जनप्रतिनिधियों के आचरण और व्यवहार से बढ़ती है सदन की गरिमाः ओम बिरला

लखनऊ/नई दिल्ली। लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश विधान सभा के नव-निर्वाचित सदस्यों हेतु आयोजित प्रबोधन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जनप्रतिनिधियों को आचरण और व्यवहार का उच्चतम मानदंड अपना ने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों के आचरण और व्यवहार से ही सदन की गरिमा बढ़ती है। इसलिए हमें सदन के अंदर आचरण के उच्चतम मानदंड अपनाने चाहिए और सदन की पवित्रता को कायम रखना चाहिए।

बिरला ने कहा कि विधान मंडलों की प्रतिष्ठा और प्रामाणिकता तभी होगी, जब विधान सभा के जनप्रतिनिधियों की अच्छी प्रामाणिकता होगी। सदन में जितनी अच्छी चर्चा और संवाद होगा, विधान सभा की गरिमा और प्रतिष्ठा में उतनी ही वृद्धि होगी। बिरला ने यह भी कहा की सदनों के अंदर व्यवधान उत्पन्न करने से या नारेबाजी और तख्तियां दिखाने से न तो माननीय सदस्यों को प्रतिष्ठा बढ़ती है और न ही सदन की गरिमा बढ़ती है। इसलिए, हमें ऐसी प्रथाओं को उत्साहित नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा की सदन चर्चा और संवाद के लिए है न की नारेबाजी के लिए ।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि कानून बनाते समय जितनी गंभीर चर्चा होगी, संवाद होगा, उतना ही अच्छा कानून बनेगा और उनसे लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आएगा। कानून लोगों के जीवन को परिवर्तित करने के लिए, लोगों का अधिकार देने के लिए और उनके जीवन को सहज और सरल बनाने के लिए होता है। इसलिए कानून जितना सरल और सहज बनेगा, उतना ही सहज और शीघ्र न्याय लोगों को मिलेगा।

बिरला ने सदन में उपस्थिति के महत्व का जिक्र करते हुए कहा कि विधान सभा में विधायकों की उपस्थिति कम होना चिंता का विषय है। जनप्रतिनिधि सदन में जितनी देर तक बैठेंगे, उतना ही उनको वरिष्ठ एवं अनुभवी विधायकों का मार्गदर्शन मिलेगा और सदन में सार्थक चर्चा और संवाद होंगे। लोकसभा अध्यक्ष ने कानून बनाने के लिए लोगों से इनपुट लेने पर जोर देते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों को लोगों से इनपुट लेना चाहिए ताकि उनकी आशाओं और आकांक्षाओं को विधानों में शामिल किया जा सके।

बिरला ने आगे कहा कि विधायकों द्वारा प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि हम सभी डिजिटल युग में जी रहे हैं, जहां सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी में होने वाली तीव्र प्रगति ने विधायिका और इसके सदस्यों की भूमिका और कार्यों पर बहुत प्रभाव डाला है। इसने संपूर्ण विश्व के विधान मंडलों के कार्यकरण की शैली को बिल्कुल बदल दिया है। उन्होंने सूचित किया कि ‘एक देश-एक विधायी प्लेटफॉर्म’अर्थात् ई-विधान के द्वारा पूरे देश के विधान मंडलों को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जा रहा हैं। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा पोर्टल होगा, जो न केवल हमारी संसदीय प्रणाली को तकनीकी रूप से विकसित करेगा, बल्कि देश की सभी लोकतांत्रिक इकाइयों को परस्पर जोड़ने का कार्य भी करेगा।

विधान सभाओं में सदस्यों की क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर बल देते हुए बिरला ने कहा कि विधान सभाओं में सूचना तकनीकी का अधिकतम उपयोग हो, इसके लिए विधायकों को प्रशिक्षण देने का काम होना चाहिए। साथ ही कानून बनाते समय विधायकों के लिए ब्रीफिंग सत्र आयोजित करना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि सदस्यों को नियम प्रक्रिया के तहत विधेयकों की प्रतियां समय से मिलनी चाहिए, ताकि वे कानून के प्रावधानों का अध्ययन कर सकें।

आज़ादी का अमृत महोत्सव के संदर्भ में लोकसभा अध्यक्ष ने सभी सदस्यों को देश प्रदेश के अंतिम पायदान पे खड़े गरीब और वंचित व्यक्ति के सामाजिक आर्थिक परिवर्तन की दिशा में परिश्रम करने का आहवान किया।

बिरला ने हर्ष व्यक्त किया कि उत्तर प्रदेश की वर्तमान विधान सभा कई मायनों में अभूतपूर्व है क्योंकि विधान सभा में 47 महिला सदस्य निर्वाचित होकर आईं हैं, जो अब तक राज्य में महिला सदस्यों की सर्वाधिक संख्या है। इसके अलावा इस विधान सभा में 100 से अधिक माननीय सदस्य पहली बार चुनकर आए हैं जबकि 200 से अधिक माननीय सदस्य पुनः निर्वाचित हुए हैं।

उन्होंने सभा के नए सदस्यों को सुझाव दिया कि सदन की प्रक्रियाओं का समुचित अध्ययन करें जिससे वे कार्यवाही में प्रभावी योगदान दे सकें। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने भी उपस्थित विधायकों को सम्बोधित किया। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री और विधायकगण भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

बाद में दिन में बिरला ने उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात की और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की।

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