Avoid yourself – save others – Shaurya Times | शौर्य टाइम्स https://www.shauryatimes.com Latest Hindi News Portal Fri, 07 Aug 2020 10:03:18 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.2 Awareness : खुद बचें-दूसरों को भी बचाएं, पीपीई किट इधर-उधर न फैलाएं https://www.shauryatimes.com/news/81348 Fri, 07 Aug 2020 10:02:09 +0000 http://www.shauryatimes.com/?p=81348 खुले में कहीं भी पीपीई किट फेंकने से संक्रमण का बढ़ जाता है खतरा
ढक्कन बंद पीली डस्टबिन में ही डालें, 48 घंटे में निस्तारण जरूरी

लखनऊ : कोविड-19 के खिलाफ जंग में जुटे स्वास्थ्यकर्मियों, अस्पतालों व अन्य कार्यस्थलों के स्टाफ को सुरक्षित बनाने में पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्यूपमेंट (पीपीई किट) की बड़ी भूमिका है, बशर्ते इस्तेमाल के बाद उसका सही तरीके से निस्तारण किया जाए। इस्तेमाल के बाद इधर-उधर खुले में छोड़ देने से संक्रमण का खतरा और अधिक बढ़ जाता है। अस्पतालों, एम्बुलेंस, एयरपोर्ट और यहाँ तक कि श्मसान घाटों तक पर खुले में फेंकी गयी पीपीई किट के बारे में चिकित्सकों का साफ़ कहना है कि ऐसा करके हम खुद को बचा नहीं रहें हैं बल्कि अपने साथ ही दूसरों को भी मुश्किल में डालने का काम कर रहे हैं।

​किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष व इन्डियन कालेज ऑफ़ एलर्जी अस्थमा एंड एप्लाइड इम्युनोलॉजी के अध्यक्ष डॉ.सूर्यकान्त का कहना है कि इस्तेमाल की गयी पीपीई किट से कम से कम दो दिन तक संक्रमण का पूरा खतरा रहता है। इसलिए किट का चाहे मास्क हो या गाउन उसको कदापि इधर-उधर न फेंके बल्कि उसके लिए निर्धारित ढक्कन बंद पीली डस्टबिन में ही डालें और अस्पतालों को भी चाहिए कि इस बायो मेडिकल वेस्ट (अस्पताल के कचरे) के निस्तारण की व्यवस्था दुरुस्त रखें। उनका कहना है कि ऐसा देखने में आया है कि कुछ लोग किट को इस्तेमाल के बाद इधर-उधर फेंक देते हैं जो कि बहुत ही गंभीर मामला है। ऐसे लोगों के खिलाफ तो आपदा अधिनियम के तहत कार्रवाई होनी चाहिए क्योंकि इससे जहाँ संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, वहीँ इसका सीधे तौर पर पर्यावरण पर भी असर पड़ता है जो कि लोगों के जीवन को प्रभावित कर सकता है। अस्पतालों ने वैसे इस काम को एजेंसियों के जिम्मे कर रखा है जो कि कचरे को निस्तारित करने के लिए इन्सीनरेटर मशीन लगा रखी हैं, जहाँ पर इसका समुचित निस्तारण होता है ताकि किसी तरह के प्रदूषण का खतरा न रहे।

​किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के एनेस्थीजीआलजी एंड क्रिटिकल केयर विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. तन्मय तिवारी का कहना है कि इसके लिए केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बाकायदा गाइड लाइन जारी की है कि पीपीई किट के इस्तेमाल और निस्तारण में किस तरह से सावधानी बरतनी है। उसके मुताबिक़ ही इसके निस्तारण में सभी की भलाई है। उनका कहना है कि देश में इस समय रोजाना लाखों पीपीई किट का इस्तेमाल हो रहा है और यह एक बार ही इस्तेमाल के लिए हैं। इसलिए इस्तेमाल के बाद इसको मशीन के जरिये ही नष्ट किया जाना सबसे उपयुक्त तरीका है। उनका कहना है कि अगर कोई भी पीपीई किट को इस्तेमाल के बाद इधर-उधर खुले में फेंक देगा तो उसका यह कृत्य इस लड़ाई को कमजोर बना सकता है। इसलिए खुद के साथ दूसरों को भी सुरक्षित बनाने के लिए जरूरी है कि एक जिम्मेदार नागरिक की भांति इस्तेमाल के बाद किट को ढक्कन बंद डस्टबिन में ही डालें।

पीपीई किट में क्या-क्या है शामिल : इस किट में सिर से पांव तक को पूरी तरह से कवर करने का पूरा ध्यान रखा गया है। इसमें सिर को ढकने के लिए कैप, गागल्स/फेस शील्ड, ट्रिपल लेयर मास्क, ग्लव्स, गाउन (एप्रन के साथ व एप्रन के बिना दोनों तरह से) और शू कवर शामिल हैं। इसमें से कोई भी चीज को इस्तेमाल के बाद खुले में फेंकने पर पूरी तरह से मनाही है, क्योंकि इसके संपर्क में आने से कोई भी संक्रमण की जद में आ सकता है।

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