का गुबार निकलने लगा. साबरमती ट्रेन के S-6 कोच के अंदर भीषण आग लगी थी. जिससे कोच में मौजूद यात्री उसकी चपेट में आ गए थे. इनमें से ज्यादातर वो कारसेवक थे, जो राम मंदिर आंदोलन के तहत अयोध्या में एक कार्यक्रम से लौट रहे थे. आग से झुलसकर 59 कारसेवकों की मौत हो गई थी. जिसने इस घटना को बड़ा राजनीतिक रूप दे दिया और गुजरात के माथे पर एक अमिट दाग लगा दिया था.  मोदी ने बुलाई थी बैठक  जिस वक्त ये हादसा हुआ, नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे. उस वक्त इस घटना को एक साजिश के तौर पर देखा गया था. घटना के बाद शाम में ही मोदी ने बैठक बुलाई थी. बैठक को लेकर तमाम सवाल उठे. आरोप लगे कि बैठक में 'क्रिया की प्रतिक्रिया' होने की बात सामने आई थी.  गोधरा कांड को माना था साजिश  ट्रेन की आग को साजिश माना गया था. ट्रेन में भीड़ द्वारा पेट्रोल डालकर आग लगाने की बात गोधरा कांड की जांच कर रहे नानवती आयोग ने भी मानी थी. मगर, गोधरा कांड के अगले ही दिन मामला अशांत हो गया था. 28 फरवरी को गोधरा से कारसेवकों के शव खुले ट्रक में अहमदाबाद लाए गए थे. ये घटना भी चर्चा का विषय बनी थी. इन शवों को परिजनों के बजाय विश्व हिंदू परिषद को सौंपा गया था. जल्दी ही गोधरा ट्रेन की इस घटना ने गुजरात में दंगों का रूप ले लिया था.  एसआईटी कोर्ट में केस  एसआईटी की विशेष अदालत ने एक मार्च 2011 को इस मामले में 31 लोगों को दोषी करार दिया था जबकि 63 को बरी कर दिया था. इनमें 11 दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई थी जबकि 20 को उम्रकैद की सजा हुई थी. बाद में उच्च न्यायालय में कई अपील दायर कर दोषसिद्धी को चुनौती दी गई जबकि राज्य सरकार ने 63 लोगों को बरी किए जाने को चुनौती दी थी.

इससे पहले गुजरात हाई कोर्ट ने 11 दोषियों की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में तब्दील कर दिया था. आपको बताते चलें कि पंद्रह साल पहले 27 फरवरी 2002 को गुजरात के गोधरा में 59 लोगों की आग में जलकर मौत हो गई. ये सभी ‘कारसेवक’ थे, जो अयोध्या से लौट रहे थे.

ऐसे हुई थी घटना

27 फरवरी की सुबह जैसे ही साबरमती एक्सप्रेस गोधरा रेलवे स्टेशन के पास पहुंची, उसके एक कोच से आग की लपटें उठने लगीं और धुएं का गुबार निकलने लगा. साबरमती ट्रेन के S-6 कोच के अंदर भीषण आग लगी थी. जिससे कोच में मौजूद यात्री उसकी चपेट में आ गए थे. इनमें से ज्यादातर वो कारसेवक थे, जो राम मंदिर आंदोलन के तहत अयोध्या में एक कार्यक्रम से लौट रहे थे. आग से झुलसकर 59 कारसेवकों की मौत हो गई थी. जिसने इस घटना को बड़ा राजनीतिक रूप दे दिया और गुजरात के माथे पर एक अमिट दाग लगा दिया था.

मोदी ने बुलाई थी बैठक

जिस वक्त ये हादसा हुआ, नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे. उस वक्त इस घटना को एक साजिश के तौर पर देखा गया था. घटना के बाद शाम में ही मोदी ने बैठक बुलाई थी. बैठक को लेकर तमाम सवाल उठे. आरोप लगे कि बैठक में ‘क्रिया की प्रतिक्रिया’ होने की बात सामने आई थी.

गोधरा कांड को माना था साजिश

ट्रेन की आग को साजिश माना गया था. ट्रेन में भीड़ द्वारा पेट्रोल डालकर आग लगाने की बात गोधरा कांड की जांच कर रहे नानवती आयोग ने भी मानी थी. मगर, गोधरा कांड के अगले ही दिन मामला अशांत हो गया था. 28 फरवरी को गोधरा से कारसेवकों के शव खुले ट्रक में अहमदाबाद लाए गए थे. ये घटना भी चर्चा का विषय बनी थी. इन शवों को परिजनों के बजाय विश्व हिंदू परिषद को सौंपा गया था. जल्दी ही गोधरा ट्रेन की इस घटना ने गुजरात में दंगों का रूप ले लिया था.

एसआईटी कोर्ट में केस

एसआईटी की विशेष अदालत ने एक मार्च 2011 को इस मामले में 31 लोगों को दोषी करार दिया था जबकि 63 को बरी कर दिया था. इनमें 11 दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई थी जबकि 20 को उम्रकैद की सजा हुई थी. बाद में उच्च न्यायालय में कई अपील दायर कर दोषसिद्धी को चुनौती दी गई जबकि राज्य सरकार ने 63 लोगों को बरी किए जाने को चुनौती दी थी.

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