Ayurveda gave the mode of surgery: Yogi – Shaurya Times | शौर्य टाइम्स https://www.shauryatimes.com Latest Hindi News Portal Mon, 04 Jan 2021 09:20:46 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.2 आयुर्वेद ने ही दी सर्जरी की विधा : CM योगी https://www.shauryatimes.com/news/97301 Mon, 04 Jan 2021 09:18:56 +0000 http://www.shauryatimes.com/?p=97301 सीएम ने 1,065 आयुर्वेद-होम्योपैथिक चिकित्साधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम को किया सम्बोधित

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले दिनों कुछ चिकित्सकों ने विरोध किया था कि आयुर्वेद के लोगों को ऑपरेशन करने की इजाजत क्यों दी जा रही है। मुझे उनकी बुद्धि पर तरस आ रहा था। इस धरती का पहला सर्जन आयुर्वेद का ही था और आयुर्वेद ने ही ये सर्जरी की विधा को दिया है, उन्हें यह बताया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि लेकिन, आयुष मिशन के साथ जुड़े हुए चाहे वह आयुर्वेद हो, यूनानी हो या होम्योपैथिक हो इन परम्परागत चिकित्सा पद्धति से जुड़े लोगों ने विगत कई सदियों से कोई भी नया शोध करने का प्रयास नहीं किया। इन्होंने अपने महत्व को आगे बढ़ाने का प्रयास नहीं किया। इसलिए ये एलोपैथ की तुलना में पिछड़ गए। मुख्यमंत्री सोमवार को अपने सरकारी आवास पर उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयुष विभाग के नव चयनित 1,065 आयुर्वेद-होम्योपैथिक चिकित्सा अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने 142 योग वैलनेस सेंटर का उद्घाटन तथा उत्तर प्रदेश आयुष टेलीमेडिसिन का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में लखनऊ के अतिरिक्त अन्य जनपदों के एनआईसी में उपस्थित नव चयनित आयुर्वेद होम्योपैथिक चिकित्सा अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों-जिलाधिकारियों के माध्यम से नियुक्ति पत्र वितरित किए गए।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री ने कहा कि परम्परागत चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि हम लोग केवल दूसरों द्वारा जो सब्जबाग दिखाए जाते हैं, प्रचार किए जाते हैं उसके पीछे भागते हैं। जितनी व्यापक संभावनाएं हैं, उस पर ध्यान नहीं देते। मुख्यमंत्री ने कहा कि वास्तव में आयुष मिशन भारत की परम्परागत चिकित्सा पद्धति को प्रेरित और प्रोत्साहित करने का बहुत अच्छा माध्यम है। कोरोना कालखंड में तो लोगों को भारत की परम्परागत चिकित्सा विधा के बारे में सोचने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने कहा कि एक वर्ष पहले जब किसी के घर में कोई मेहमान आता था और उससे चाय, पकवान आदि के बारे में नहीं पूछा जाता था, तो वह उसमें नाराजगी देखने को मिलती थी। अगर त​ब काढ़ा के बारे में चर्चा भी कर दी जाती थी तो माना जाता था कि उस व्यक्ति की सोच बहुत पुरानी है। लेकिन, आज कोरोना ने हम सभी को जब बचाव का एक मौका दिया तो कहीं भी चले जाइए, घर से लेकर निजी संस्थान, विद्यालय से लेकर विश्वविद्यालय, ग्राम पंचायत की बैठक से लेकर नीति आयोग की मीटिंग तक, हर स्तर पर आजकल चाय, कॉफी और अन्य कुछ नहीं सबसे अधिक मांग आयुर्वेद के काढ़ा की हो रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज 142 योग वेलनेंस केन्द्रों का शुभारम्भ किया जा रहा है। यहां पर हमने योग प्रशिक्षक को 27,000 रुपये और उनके सहायक को 10,000 रुपये मासिक देने की प्रक्रिया प्रारंभ की है। इसको व्यवसाय ना बनाकर एक मिशन मोड में लेकर चलें। उन्होंने कहा कि इनके कार्यों की समीक्षा होगी और समीक्षा के अनुसार इनके कार्यकाल को आगे बढ़ाने का कार्य होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि वहीं जिन आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक चिकित्सा अधिकारियों की तैनाती हो रही है, वह इसको केवल सरकारी नौकरी मानकर औपचारिकताएं बंद कर दें। उन पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। केन्द्र और प्रदेश सरकार ने उन पर बहुत बड़ा विश्वास किया है। कई वर्षों के बाद लगभग 1,100 चिकित्सक एक साथ आ रहे हैं। आयुर्वेद और होम्योपैथी दोनों क्षेत्रों में व्यापक संभावनाएं हैं, इस पर कार्य किया जाए। जब तक किसी कार्य को मिशन मोड पर नहीं लिया जाए तो जीवन में भले ही कोई स्थान प्राप्त कर लिया जाए, लेकिन इसके बाद की स्थिति भयावह होती है। एक चिकित्सा अधिकारी के रूप में नवनियुक्त अधिकारी अपने फील्ड में बेहतरीन प्रदर्शन करेंगे, शासन की इसे उम्मीद है।

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