साहित्य महाकुंभ: अनुराधा पौडवाल के सुरों की महफिल पर झूमे श्रोता

बेगूसराय : राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्मभूमि सिमरिया में आयोजित साहित्य महाकुंभ में शुक्रवार की रात सांस्कृतिक मंच पर श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। अनुराधा पौडवाल ने जब सुरों की तान छेड़ी तो, दर्शक ही नहीं मोरारी बापू भी झूम उठे। अनुराधा ने रंगारंग कार्यक्रम का शुभारंभ गुरु वंदना एवं गायत्री महामंत्र से किया। इसके बाद ‘मन मेरा मंदिर शिव मेरी पूजा’, ‘मां शेरावालिए … मां जोता वालिए’, ‘तूने मुझे बुलाया शेरावालिए’, ‘पायोजी मैंने राम रतन धन पायो’, ‘एक प्यार का नगमा है मौजों की रवानी है’, ‘धीरे-धीरे से मेरी जिंदगी में आना’, ‘नजर के सामने जिगर के पास’ आदि गानों की प्रस्तुति दी।

बिहार में प्रचलित गाना ‘जाते हो परदेस पिया जाते ही खत लिखना’ के साथ छठ पर्व के गीत ‘कांच ही बांस के बहंगिया-बहंगी लचकत जाए’ से लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। सांस्कृतिक कार्यक्रम का समापन ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ के साथ हुआ। अनुराधा पौडवाल ने कहा कि भगवान राम के सौभाग्य से मुझे सूर्यवंशी राजा राम के कथा एवं साहित्य के सूर्य दिनकर जी की स्मृति में आयोजित इस महाकुंभ में भाग लेने का सौभाग्य मिला। सिमरिया विश्व पटल पर छाया है। साहित्य महाकुंभ यहां के इतिहास में स्वर्णाक्षर से दर्ज होगा। अनुराधा के साथ हारमोनियम पर संगत कर रहे थे ‘परदेसी-परदेसी धुन’ पर मोहन सिंह, ढोलक पर शशिकांत शर्मा, कीपैड पर संजय कुमार एवं लीड गिटार पर थे कुमार संभव। अनुराधा का मंच पर स्वागत मुख्य यजमान विपिन ईश्वर के पुत्र अनिकेत ईश्वर ने किया।

 

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