Indian होने का सही अर्थ समझने के लिए संस्कृत भाषा सीखनी जरूरी : उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली : उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने देशवासियों से संस्कृत सीखने और सरकार से इस कार्य में सहयोग की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि हम सभी को संस्कृत सीखनी चाहिए ताकि हम अपने समृद्ध अतीत से जीवंत संपर्क बनाए रखें और भारतीय होने का सही अर्थ समझ सकें। उन्होंने कहा कि सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों को साथ मिलकर संस्कृत भाषा के संरक्षण व संवर्द्धन के लिए प्रयास करने चाहिए। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू रविवार को संस्कृत भारती द्वारा छतरपुर मंदिर परिसर में आयोजित तीन दिवसीय प्रथम विश्व सम्मेलन को सम्बोधित कर रहे थे। सम्मेलन में भारत सहित विश्व के 21 देशों से चार हजार प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। सम्मेलन का उद्देश्य संस्कृत को व्यवहार की भाषा के रूप में लोकप्रिय बनाना है।

इस अवसर पर 10वीं कक्षा तक मातृभाषा में शिक्षा पर बल देते हुए नायडू ने कहा कि सरकारों को इस  दिशा में प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी सीखने में कोई हर्ज नहीं है लेकिन नींव मातृभाषा में ही होनी चाहिए। उपराष्ट्रपति ने कहा कि संस्कृत भारत को जोड़नेवाली भाषा है। भारतीय ज्ञान-विज्ञान परंपरा संस्कृत भाषा में है। चाणक्य की राजनीति, भास्कराचार्य का गणित, चरक सुश्रुत का आयुर्वेद, पतंजलि का योग आदि विषय संस्कृत में विकसित हुए। इसी ज्ञान-विज्ञान के बलपर हमारे पुरखों ने कभी देश को समृद्ध किया था। यह हमारे ऋषि मुनियों द्वारा विकसित ज्ञानभंडार का हमने आज उपयोग करना चाहिए।

नायडू ने कहा कि आज के समय में संस्कृत की प्रासंगिकता पर कहा कि आज पर्यावरण, जल नियोजन और आरोग्य की समस्याएं हैं। संस्कृत में इन विषयों के समाधान के लिए बहुत कुछ है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि संस्कृत भारतीय भाषाओं को जोड़ने वाली कड़ी का काम करती है, क्योंकि अधिकांश भारतीय भाषाएं इसी से जन्मी हैं। हम संस्कृत के बिना भारत की कल्पना नहीं कर सकते। जब तक हम संस्कृत नहीं सीखेंगे, तब तक भारत की सांस्कृतिक विरासत की गहराई और भव्यता का अहसास नहीं कर सकते।

उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने संस्कृत के प्रसार के लिए कई कदम उठाये हैं। उन्होंने गैर सरकारी संगठनों से अपील की कि वे भी सरकार के इन प्रयासों में सहयोग दें। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री डॉ हर्षवर्धन, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, संस्कृत भारती के अखिल भारतीय अध्यक्ष प्रो. भक्तवत्सल शर्मा और संस्कृत भारती के अखिल भारतीय महामंत्री श्रीदेव पुजारी सहित अनेक गण्यमान्य लोग मौजूद थे।

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