फाइटर प्लेन दुर्घटना में लखनऊ के एयर कमोडोर ने गांव वालों को बचाने के लिए दी अपनी जान

गुजरात के कच्छ जिले में वायुसेना का लड़ाकू विमान जगुआर मंगलवार को उड़ान भरने के तत्काल बाद बारजा गांव के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। सुबह करीब 10:30 बजे हुए हादसे में विमान उड़ा रहे एयर फोर्स स्टेशन जामनगर के एयर ऑफिसर कमांडिंग एयर कमोडोर संजय चौहान (50) की मौत हो गई। संजय लखनऊ के इंदिरानगर के रहने वाले थे।

कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी
घटना पर रक्षा प्रवक्ता ले. कर्नल मनीष ओझा का कहना है, ‘जगुआर विमान नियमित प्रशिक्षण उड़ान पर था। दुर्घटना के कारणों की जांच के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी के आदेश दे दिए गए हैं।’

संजय चौहान को 17 तरह के विमान उड़ाने का था अनुभव
संजय को जगुआर, मिग-21, हंटर, बोइंग-737 समेत 17 तरह के विमानों को उड़ाने का अनुभव था। उन्हें राफेल, ग्रीपेन और यूरो फाइटर जैसे अत्याधुनिक विदेशी फाइटर प्लेन उड़ाने का भी अनुभव था। वे 16 दिसंबर 1989 में भारतीय वायुसेना में कमीशंड हुए थे।

26 जनवरी 2010 को वायु सेना मेडल से सम्मानित 50 वर्षीय चौहान बेहतरीन पायलट थे। उन्हें 3800 घंटे से अधिक का सेवा उड़ान का अनुभव था।

जल्द लौटूंगा मां… कहकर निकले लखनऊ से… आई तो मौत की खबर

इंदिरानगर बी-ब्लॉक में भूतनाथ मार्केट के पास रहने वाले संजय चौहान के पिता एनएस चौहान सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल रहे हैं। मां सरला चौहान हाउसवाइफ हैं। वे अपनी पत्नी अंजलि व बेटे यशवीर सिंह चौहान के साथ जामनगर में ही रहते थे। यशवीर इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है।
उनकी पड़ोसी अजरा ने बताया कि संजय चार दिन पहले शनिवार को लखनऊ आए थे। माता-पिता के साथ एक दिन बिताने के बाद रविवार को लौट गए। मां से कहकर गए थे कि अबकी जल्दी लौटूंगा… पर, उनकी मौत की खबर आई। घर पहुंची वायुसेना के अफसरों की टीम ने जब उनकी मां को बेटे की मौत की सूचना दी तो बेसुध हो गईं। वायुसेना के अफसर उन्हें अपने साथ ले गए हैं।

इस साहस को सलाम: गांव वालों की जान बचाने के लिए नहीं कूद विमान से

सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि देते हुए उनके दोस्त व मेजर सुरेंद्र पूनिया ने लिखा कि संजय चाहते तो विमान से इजेक्ट होकर अपनी जान बचा सकते थे। पर, ऐसा करने से विमान गांव पर गिरता और कई लोगों की जान जा सकती थी। सबको बचाने के लिए संजय विमान से इजेक्ट नहीं हुए।
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