भारतीय तटरक्षक बल ने बचाये 32 बांग्लादेशी मछुआरे

(शाश्वत तिवारी) । बंगाल की खाड़ी में अक्सर मछुआरों को खराब मौसम का सामना करना पड़ता है इस दौरान कई बार उनकी नाव पलट जाती हैं। इस विसम परिस्तिथि में मछुआरे अपने घर सुरक्षित वापस जा सकें इसके लिए भारत और बांग्लादेश के तटरक्षकों पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए हैं। मौजूदा समझौता ज्ञापन के तहत भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) ने मंगलवार को अपने बांग्लादेशी समकक्ष को सुरक्षित बचाए गए 32 मछुआरों को सौंपा।

बांग्लादेश को मिला भारत की दोस्ती का फायदा, आईसीजी ने बह कर आये 32 बांग्लादेशी मछुआरों को सकुशल लौटाया वापस।

हाई कमीशन ढाका ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि भारतीय तटरक्षक जहाज वरद ने 23 अगस्त को उन 32 बांग्लादेशी मछुआरों को भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा पर बांग्लादेश तटरक्षक बल के जहाज ‘ताजुद्दीन’ को सौंप दिया जिन्हें 19 और 20 अगस्त को खराब मौसम में उनकी नौकाओं के डूबने के बाद समुद्र से बचाया गया था। इनकी नौकाएं खराब मौसम में बंगाल की खाड़ी में पलट गई थीं। इनमें से 27 को आईसीजी ने बचाया। जबकि पांच को भारतीय मछुआरों ने सुरक्षित पानी से बाहर निकाला था।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा ‘कम दबाव क्षेत्र’ के पूर्वानुमान के पहले संकेत के साथ भारतीय तटरक्षक ने अपने जहाजों / विमानों और पश्चिम बंगाल तथा ओडिशा राज्य में सभी तटवर्ती इकाइयों को सतर्क कर दिया था। अपने कर्तव्यों के चार्टर के अंतर्गत भारतीय तटरक्षक अक्सर समुद्री खोज और बचाव अभियान चलाता है। भारतीय तटरक्षक न केवल संकट में फंसे मछुआरों और नाविकों को राहत प्रदान करता है, बल्कि मानवीय सहायता भी प्रदान करता है। यह ऑपरेशन सभी बाधाओं के खिलाफ समुद्र में कीमती जीवन की रक्षा के लिए भारतीय तटरक्षक की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस तरह के सफल खोज और बचाव अभियान न केवल क्षेत्रीय एसएआर ढांचे को मजबूत करेंगे बल्कि पड़ोसी देशों के साथ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को भी बढ़ाएंगे।

मछुआरों को सुक्षित बचाने के लिए बांग्लादेश समकक्ष ने आईसीजी को धन्यवाद दिया। इन 32 मछुआरों में से ज्यादातर समुद्र में तैरते हुए पाए गए थे। लगभग 24 घंटे तक समुद्र की लहरों से संघर्ष के बाद 20 अगस्त को उन्हें आईसीजी जहाजों और विमानों द्वारा देखा गया था। गौरतलब है कि मछुआरे बेहद सदमे की स्थिति में थे उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया और आईसीजी द्वारा भोजन और पानी उपलब्ध कराया गया। अब वो सकुशल अपने घर वापस लौट गए हैं।

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