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	<title>once a year for three consecutive years &#8211; Shaurya Times | शौर्य टाइम्स</title>
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		<title>फाइलेरिया की दवाएं, साल में एक बार लगातार तीन साल</title>
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		<pubDate>Fri, 18 Dec 2020 19:39:51 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[यूपी के 8 जनपदों में 21 दिसम्बर से शुरू होगा एमडीए कार्यक्रम लखनऊ : फाइलेरिया रोग के उन्मूलन हेतु उत्तर प्रदेश में कोविड-19 के दिशा-निर्देशों के अनुसार शारीरिक दूरी (दो गज की दूरी), मास्क और हाथों की साफ़-सफाई का अनुपालन करते हुए समुदाय को फाइलेरिया या हाथीपांव रोग से बचाने के लिए शुरू किये जा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify"><span style="color: #800000"><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="wp-image-94864 aligncenter" src="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2020/12/filaria-300x135.jpeg" alt="" width="684" height="308" srcset="https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2020/12/filaria-300x135.jpeg 300w, https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2020/12/filaria-768x346.jpeg 768w, https://www.shauryatimes.com/wp-content/uploads/2020/12/filaria.jpeg 833w" sizes="(max-width: 684px) 100vw, 684px" />यूपी के 8 जनपदों में 21 दिसम्बर से शुरू होगा एमडीए कार्यक्रम</strong></span></p>
<p style="text-align: justify"><strong>लखनऊ :</strong> फाइलेरिया रोग के उन्मूलन हेतु उत्तर प्रदेश में कोविड-19 के दिशा-निर्देशों के अनुसार शारीरिक दूरी (दो गज की दूरी), मास्क और हाथों की साफ़-सफाई का अनुपालन करते हुए समुदाय को फाइलेरिया या हाथीपांव रोग से बचाने के लिए शुरू किये जा रहे फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के सम्बन्ध में मीडिया की सक्रिय एवं महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा करने हेतु चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, उत्तर प्रदेश एवं ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटजीज द्वारा अन्य सहयोगी संस्थाओं यथा विश्व स्वास्थ्य संगठन, पाथ, प्रोजेक्ट कंसर्न इंटरनेशनल और सीफार के साथ समन्वय स्थापित करते हुए, मीडिया सहयोगियों के साथ मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया गया| इस कार्यशाला में प्रदेश के मीडिया सहयोगियों की उपस्थिति के साथ ही उन 8 जनपदों के मीडिया सहयोगियों ने भी वर्चुअल रूप से भाग लिया, जहाँ मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है|</p>
<p style="text-align: justify">इस अवसर पर, निदेशक वेक्टर बोर्न डिजीजेज़, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, उत्तर प्रदेश शासन, डॉ. अशोक पालीवाल ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए, कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला| उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार वेक्टर बोर्न डिजीजेज़, जैसे फाइलेरिया, कालाजार रोग आदि के उन्मूलन के लिए अत्यंत संवेदनशील है और इसके लिए रणनीति बनाकर गतिविधियाँ संपादित की जा रही हैं| डॉ. पालीवाल ने जनांदोलन की आवश्यकता को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि फाइलेरिया की दवाएं, साल में एक बार, लगातार तीन साल|</p>
<p style="text-align: justify">कार्यशाला के बढ़ते क्रम में, संयुक्त निदेशक फ़ाइलेरिया, डॉ. वी.पी.सिंह, उत्तर प्रदेश शासन ने जानकारी दी कि, भारत को वर्ष 2021 तक फाइलेरिया से उन्मूलन की प्रतिबद्धता को ध्यान में रखते हुए, कोविड-19 महामारी के दौरान भी महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलों को जारी रखने के महत्व को स्वीकार करते हुए, उत्तर प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश के 8 जिलों (औरैया, इटावा, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, कन्नौज, कौशांबी, रायबरेली एवं सुल्तानपुर) में, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार, कोविड-19 के मानकों को ध्यान में रखते हुए, मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एम.डी.ए.) कार्यक्रम आगामी 21 दिसम्बर से शुरू करने का निर्णय लिया है| उन्होंने बताया कि एमडीए गतिविधियों का संचालन कोविड-19 के मानकों का पालन करते हुए किया जाएगा, जिसमें हाथ की स्वच्छता, मास्क और शारीरिक दूरी (दो गज की दूरी) शामिल हैं।</p>
<p style="text-align: justify">उन्होंने सूचित किया कि इस अभियान में सभी वर्गों के एक करोड़ पचासी लाख पैतालीस हज़ार छ: सौ चौसठ (1,85,45,664) लाभार्थियों को फाइलेरिया से सुरक्षित रखने के लिए डी.ई.सी. और अल्बंडाज़ोल की निर्धारित खुराक प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा घर-घर जाकर, अपने सामने मुफ्त खिलाई जाएगी एवं किसी भी स्थिति में, दवा का वितरण नहीं किया जायेगा | 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और अति गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को ये दवाएं नहीं खिलाई जाएगी। डॉ. सिंह ने यह भी बताया कि रक्तचाप, शुगर, अर्थरायीटिस या अन्य सामान्य रोगों से ग्रसित व्यक्तियों को ये दवाएं खानी हैं| सामान्य लोगों को इन दवाओं के खाने से किसी भी प्रकार के दुष्प्रभाव नहीं होते हैं| और अगर किसी को दवा खाने के बाद उल्टी, चक्कर, खुजली या जी मिचलाने जैसे लक्षण होते हैं तो यह इस बात का प्रतीक हैं कि उस व्यक्ति के शरीर में फाइलेरिया के कीटाणु मौजूद हैं, जोकि दवा खाने के बाद कीटाणुओं के मरने के कारण उत्पन्न होते हैं|</p>
<p style="text-align: justify">विश्व स्वास्थ्य संगठन के राज्य एनटीडी समन्वयक डॉ. तनुज शर्मा ने बताया कि फाइलेरिया या हाथीपांव रोग, सार्वजनिक स्वास्थ्य की गंभीर समस्या है। यह रोग मच्छर के काटने से फैलता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार फाइलेरिया, दुनिया भर में दीर्घकालिक विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है। आमतौर पर बचपन में होने वाला यह संक्रमण लिम्फैटिक सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है और अगर इसका इलाज न किया जाए तो इससे शारीरिक अंगों में असामान्य सूजन होती है। फाइलेरिया के कारण चिरकालिक रोग जैसे; हाइड्रोसील (अंडकोष की थैली में सूजन), लिम्फोएडेमा(अंगों की सूजन) व काइलुरिया (दूधिया सफेद पेशाब) से ग्रसित लोगों को अक्सर सामाजिक बोझ सहना पड़ता है, जिससे उनकी आजीविका व काम करने की क्षमता भी प्रभावित होती है। यह एक घातक रोग है, हालांकि प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा दी गयी दवाएं खाने से, इस रोग से आसानी से बचा जा सकता है। फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम में एल्बेंडाजोल भी खिलाई जाती है जो बच्चों में होने वाली कृमि रोग का उपचार करता है जो सीधे तौर पर बच्चों के शारीरिक और बौद्धिक विकास में सहायक होता है। देश के फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के वर्तमान रणनीति के मुख्य रूप से दो स्तम्भ हैं-</p>
<p style="text-align: justify">1. मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एम.डी.ए.) &#8211; एंटी फाइलेरिया दवा यानि डी.ई.सी. और अल्बंडाजोल की वर्ष में एक खुराक द्वारा फाइलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में संक्रमण और बीमारी की रोकथाम।<br />
2. मोर्बिडिटी मैनेजमेंट एंड डिसेबिलिटी प्रिवेंशन (एम.एम.डी.पी.) यानि रुग्णता प्रबंधन एवं विकलांगता की रोकथाम-फाइलेरिया या हाथीपांव से संक्रमित व्यक्तियों की देखभाल एवं इलाज।</p>
<p style="text-align: justify">प्रोजेक्ट कंसर्न इंटरनेशनल के ध्रुव सिंह ने बताया कि एमडीए अभियान के सफल किर्यान्वयन के लिए ग्राम स्तर पर ग्राम प्रधानों के सहयोग से सोशल मोबिलाइजेशन से सम्बंधित गतिविधियां अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इसके लिए पंचायत स्तर की कार्यप्रणाली को और अधिक मज़बूत होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम की तिथि के बारे में समुदाय में जागरूकता फ़ैलाने के लिए आशा और आंगनवाडी के माध्यम से घर-घर जाकर, साथ ही स्थानीय स्कूलों के बच्चों के माध्यम से प्रचार-प्रसार किया जा सकता है।</p>
<p style="text-align: justify">पाथ के प्रतिनिधि डॉ.शोएब अनवर ने कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन अभियान में कार्य कर रही सभी संस्थाओं द्वारा, सरकार के साथ समन्वय बनाकर कार्य किया जा रहा है समुदाय एवं मीडिया के सहयोग से यह कार्यक्रम अवश्य सफल होगा| सीफार की रंजना द्विवेदी ने कहा कि इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए मीडिया की भूमिका बहुत सशक्त है क्योंकि समुदाय में प्रचार-प्रसार के माध्यम से जागरूकता अत्यंत शीघ्रता से फैलती है। उन्होंने कहा कि उपरोक्त 8 जिलों में स्थानीय मीडिया से भी समन्वय बनाकर कार्य किया जा रहा है ताकि, मीडिया के माध्यम से कार्यक्रम के संबंध में लोगों तक उचित और महत्त्वपूर्ण जानकारियां पहुँच सकें, इसके साथ ही उन्होंने कार्यशाला में उपस्थित और ऑफलाइन जुड़े मीडिया सहयोगियों से अनुरोध किया कि जिलों से फाइलेरिया बीमारी से संक्रमित मरीजों की मानवीय दृष्टिकोण से दर्शाती हुई कहानियां प्रकाशित करें।</p>
<p style="text-align: justify">कार्यशाला में, वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान ने मीडिया सहयोगियों से संवाद करते हुए कहा कि मीडिया द्वारा, समाज के हर वर्ग तक स्वास्थ्य से जुड़े किसी भी कार्यक्रम के मुख्य सन्देश और महत्वपूर्ण जानकारियां बहुत आसानी से पहुँच जाती हैं, इसीलिए, मीडिया द्वारा फाइलेरिया रोधी दवा के सेवन और इसके सकारात्मक परिणामों के बारे में जागरूकता फ़ैलाने की आवश्यकता बहुत अधिक है ताकि, लोग स्वयं को और अपने परिवार को इस घातक बीमारी से सुरक्षित रख सकें| फाइलेरिया का पूर्ण रूप से उन्मूलन हो और आने वाली पीढ़ी को एक स्वस्थ भविष्य मिल सके| अंत में, ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटजीज के अनुज घोष ने कहा कि मीडिया की भूमिका, सरकार द्वारा चलाये जा रहे, समस्त कार्यक्रम के सफल किर्यान्वयन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है| उन्होंने, मीडिया सहयोगियों से अनुरोध किया कि वे आगामी 21 दिसम्बर से प्रारंभ होने वाले एमडीए अभियान के दौरान, समाचारों और मीडिया कवरेज के माध्यम से लोगों को लिम्फैटिक फाइलेरियासिस से बचाव के लिए दवा खाने के लिए जागरूक करें|</p>
<p style="text-align: justify">
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