म्यांमार में बोले विदेश सचिव हर्षवर्धन- जल्द से जल्द बहाल हो लोकतंत्र

नई दिल्ली (शाश्वत तिवारी)। विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला 22 दिसंबर से 23 दिसंबर 2021 तक म्यांमार की यात्रा पर हैं। अपनी यात्रा के पहले दिन उन्होंने राज्य प्रशासनिक परिषद के अध्यक्ष, नागरिक समाज के सदस्यों, राजनीतिक दलों के सदस्यों और अन्य वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। इस बैठक में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक संघ के लोग भी शामिल थे। फरवरी में म्यांमार सेना द्वारा तख्तापलट के बाद यह भारत की तरफ से उस देश से किया गया पहला उच्चस्तरीय संपर्क है।

श्रृंगला ने भारत की सीमा से लगे इलाकों में हिंसा को रोकने पर दिया जोर

भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि बैठक के दौरान विदेश सचिव श्रृंगला ने सभी संबंधित मुद्दों के साथ-साथ इस बात पर जोर दिया कि म्यांमार में लोकतंत्र की जल्द से जल्द वापसी, हिरासत एवं कैद में रखे गए लोगों की रिहाई, संवाद के माध्यम से मुद्दों का समाधान और सभी तरह की हिंसा पर पूर्ण रोक में भारत का हित है।

अपने बयान में मंत्रालय ने बताया कि विदेश सचिव श्रृंगला ने कहा कि म्यांमार में चल रहीं जन-केंद्रित सामाजिक-आर्थिक विकासात्मक परियोजनाओं में भारत सहयोग करता रहेगा। इन परियोजनाओं में भारत-म्यांमार सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ-साथ कलादान मल्टीमॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट और त्रिपक्षीय राजमार्ग जैसी कनेक्टिविटी पहल शामिल हैं। मंत्रालय ने कहा कि विदेश सचिव ने म्यांमार के लोगों के लाभ के लिए रखाइन राज्य विकास कार्यक्रम और सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम को लेकर चल रही परियोजनाओं को जारी रखने के लिए भारत प्रतिबद्ध है।

बयान के अनुसार इस यात्रा ने भारत को सुरक्षा से संबंधित मामलों को उठाने का अवसर प्रदान किया, विशेष रूप से दक्षिणी मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में हुई हाल की घटना को देखते हुए। बयान में मंत्रालय ने कहा कि विदेश सचिव ने किसी भी हिंसा को समाप्त करने और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। दोनों पक्षों ने यह सुनिश्चित करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई कि उनके संबंधित क्षेत्रों का किसी भी शत्रुतापूर्ण गतिविधि के लिए उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

कोविड-19 रोधी टीकों की 10 लाख खुराक सौंपी:

बयान के अनुसार, श्रृंगला ने जोर देते हुए कहा कि भारत म्यांमार के साथ एक लंबी सीमा साझा करता है। इसको देखते हुए भारत की सीमा से लगे इलाकों में हिंसा को रोकने तथा शांति एवं स्थिरता कायम करने की आवश्यकता है। इसके साथ ही विदेश सचिव ने म्यांमार के लोगों के लिए भारत द्वारा की जाने वाली निरंतर मानवीय सहायता से अवगत कराया। इसके साथ ही उन्होंने कोविड-19 महामारी के खिलाफ जारी म्यांमार की लड़ाई के लिए म्यांमार रेड क्रॉस सोसाइटी को “मेड इन इंडिया”  टीकों की दस लाख खुराक सौंपी। इस खेप के एक हिस्से का उपयोग भारत के साथ म्यांमार की सीमा पर रहने वाले समुदायों के लिए किया जाएगा। इसके अलावा म्यांमार को 10,000 टन चावल और गेहूं के अनुदान की भी घोषणा की गई।

1700 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं भारत और म्यांमार:

बता दें कि भारत, म्यांमार के साथ लगभग 1700 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। उस देश के किसी भी घटनाक्रम का भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों पर सीधा प्रभाव पड़ता है। म्यांमार मं  शांति और स्थिरता भारत के लिए, विशेष रूप से इसके उत्तर पूर्वी क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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