बाजार में आई गिरावट की वजह से निवेशकों को करीब 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।

 गुरुवार की सुबह बाजार खुलने के साथ ही धाराशायी हो गया। बंबई स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स बाजार की शुरुआत के साथ ही 600 से अधिक अंकों तक टूट गया जबकि निफ्टी 200 से अधिक अंक का गोता लगाते हुए 10,620 के स्तर पर जा पहुंचा। बाजार में आई गिरावट की वजह से निवेशकों को करीब 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।
सेंसेक्स फिलहाल 800 अंकों की गिरावट के साथ 35,212 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है वहीं निफ्टी करीब 250 अंकों की गिरावट के साथ 10,650 के अहम सपोर्ट लेवल से नीचे जा चुका है।
बुधवार को सेंसेक्स 550 अंक टूट कर 35,975.63 पर बंद हुआ था। पिछले दो कारोबारी सत्र को मिलाकर देखा जाए तो सेंसेक्स में करीब 1100 से अधिक अंकों की गिरावट आई है।
बाजार में आई इस गिरावट से निवेशकों को करीब 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। गुरुवार को बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 14376383.74 लाख करोड़ रुपये से कम होकर 14067149.18 करोड़ रुपये हो गया।
सेंसेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट रिलायंस, टीसीएस, हीरो मोटोकॉर्प और एचडीएफसी के शेयरों में दर्ज की गई है। वहीं यस बैंक, वेदांत और टाटा स्टील के शेयरों में तेजी का माहौल है।
निफ्टी की बात की जाए तो वहां 44 शेयर लाल निशान में जबकि महज 6 शेयर हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं। बुधवार को बाजार में मचे कोहराम से निवेशकों को करीब 1.79 लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। सोमवार को बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 145.43 लाख करोड़ रुपये था, जो बुधवार को कम होकर 143.64 लाख करोड़ रुपये हो गया।
जानें बाजार में क्यों मचा कोहराम:
  
रुपये में नहीं थम रही गिरावट  डॉलर की मजबूत मांग के कारण गुरुवार को रुपया और कमजोर हुआ है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया गुरुवार सुबह 73.77 के निचले स्तर तक लुढ़क गया। अब एक डॉलर की कीमत 73.77 रुपये हो गई है, जो अब तक का निचला स्तर है। इंटर बैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया 73.67 के स्तर पर खुला जबकि बीते कारोबार में रुपया 73.34 पर बंद हुआ था।
सुबह 9.50 बजे डॉलर के मुकाबले रुपया 73.65 पर रहा। रुपये में आ रही गिरावट से देश का चालू खाता बढ़ने के साथ ही विदेशी पूंजी के बाहर निकलने की आशंका जोर पकड़ रही है। 
तेल की बढ़ती कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से बाजार आशंकित है। बुधवार को कच्चे तेल की कीमत 84 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जो पिछले चार साल में आई सबसे अधिक तेजी थी।
गुरुवार को भी तेल की कीमतों में राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। कच्चे तेल की कीमत 84 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 86 डॉलर प्रति बैरल हो चुकी है। 
विदेशी पूंजी का प्रवाह पिछले कुछ दिनों के दौरान संस्थागत विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में जमकर बिकवाली की है। आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर महीने में अब तक एफपीआई ने 455.02 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। वहीं सितंबर में यह आंकड़ा 1488.96 करोड़ रुपये का है।
रुपये की लगातार कमजोर होती हालत और तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई के बढ़ने की आशंका जोर पकड़ रही है। ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की तरफ मौद्रिक समीक्षा बैठक में ब्याज दरों के बढ़ाए जाने की संभावना प्रबल हो गई है। बाजार की नजर आरबीआई  के फैसले पर टिकी हुई है, जहां से उसे अगली दिशा मिलेगी।
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