allahabad-high-court – Shaurya Times | शौर्य टाइम्स https://www.shauryatimes.com Latest Hindi News Portal Tue, 17 Sep 2019 09:56:35 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.2 गोरखपुर में 45 दुकानों के ध्वस्तीकरण पर हाईकोर्ट की रोक https://www.shauryatimes.com/news/56442 Tue, 17 Sep 2019 09:56:35 +0000 http://www.shauryatimes.com/?p=56442 प्रयागराज : इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मंगलवार को गोरखपुर जिले की फरेंदा तहसील में सड़क किनारे स्थित 45 दुकानों के ध्वस्तीकरण पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने राज्य सरकार व स्थानीय प्रशासन से इस मामले में दाखिल याचिका पर जवाब भी मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल एवं न्यायमूर्ति राजीव मिश्र की खंडपीठ ने दुकानदारों की याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी व अधिवक्ता विभू राय को सुनकर दिया।
वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने कोर्ट को बताया कि उन्हें तहसील के मुख्य मार्ग पर दुकानें आवंटित की गई थीं। सड़क चौड़ीकरण के नाम पर अब इन्हें ध्वस्त किया जा रहा है जबकि याचियों की दुकाने पहले से ही सड़क के 35 फिट के बाद स्थित है। ऐसी स्थिति में सड़क चौड़ीकरण के लिए इन दुकानों को तोड़ने की कोई जरूरत नहीं है। उनका कहना है कि प्रशासन इन दुकानों को तोड़कर नई दुकानें बनाना चाहता है और याचियों को आवंटित दुकानों से हटाया नहीं जा सकता। इसलिए वह इन्हें सड़क चौड़ीकरण के नाम पर ध्वस्त करना चाहता है।

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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : शादी के एक साल के भीतर आपसी सहमति से तलाक नहीं https://www.shauryatimes.com/news/41988 Mon, 06 May 2019 17:58:27 +0000 http://www.shauryatimes.com/?p=41988 प्रयागराज :  इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि शादी के एक साल के भीतर आपसी सहमति से तलाक का मुकदमा दाखिल नहीं किया जा सकता। धारा 13बी के तहत एक साल के बाद ही सहमति से तलाक हो सकता है। यह फैसला न्यायमूर्ति एसके गुप्ता तथा न्यायमूर्ति पीके श्रीवास्तव की खंडपीठ ने प्रयागराज के अर्पित गर्ग व आयुषी जायसवाल के बीच तलाक से इंकार करने के परिवार न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ दाखिल अपील को खारिज करते हुए दिया है। दोनों की शादी 9 जुलाई 2018 को हुई। 12 अक्टूबर 18 को अलग रहने लगे और 20 दिसम्बर 18 को आपसी सहमति से तलाक का मुकदमा दाखिल किया गया।

परिवार न्यायालय ने तलाक के मुकदमे के लिए निर्धारित एक साल की अवधि से पहले दाखिल मुकदमे को समय पूर्व मानते हुए वापस कर दिया, जिसे अपील में चुनौती दी गयी थी। अपीलार्थी का कहना था कि दोनों का एक साथ रहना सम्भव नहीं है। वे अलग रहना चाहते हैं। इसलिए दोनों ही तलाक के लिए राजी है। एक साल की वैधानिक अड़चन दूर की जाय। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि कोर्ट वैधानिक व्यवस्था को माफ नहीं कर सकती। तलाक के लिए एक साल की अवधि का बीतना बाध्यकारी है।

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