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	<title>enemies of enemies were Amar Singh! &#8211; Shaurya Times | शौर्य टाइम्स</title>
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		<title>दोस्तों के दोस्त, दुश्मनों के दुश्मन थे अमर सिंह!</title>
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		<pubDate>Sun, 02 Aug 2020 17:52:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सभी राजनैतिक दलों के नेताओं से उनके व्यक्तिगत संबंध थे -सुरेश बहादुर सिंह लखनऊ : बुलंदियों पर पहुंचना कोई अमर सिंह से सीखे। वह दोस्ती व दुश्मनी एक शिद्दत से निभाते थे। वह दोस्तों के दोस्त थे और दुश्मनों के दुश्मन। जिससे एक बार दोस्ती कर ली, उससे ईमानदारी से निभाया और जब यही दोस्ती &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify"><span style="color: #800000"><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="wp-image-81159 aligncenter" src="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2020/08/amar_3-300x162.jpg" alt="" width="852" height="460" srcset="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2020/08/amar_3-300x162.jpg 300w, https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2020/08/amar_3.jpg 741w" sizes="(max-width: 852px) 100vw, 852px" />सभी राजनैतिक दलों के नेताओं से उनके व्यक्तिगत संबंध थे</strong></span></p>
<p style="text-align: justify"><strong>-सुरेश बहादुर सिंह</strong></p>
<p style="text-align: justify"><strong>लखनऊ :</strong> बुलंदियों पर पहुंचना कोई अमर सिंह से सीखे। वह दोस्ती व दुश्मनी एक शिद्दत से निभाते थे। वह दोस्तों के दोस्त थे और दुश्मनों के दुश्मन। जिससे एक बार दोस्ती कर ली, उससे ईमानदारी से निभाया और जब यही दोस्ती दुश्मनी में बदल गई तो उसको बर्बाद करने में भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने राजनीति में पूंजीपतियों और फिल्मी कलाकारों को जोड़कर राजनीति की दशा और दिशा दोनों बदल दी। उन्होंने समाजवाद की राजनीति को पूंजीवाद की राजनीति से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। जोड़-तोड़ की राजनीति में उन्हें महारत हासिल थी।</p>
<p style="text-align: justify">समाजवादी पार्टी से जुड़कर हालांकि वह राजनीति की बुलन्दियों पर पहुंचे थे, फिर भी अन्य दलों में भी उनकी अच्छी खासी घुसपैठ थी। सभी राजनैतिक दलों के नेताओं से उनके व्यक्तिगत संबंध थे। इन्हीं व्यक्तिगत संबंधों की वजह से वह राजनैतिक गलियारों में अहम किरदार की भूमिका में नजर आते थे। वह अपनी पसंद और नापसंद को जाहिर करने में कोई संकोच नहीं करते थे। मुझे भी कई अवसरों पर उनसे मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। ऐसे ही एक अवसर पर जब वरिष्ठ पत्रकार स्व. गिरधारी लाल पहवा ने मुझे उनसे मिलवाया तो उन्होंने तुरन्त ही कहा कि इन्हें कौन नहीं जानता। इनके सीने में एक तरफ राजनाथ सिंह तो दूसरी तरफ राजाभैया रहते हैं। मेरे लिए इनके दिल में कोई जगह नहीं है, हालांकि मैंने उन्हें पूरी सफाई देने की कोशिश की लेकिन उनका यह मलाल हमेशा बना रहा, हालांकि वह हमेशा मुझसे मजाकिया अन्दाज में मिलते थे।</p>
<h4 style="text-align: justify"><span style="color: #800000"><img decoding="async" class="wp-image-81160 aligncenter" src="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2020/08/amar_2-300x194.jpg" alt="" width="722" height="467" srcset="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2020/08/amar_2-300x194.jpg 300w, https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2020/08/amar_2.jpg 598w" sizes="(max-width: 722px) 100vw, 722px" />गजब का भाव, गजब प्रभाव और क़द्दावरी थी उनमें</span></h4>
<p style="text-align: justify">मुझे एक अन्य वाकया याद है जिससे उनके राजनीतिक कद का अन्दाजा लगाया जा सकता है। एक हिन्दी दैनिक में कार्य करते समय मुझे उनका इंटरव्यू करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। सपा नेता व पूर्व मंत्री अरविन्द सिंह गोप ने मुझे उनसे इंटरव्यू करने का समय दिलवाया। स्व. अमर सिंह अति व्यस्त थे इसीलिए उन्होंने मुझे अपने गाड़ी में बैठकर एयरपोर्ट तक चलने के लिए कहा। मैं उनके साथ गाड़ी में बैठकर कैण्ट पहुंच ही रहा था कि सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव का उनके पास फोन आ गया। श्री यादव किसी मुद्दे पर उनसे राय लेना चाहते थे। श्री सिंह ने तुरन्त ही फोन पर उनसे कहा कि आप दवा खाकर सो जाइए। मैं दिल्ली जाकर कल टीवी चैनल्स पर अपने बयान दे दूंगा, उसी बयान को आप भी जारी कर दीजिएगा। इस वाकये से खुद ही अन्दाजा लगाया जा सकता है कि वह समाजवादी पार्टी के कितने कद्दावर नेता थे। एक वक्त ऐसा भी था जब सदी के महानायक अमिताभ बच्चन वही बोलते थे, जो अमर सिंह उनसे कहते थे।</p>
<h4 style="text-align: justify"><span style="color: #800000">उद्योगपतियों और फ़िल्मी हस्तियों में थी बड़ी लोकप्रियता</span></h4>
<p style="text-align: justify">आजमगढ़ से चलकर सत्ता के गलियारों में अपनी अलग पहचान बनाने वाले अमर सिंह, देश के उद्योगपतियों व फिल्मी दुनिया के लोगों में भी उतने ही लोकप्रिय थे। देश के उद्योगपतियों, और फिल्मी दुनिया की पार्टियों की वह मुख्य रौनक हुआ करते थे। राजा को रंक और रंक को राजा बनाने की कला कोई अमर सिंह से सीखे। देश के सभी बड़े नेताओं से उनके व्यक्तिगत संबंध थे और वह अक्सर इन संबंधों का हवाला भी देते रहते थे। अपने दोस्तों को लाभ पहुंचाने में जहां वह इन संबंधों का इस्तेमाल करते थे वहीं दुश्मनों को बर्बाद करने में भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ते थे।</p>
<h4 style="text-align: justify"><span style="color: #800000">वह जो भी करते थे, मीडिया की सुर्खियों में आता था</span></h4>
<p style="text-align: justify">अमर सिंह की ताकत का अन्दाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह जो भी करते थे, वह मीडिया की सुर्खियों में आता था। चमक-दमक व दिखावे की राजनीति में उनका अटूट विश्वास था, लेकिन इसे ईश्वर की विडम्बना ही कही जाएगी कि जब उनका निधन हुआ तो हमेशा मीडिया की सुर्खियों में रहने वाले अमर सिंह की उतनी चर्चा नहीं हुई, जितनी उम्मीद थी। इसीलिए कहा गया है कि ‘आदमी को चाहिए कि वक्त से डर कर रहे, कौन जाने किसी घड़ी वक्त का बदले मिजाज’।</p>
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