केरल सरकार सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश में कोर्ट के फैसले पर समीक्षा याचिका दायर नहीं करेगी।

केरल सरकार सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर दिए गए कोर्ट के फैसले पर समीक्षा याचिका दायर नहीं करेगी। केरल सरकार का कहना है कि वह कोर्ट के फैसला का सम्मान करती है। राज्य के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा कि उनकी सरकार सबरीमाला जाने वाली महिला भक्तों की सुविधाओं का ध्यान रखेगी और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।केरल सरकार सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर लिए गए कोर्ट के फैसले पर समीक्षा याचिका दायर नहीं करेगी।मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि केरल और पड़ोसी राज्यों से महिला पुलिस कर्मियों को कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए नियुक्त किया जाएगा। महिलाएं जो सबरीमाला जाना चाहती हैं उन्हें रोका नहीं जा सकता।

बता दें कि 800 साल पुरानी प्रथा पर 29 सितंबर को अपना फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नारियों को सबरीमाला मंदिर में जाने की इजाजत दे दी। कोर्ट के इस फैसले के साथ ही, अब सबरीमाला मंदिर में महिलाएं भी भगवान अयप्‍पा के दर्शन कर सकती हैं। मंदिर की इस प्रथा को शीर्ष अदालत की एक पीठ ने गैर कानूनी घोषित किया। हालांकि कोर्ट के इस फैसले का कइयों ने विरोध भी किया। उन्होंने इस मसले पर पुनर्विचार याचिका दायर करने की भी बात कही। हालांकि केरल सरकार ने समीक्षा याचिका दायर करने से साफ इनकार किया है।

आइए हम आपको बताते हैं केरल राज्‍य में स्थित इस सबरीमाला मंदिर का संपूर्ण इतिहास। मंदिर में आखिर महिलाओं के प्रवेश लिए क्‍यों था प्रतिबंध।

क्‍या है मामला

कोर्ट के फैसले से पहले केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 साल से 50 साल की उम्र की महिलाओं के प्रवेश वर्जित था। खासकर 15 साल से ऊपर की लड़कियां और महिलाएं इस मंदिर में नहीं जा सकतीं थीं। यहां सिर्फ छोटी बच्चियां और बूढ़ी महिलाएं ही प्रवेश कर सकती हैं। इसके पीछे मान्यता है कि भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी थे। ऐसे में युवा और किशोरी महिलाओं को मंदिर में जाने की इजाजत नहीं है। सबरीमाला मंदिर में हर साल नवम्बर से जनवरी तक, श्रद्धालु अयप्पा भगवान के दर्शन के लिए जाते हैं, बाकि पूरे साल यह मंदिर आम भक्तों के लिए बंद रहता है। भगवान अयप्पा के भक्तों के लिए मकर संक्रांति का दिन बहुत खास होता है, इसीलिए उस दिन यहां सबसे ज़्यादा भक्त पहुंचते हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार अयप्पा

पौराणिक कथाओं के अनुसार अयप्पा को भगवान शिव और मोहिनी (विष्णु जी का एक रूप) का पुत्र माना जाता है। इनका एक नाम हरिहरपुत्र भी है। हरि यानी विष्णु और हर यानी शिव, इन्हीं दोनों भगवानों के नाम पर हरिहरपुत्र नाम पड़ा। इनके अलावा भगवान अयप्पा को अयप्पन, शास्ता, मणिकांता नाम से भी जाना जाता है। इनके दक्षिण भारत में कई मंदिर हैं उन्हीं में से एक प्रमुख मंदिर है सबरीमाला। इसे दक्षिण का तीर्थस्थल भी कहा जाता है।

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