भारत की प्राचीन भाषा संस्कृत और भारतीय महाकाव्यों का दुनिया में बज रहा डंका

नई दिल्ली (शाश्वत तिवारी) भारत की सबसे प्राचीन भाषा संस्कृत और भारतीय महाकाव्यों का डंका आज दुनिया में बज रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक मन की बात कार्यक्रम में सर्बियन स्कॉलर डॉ० मोमिर निकिच एवं मंगोलिया के प्रोफ़ेसर जे. गेंदेधरम का जिक्र करते हुए कहा कि विभिन्न देशों के लोग हमारी संस्कृति के बारे में जानने के लिए उत्सुक हैं और उसे बढ़ाने में भी मदद कर रहे हैं।

सर्बियन स्कॉलर ने संस्कृत के 70 हजार से अधिक शब्दों का अनुवाद कर तैयार की डिक्शनरी

मन की बात कार्यक्रम में बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सर्बियन स्कॉलर डॉ. मोमिर निकिच ने एक डिक्शनरी तैयार की है। इस डिक्शनरी में शामिल किए गए संस्कृत के 70 हजार से अधिक शब्दों का सर्बियन भाषा में अनुवाद किया गया है। आपको ये जानकार और भी अच्छा लगेगा कि डॉ० निकिच ने 70 वर्ष की उम्र में संस्कृत भाषा सीखी है। वे बताते हैं कि इसकी प्रेरणा उन्हें महात्मा गांधी के लेखों को पढ़कर मिली।

मंगोलिया के प्रोफ़ेसर ने भारत के करीब 40 प्राचीन ग्रंथों, महाकाव्यों और रचनाओं का किया अनुवाद

कार्यक्रम में बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने मंगोलिया के एक प्रोफेसर के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि मंगोलिया के 93 (तिरानवे) साल के प्रोफ़ेसर जे. गेंदेधरम का भी है। पिछले 4 दशकों में उन्होंने भारत के करीब 40 प्राचीन ग्रंथों, महाकाव्यों और रचनाओं का मंगोलियन भाषा में अनुवाद किया है।

बता दें कि भारतीय संस्कृति, भाषा और काव्यों के लेकर दुनिया के कई देशों में रुचि बढ़ रही है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका भारतीय विदेश मंत्रालय और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) निभा रहे हैं। इसके लिए छात्रों, धार्मिक शिक्षाविदों और इतिहासकारों में भारत के कल्चर, प्राचीन भाषा संस्कृत और काव्यों को लोकप्रिय बनाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

संस्कृत सीखने के लिए आईसीसीर ने लिटिल गुरु एप शुरु किया:

भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद-आईसीसीआर ने संस्कृत अध्ययन के लिए लिटिल गुरु एप शुरू किया है। इसके आईसीसीआर ने गैमअप स्पोर्ट सर्विस टैक्नीकल के साथ करार किया है। लिटिल गुरु ने संस्कृत को सरल, रोचक और मनोरंजक बनाया है। यह एप खेल और प्रतियोगिता आधारित आसान तरीके से संस्कृत सीखने के इच्छुक और संस्कृत सीख रहे लोगों को सहायता प्रदान करता है।

गौरतलब हो कि पिछले पांच वर्षों के दौरान आईसीसीआर को संस्कृत में रुचि रखने वाले विदेशी नागरिकों के साथ-साथ विदेशों में रह रहे भारतीय लोगों से बड़ी संख्या में अनुरोध प्राप्त हो रहे थे। बौद्ध, जैन और कई अन्य धार्मिक पुस्तकें संस्कृत भाषा में हैं और संस्कृत के अध्ययन के लिए ऐसे देशों की ओर से मांग की जाती रही है। ये लिटिल गुरु एप संस्कृत को लोकप्रिय बनाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है।

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