Supreme-Court – Shaurya Times | शौर्य टाइम्स https://www.shauryatimes.com Latest Hindi News Portal Wed, 27 Feb 2019 11:45:37 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.2 कश्मीरी छात्रों की सुरक्षा मामला : SC ने 11 राज्यों से एक सप्ताह में मांगा जवाब https://www.shauryatimes.com/news/33702 Wed, 27 Feb 2019 07:24:24 +0000 http://www.shauryatimes.com/?p=33702 नई दिल्ली : पुलवामा आतंकी हमले के बाद कुछ जगहों पर लोगों के गुस्से का शिकार हुए कश्मीरी छात्रों को सुरक्षा देने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई के दौरान केन्द्र सरकार ने कहा कि 22 फरवरी के आदेश के बाद हमले की कोई घटना नहीं हुई है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तब इस मामले में अभी कोई दिशा-निर्देश देने की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने 11 राज्य सरकारों को एक हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। पिछले 22 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार और 11 राज्य सरकारों को नोटिस जारी करते हुए पूछा था कि कश्मीरियों और अल्पसंख्यकों पर हमले रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं? चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने भीड़ की हिंसा मामले के नोडल अफसरों को निर्देश दिया था कि वो कश्मीरियों को धमकी, हमले या बायकॉट के मामले पर कार्रवाई करें। कोर्ट ने कहा था कि उसके आदेश और सुरक्षा के इंतजाम का व्यापक प्रचार-प्रसार हो।

कश्मीरी छात्रों की सुरक्षा के मसले पर केन्द्र के अलावा जिन राज्यों को सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया था उनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, पंजाब, हरियाणा, मेघालय, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर शामिल हैं। याचिका पर सुनवाई के दौरान अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा था कि केन्द्र ने सभी राज्यों को एडवाइजरी जारी किया है। नोडल अधिकारियों की तैनाती की गई है। याचिका वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंजाल्वेस ने दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलवामा आतंकी हमले के बाद कश्मीर घाटी के छात्रों पर देशभर के विभिन्न शैक्षिक संस्थानों में हमले की घटनाएं हो रही हैं। संबंधित प्राधिकारियों को इस प्रकार के हमले रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए।

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यूपी में पुलिस मुठभेड़ों पर सुप्रीम कोर्ट ने एनएचआरसी से मांगी रिपोर्ट https://www.shauryatimes.com/news/27704 Mon, 14 Jan 2019 11:16:29 +0000 http://www.shauryatimes.com/?p=27704 नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश में पिछले एक साल में हुए पुलिस मुठभेड़ की एसआईटी से जांच की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) से रिपोर्ट तलब किया है। सुप्रीम कोर्ट ने एनएचआरसी से 12 फरवरी तक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस मामले पर अगली सुनवाई 12 फरवरी को होगी। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि ये महत्वपूर्ण मसला है और हम इस पर विस्तृत सुनवाई करेंगे। सुनवाई के दौरान वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि एनएचआरसी राज्य में 17 एनकाउंटर मामलों की जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि एनएचआरसी को स्टेटस रिपोर्ट दायर करने का निर्देश दिया जाए। यूपी सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि एनकाउंटर फर्जी नहीं हुए हैं। राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट और एनएचआरसी के दिशा-निर्देशों के मुताबिक जांच कर रही है।

16 नवंबर 2018 को यूपी सरकार ने अपना जवाब दाखिल किया था। अपने हलफनामे में यूपी सरकार ने कहा है कि पुलिस ने खुद की रक्षा (सेल्फ डिफेंस) के लिए एनकाउंटर किए। राज्य सरकार ने कहा है कि पुलिस पर जब घातक हथियारों से हमला किया गया और अपराधियों ने सरेंडर करने से इनकार कर दिया तब उनका एनकाउंटर किया गया। यूपी सरकार ने हलफनामे में कहा है कि अपराधियों पर कार्रवाई के दौरान 4 पुलिसकर्मियों की भी मौत हुई है जबकि 48 अपराधी मारे गए हैं। हलफनामा में कहा गया है कि याचिका एकपक्षीय है। इसमें केवल एक समुदाय के अपराधियों की हत्या की बात कह गई है। हलफनामे में कहा गया है कि यह कहना गलत है कि किसी खास समुदाय को निशाना बनाकर एनकाउंटर किए गए। हलफनामा में कहा गया है कि 48 एनकाउंटर में 30 बहुसंख्यक समुदाय के थे जबकि 18 अल्पसंख्यक समुदाय के। पुलिस कार्रवाई में धर्म और जाति को आधार नहीं बनाया गया था बल्कि अपराधियों के अपराधों को आधार बनाया गया था।

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